
नई दिल्ली [संजय मिश्र]। महाराष्ट्र में सत्ता बांटने को लेकर जारी झगड़े में कांग्रेस और राकांपा एक-दूसरे के 'धैर्य' की परीक्षा लेते लग रहे हैं। सरकार गठन में हो रही देरी पर राज्यपाल के बुलाए जाने के बाद भी दोनों पार्टियों ने मंत्रालयों के बंटवारे पर अपनी-अपनी 'ठसक' छोड़ी नहीं है। बस इतनी प्रगति हुई है कि कांग्रेस-राकांपा की साझा सरकार बनने का ऐलान हो गया।
दरअसल, सरकार में मंत्रियों की संख्या और विभागों के बंटवारे को लेकर झगड़े की वजह से महाराष्ट्र में सरकार नहीं बन पा रही है। समझा जाता है कि मुंबई में राज्यपाल एस.सी. जमीर ने मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण और उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल को मंगलवार को चर्चा के लिए बुला कर सरकार गठन की प्रक्रिया जल्दी पूरा करने का ही संकेत किया। इसी का असर है कि मंगलवार देर रात कांग्रेस और राकांपा के शीर्ष रणनीतिकार सत्ता बंटवारे के आखिरी दांव-पेंच की मशक्कत के लिए जुटे रहे। कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल और राकांपा नेता नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने सुलह का फार्मूला निकालने के लिए माथापच्ची की।
कांग्रेस की ओर से दिए जा रहे संकेतों से साफ है कि वह राकांपा को 18-19 से ज्यादा मंत्री पद नहीं देना चाहती। कांग्रेस अपने खाते में मुख्यमंत्री समेत 23 मंत्री रखने की ठान चुकी है। राकांपा के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस की बढ़ी ताकत को स्वीकार करते हुए ही पार्टी अपने लिए उप मुख्यमंत्री समेत 21 और कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री समेत 22 मंत्रियों का आंकड़ा सही मान रही है। राकांपा ने यह भी साफ कर दिया है कि विधानसभा अध्यक्ष भी उसी की पार्टी का होगा।
बात सिर्फ संख्या पर नहीं अटकी है। विभागों की हिस्सेदारी को लेकर भी खींचतान है। गृह, वित्ता, लोक निर्माण और आबकारी जैसे मंत्रालय छोड़ने के लिए राकांपा राजी नहीं है, जबकि कांग्रेस इस बार इन विभागों में भी अपना हिस्सा देख रही है।
राकांपा के एक वरिष्ठ नेता ने अनौपचारिक चर्चा में माना कि दोनों मुद्दों पर दोनों पक्ष अपनी-अपनी जगह अड़े हैं। दरअसल दोनों पार्टियां सत्ता की कमान में अपने-अपने प्रभाव के लिए एक दूसरे के धैर्य की परीक्षा ले रही हैं। इस एनसीपी नेता का साफ कहना था कि कांग्रेस की रणनीति ही रही है कि मामले को लंबा खींचो और थका दो, लेकिन इस दफा हमें भी जल्दी नहीं है।
सत्ता बंटवारे की इस किच-किच की वजह से हुई देरी के चलते ही प्रफुल्ल पटेल को सफाई देनी पड़ी कि राकांपा के सरकार से बाहर रखने की खबर बेबुनियाद है। दरअसल, राकांपा की ओर से विधायक दल के नेता चुने गए छगन भुजबल ने मुंबई में कहा कि 1999 के फार्मूले पर सहमति नहीं बन पा रही है। इसलिए अब सरकार बनाना कांग्रेस के हाथ में है। पटेल ने सफाई दी कि भुजबल के इस बयान को संदर्भ से अलग कर देखा गया।
पहले 'नाइट वाचमैन' तो अब 'कामचलाऊ' चह्वाण
मुंबई [ओमप्रकाश तिवारी]। पिछले वर्ष 26 नवंबर के आतंकी हमले के बाद 'नाइट वाचमैन' के रूप में लाए गए मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण अब भी महाराष्ट्र के कामचलाऊ मुख्यमंत्री की ही भूमिका निभाने को मजबूर हैं। मंगलवार, तीन नवंबर को पिछली विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया, और 12 दिन पहले लगभग पूर्ण बहुमत पा चुका कांग्रेस-राकांपा गठबंधन आपसी झगड़े में अभी तक सरकार नहीं बना सका है।
मंत्रियों की संख्या एवं मलाईदार मंत्रालयों के लोभ में फंसे कांग्रेस-राकांपा नेता एक ओर सरकार बनाने में असफल सिद्ध हो रहे हैं तो दूसरी ओर राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण पद भी खाली पड़े हैं। मसलन राज्य के पुलिस महानिदेशक दो दिन पहले ही अवकाश ग्रहण कर चुके हैं, मुंबई के महानगरपालिका आयुक्त प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली रवाना हो चुके हैं। राज्य के मुख्य सचिव इसी माह के अंत में अवकाश ग्रहण करनेवाले हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय का कामकाज फिलहाल कैंटीन के इर्दगिर्द सिमट कर रह गया है।
22 अक्तूबर को विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद माना जा रहा था कि काफी मजबूत स्थिति पाने वाला कांग्रेस-राकांपा गठबंधन संभवत: अगले दिन ही सरकार बनाने का दावा पेश कर देगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
पिछली विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होता देख राज्यपाल एस.सी. जमीर ने कांग्रेस और राकांपा विधायक दल के नेताओं - अशोक चह्वाण एवं छगन भुजबल - को बुला कर सरकार बनने में आ रही अड़चनों का जायजा लिया। उनके सामने भी स्थिति साफ न हो पाने पर उन्होंने चह्वाण को ही कामचलाऊ मुख्यमंत्री के रूप में काम करते रहने के निर्देश दिए।
दूसरी ओर, विपक्षी शिवसेना-भाजपा इस अनिश्चितता का लाभ लेने के लिए राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग लगातार उठा रहे हैं। दो दिन पहले कांग्रेस की ओर से प्रस्ताव रखा गया था कि पिछली विधानसभा का कार्यकाल रहते ही कम से कम मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री का शपथग्रहण करवा लिया जाए। लेकिन सोमवार देर शाम राकांपा ने इस प्रस्ताव को ठुकराकर गेंद पूरी तरह से कांग्रेस के पाले में डाल दी है।