
नई दिल्ली, [जागरण ब्यूरो]। कभी भारत पर तालिबान को वित्तीय सहायता देने का आरोप, तो कभी बलूचिस्तान में संकट को प्रोत्साहन देने की तोहमत। यह सब इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तान में कोई प्रभावी सरकार ही नहीं है। विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने मंगलवार को पाकिस्तान के इस तरह के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वहां जो हो रहा है वह उनका खुद का किया धरा है, उससे भारत का कोई लेना देना नहीं है।
विदेश मंत्री पत्रकारों से बातचीत में पिछले दिनों पाकिस्तानी सरकार की तरफ से आए तमाम आरोपों का खंडन कर रहे थे। उनका साफ कहना था कि पाक में जिस तरह से भ्रम की स्थिति बनी हुई है उससे तो यही साबित होता है कि वहां कोई प्रभावी सरकार ही नहीं है। कृष्णा का साफ इशारा था कि कभी पाकिस्तानी आंतरिक सुरक्षा मंत्री रहमान मलिक बेतुके बयान देना शुरू करते हैं तो कभी वहां के सूचना मंत्री कुछ और बोलते हैं। गौरतलब है कि रहमान मलिक ने आरोप लगाया था कि भारत से तालिबान को वित्तीय मदद मिलने के उनके पास सबूत हैं। वहीं सूचना मंत्री ने सोमवार को कह दिया कि तालिबान के गढ़ दक्षिण वजीरिस्तान में भारतीय सेना के हथियार और बारूद मिले हैं जिससे दिल्ली का हाथ होना साबित होता है। विदेश मंत्री ने इन सभी आरोपों को खारिज कर बेतुका बताया है।
विदेश मंत्रालय के उच्च पदस्थ अधिकारी मानते हैं कि मुंबई कांड पर अपनी नाकामी पर से दुनिया का ध्यान हटाने के मकसद से ही पाकिस्तान के हुक्मरान इस तरह के प्रलाप कर रहे हैं। जब भी मुंबई कांड पर नतीजे की मांग भारत करता है तो पाकिस्तानी नेता इस तरह का आरोप मढ़ना शुरू कर देते हैं। इस तरह की स्थिति तब ज्यादा आती है जब मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड मुहम्मद हाफिज सईद पर शिकंजा कसने की मांग साउथ ब्लाक की ओर से उठती है।
जानकारों की माने तो मुंबई कांड की सुनवाई की तारीख जब भी पास आती है तो इस तरह के हथकंडे पाक के रणनीतिकार अपनाते हैं। यही वजह है कि ऐसे आरोपों में उलझने की जगह भारत ने लगातार पाक को 26/11 के मामले में नतीजे देने को ही कहा है।