कोलकाता [जागरण ब्यूरो]। बंगाल कांग्रेस को फिलहाल तृणमूल नेता ममता बनर्जी को छोड़कर राज्य में किसी से दोस्ती नहीं करनी है। पार्टी ने ज्योति बसु की उस अपील को ठुकरा दिया है, जिसमें वरिष्ठ माकपा नेता ने हिंसा खत्म करने के लिए कांग्रेस का साथ मांगा था। बसु ने कहा था कि माओवादी-तृणमूल साठगांठ के मद्देनजर उप चुनावों में कांग्रेसियों को वाम मोर्चा उम्मीदवारों का समर्थन करना चाहिए।
राज्य कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने ज्योति दा की अपील को एक चालाकी भरा कदम करार दिया। उनका कहना था कि वसु की अपील का मकसद तृणमूल-कांग्रेस गठजोड़ में फूट डालना है। गठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगाना है। हम इस अपील को सिरे से खारिज करते हैं।
कांग्रेस नेता भट्टाचार्य का कहना था कि माकपा दरअसल लोकसभा चुनावों के बाद मिल रही लगातार हार से बौखला गई है। कामरेड इस बात का पूरा प्रयास कर रहे हैं कि किसी भी तरह से कांग्रेस-तृणमूल गठबंधन टूट जाए। उन्होंने कहा कि हम माकपा की इस साजिश से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। ज्योति बसु की अपील माकपा की इसी रणनीति का हिस्सा है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि पूरा माकपा नेतृत्व इन दिनों तृणमूल-माओवादी साठगांठ के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने में लगा है। जिसका कुल मकसद है कि इस बहाने कांग्रेस नेतृत्व ममता से अपनी दूरियां बढ़ा ले और बंगाल में एक बार फिर लाल परचम लहराने लगे।
भट्टाचार्य ने कहा कि हम पूरी तरह से सतर्क हैं। माकपा के किसी बहकावे में आने वाले नहीं हैं। रविवार को ज्योति बसु ने आश्चर्यजनक तरीके से कांग्रेस की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने संबंधी बयान जारी किया। राज्य के लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले बसु ने कहा था कि तृणमूल और माओवादी साथ-साथ मिलकर राज्य में हिंसा फैला रहे हैं। हिंसा के इस माहौल को खत्म करने के लिए कांग्रेसी वाम मोर्चा का साथ दें। अपने बयान में बसु ने कांग्रेस को यह भी याद दिलाया कि हमने भी सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए एक बार केंद्र में कांग्रेस का साथ दिया था। बयान का साफ संदेश था कि माकपा उस मदद के बदले राज्य में कांग्रेस का साथ मांग रही है। पश्चिम बंगाल में विधान सभा की 10 सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में 7 नवंबर को वोट पड़ेंगे।