नई दिल्ली, [जागरण ब्यूरो]। नक्सल प्रभावित इलाकों में आदिवासियों के वन अधिकारों और विकास को लेकर राज्य सरकारों ने क्या कुछ किया है, इस बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बुधवार को उनसे कैफियत तलब करेंगे। आदिवासियों के अधिकारों को लेकर संवेदनशील व गंभीर दिखने की इस कवायद में राज्यों से रिपोर्ट मांगी जाएगी और विकास कार्य तेज करने के निर्देश भी दिए जाएंगे।
बढ़ती नक्सली गतिविधियों और आदिवासियों की अच्छी जनसंख्या वाले राज्य झारखंड में चुनावी सरगर्मी के बीच आदिवासी बहुल राज्यों के मुख्यमंत्रियों और जनजातीय कल्याण मंत्रियों की बैठक काफी अहम है। वैसे, मुद्दा तो सीधा-सीधा आदिवासियों के कल्याण और अधिकारों का है, लेकिन जाहिर तौर पर इसके पीछे नक्सल समस्या के समूल नाश का मकसद भी है। बैठक में प्रधानमंत्री का जोर आदिवासियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने और उनके लिए बनी योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी पर होगा। इसमें ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पर्यावरण और वन तथा जल संसाधन जैसे उन सभी मुद्दों पर चर्चा होगी, जिनसे सीधे तौर पर आदिवासी जुड़े हैं। राज्य सरकारों से प्रगति रिपोर्ट भी मांगी जाएगी।
झारखंड में चुनाव के मद्देनजर बैठक का राजनीतिक महत्व होने से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले ही केंद्र सरकार ने झारखंड के आदिवासियों पर वन अधिनियम के तहत चल रहे एक लाख मामले वापस लिए थे। उसके बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने झारखंड का दौरा किया और आदिवासियों के बीच समय भी बिताया था। अब मंत्रियों की इस बैठक में भी यही संकेत देने की कोशिश होगी कि केंद्र आदिवासियों के अधिकारों को लेकर गंभीर है।