
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। नकली दवाओं का बनना-बिकना और लोगों पर इनका कहर रोकने में नाकाम रही सरकार अब जनता की ही शरण में गई है। नकली या घटिया दवा बनाने-बेचने वालों को पकड़वाने वाले को सरकार ने 25 लाख रुपये तक बतौर इनाम देने का फैसला किया है। इस इनाम योजना के विस्तृत नियम सरकार ने तय कर लिए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि देश में नकली दवाओं का कारोबार बड़े पैमाने पर धड़ल्ले से चल रहा है और इसे रोक पाने में सरकारी तंत्र नाकाम रहा है। तब स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनता को ही यह जिम्मेदारी सौंप दी है।
मंत्रालय के मुताबिक अब कोई भी व्यक्ति केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन [सीडीएससीओ] के क्षेत्रीय या उप क्षेत्रीय अधिकारी को नकली या घटिया दवाओं से संबंधित शिकायत भेज सकता है। ये अधिकारी इस योजना के लिए नोडल अधिकारी के तौर पर काम करेंगे। इस योजना के तहत किसी व्यक्ति को इनामी रकम तभी मिलेगी, जब उसकी सूचना के आधार पर नकली दवा, सौंदर्य प्रसाधन या चिकित्सा उपकरण बरामद हो। बरामद माल की कीमत का 20 फीसदी इनाम के तौर पर दिया जाएगा। यह रकम अधिकतम 25 लाख रुपये हो सकती है।
सूचना देने वालों की दावेदारी परखने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने नौ सदस्यों की एक समिति भी बनाई है। सरकार के मुताबिक यह सूचना देने वाले व्यक्ति के बारे में जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। यहां तक कि पुरस्कार का फैसला लेने वाली समिति के नौ सदस्यों को भी उसके ब्यौरे नहीं दिए जाएंगे। मंत्रालय ने इसके लिए जो नियम तय किए हैं, उनके मुताबिक इनामी रकम की एक चौथाई राशि बरामदगी मामले में अदालत में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद मिलेगी, एक चौथाई तब मिलेगी, जब अदालत मामले को पूरी तरह निपटा ले। बाकी की आधी रकम सरकार तब देगी, जब आरोपी उस पर ऊपर की किसी अदालत में शिकायत न करे। यानी सरकार पूरी तरह निश्चिंत हो जाए।