नई दिल्ली, [जागरण ब्यूरो]। झारखंड में चुनावी गठबंधन को लेकर चल रही कवायदों में जद [यू] और भाजपा के बीच तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। खींचतान का आलम यह रहा है कि जद [यू] के तेवरों के कारण भाजपा को अपनी केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक कुछ देर के लिए टालनी पड़ी। जद [यू] जहां पिछले चुनाव की तरह ही 18 सीटें चाहता है वहीं भाजपा उसे दस सीट से ज्यादा देने के पक्ष में नहीं है। बुधवार को फिर से दोनों दलों के बीच मुद्दे सुलझाने की कोशिश होगी।
पिछले दिनों विभिन्न राज्यों में गठबंधन को लेकर भाजपा और जद [यू] के बीच थोड़े तीखे हो रहे मनभेद का असर मंगलवार को भी दिखा। बिहार में जद [यू] ने अपना रुतबा दिखाया था। झारखंड में भाजपा भी वही रुतबा दिखाना चाहती है। शायद इसी कारण भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन के लिए मंगलवार की सुबह चुनाव समिति की बैठक बुलाई थी। पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी समेत समिति के दूसरे सदस्य कार्यालय पहुंच चुके थे। लेकिन जद [यू] के तेवरों के कारण बैठक टालनी पड़ी। सूत्र बताते हैं कि जद [यू] अध्यक्ष शरद यादव ने संदेश भिजवाया था कि पहले तालमेल और सीटों की संख्या तय कर लें उसके बाद उम्मीदवारों का ऐलान हो। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में हाल के संसदीय चुनाव के वक्त भाजपा ने जद [यू] की सीटों पर भी अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए थे। शरद ने इसे गठबंधन धर्म के विपरीत बताकर आपत्ति जताई थी।
इधर पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी समेत झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा व दूसरे नेताओं के साथ शरद यादव की दो दौर में बैठक चली। सूत्र बताते हैं कि जद [यू] 18 सीटें चाहता है। जबकि भाजपा का मानना है कि जद [यू] के कई नेता अब अलग रास्ता अख्तियार कर चुके हैं। लिहाजा उसे 10 से ज्यादा सीटें नहीं दी जा सकती है। वैसे भी पिछली बार पार्टी 18 में सिर्फ छह सीटें जीत पाई थी। इधर जद [यू] को लगता है कि पड़ोसी राज्य बिहार में नीतीश के सियासी जलवे का असर झारखंड में भी दिख सकता है। संकेत हैं कि तालमेल पर दोनों पार्टियों के बीच बुधवार को फिर से बातचीत होगी।