
नई दिल्ली [संजय मिश्र]। महाराष्ट्र में लगता है राज्यपाल एस.सी. जमीर की फटकार काम आई। कांग्रेस-राकांपाने कड़े तोल-मोल के सत्ता के बंटवारे का फार्मूला निकाल लिया है। मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण गुरुवार को दिल्ली आकर इस समझौते की औपचारिकता पूरी करेंगे और शाम को मुंबई लौट कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। शुक्रवार को महाराष्ट्र में कांग्रेस-राकांपा की सरकार का शपथ ग्रहण हो जाएगा।
कांग्रेस के संकटमोचक अहमद पटेल और राकांपा के थिंक टैंक प्रफुल्ल पटेल के बीच देर रात तक हुई माथापच्ची के बाद 23-19 के फार्मूले पर सहमति बन सकी। यानी सरकार में कांग्रेस के 23 तो, राकांपा के 19 मंत्री होंगे। राकांपा को थोड़ा झुकना पड़ा। पिछली बार की तुलना में उसे दो मंत्री पद कम मिलेंगे, लेकिन गृह, वित्त और आबकारी जैसे भारी-भरकम विभाग अपने खाते में बनाए रखने में वह सफल रही है। कांग्रेस काफी मशक्कत के बाद राकांपा को 21 के बजाय 19 मंत्रियों पर मनाने में तो कामयाब रही, लेकिन बड़े मंत्रालयों के नाम पर वन, पर्यावरण और श्रम ही अपने पास रख सकी। गुरुवार को समझौते पर दोनों दल औपचारिक रूप से मुहर लगा देंगे और शुक्रवार को चह्वाण सरकार शपथ ले लेगी।
राज्यपाल ने दोनों ही पार्टियों को जल्द सरकार बनाने के लिए कहा था। तब दोनों खेमे में अचानक बेचैनी बढ़ी। मुंबई से राकांपा के वरिष्ठ नेता और उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल, आर.आर. पाटिल और अजीत पवार तत्काल दिल्ली पहुंचे। देर शाम इन नेताओं की पार्टी प्रमुख शरद पवार के घर पर बैठक हुई। वहीं सुलह प्रस्ताव का अंतिम खाका तैयार हुआ। उधर, राकांपा के मुख्य रणनीतिकार नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल भी आनन-फानन में महाराष्ट्र दौरे से लौटे और बुधवार को प्रस्तावित अपनी अमेरिका यात्रा स्थगित कर कांग्रेस के रणनीतिकार अहमद पटेल से मंत्रणा की।
सूत्रों के मुताबिक राकांपा ने अंतिम प्रस्ताव में 20 मंत्रियों की मांग रखी थी। साथ ही, पिछली बार के सभी भारी-भरकम मंत्रालयों से कोई भी छोड़ने से साफ इन्कार कर दिया था। अहमद पटेल 19 पर बात बनाने में सफल रहे, लेकिन गृह, वित्त और आबकारी जैसे अहम मंत्रालयों पर राकांपा की मांग स्वीकार कर ली। विधानसभा अध्यक्ष के लिए कांग्रेस पहले ही हामी भर चुकी है।
गौरतलब है कि राज्यपाल जमीर ने चुनाव नतीजे आने के दो हफ्ते बाद भी सरकार का गठन नहीं कर पाने के लिए कांग्रेस व राकांपा को कहा था कि उन्हें जनादेश का आदर करना चाहिए। इसके बाद मुख्यमंत्री ने अगले 48 घंटों में सरकार के गठन की बात कही और इसी के बाद दिल्ली में झगड़ा सुलझाने के लिए बैठकों का दौर तेज हो गया।