
पटना। कर्नाटक में जारी सत्ता संघर्ष से भाजपा आलाकमान ठीक से निपट नहीं पा रहा है। अब बिहार का बवाल उसके मत्थे पड़ने वाला है। यहां पार्टी के कई सांसद और विधायकों ने भाजपा नेता व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बटाईदारों को किसान क्रेडिक कार्ड स्कीम के दायरे में लाने की मोदी की कोशिश से भाजपा नेता भड़के हुए हैं। वह मोदी को हटाने की मांग पर उतर आए हैं।
हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने राज्य भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन से इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि मोदी को हटाने की कोई योजना नहीं है।
दरअसल बिहार भाजपा में असंतोष की आग काफी दिनों से अंदर ही अंदर सुलग रही थी। मोदी ने इसे भड़कने का खुद ही मौका दे दिया। नाराज भाजपाइयों ने एक बार फिर बटाईदारों को केसीसी [किसान क्रेडिट कार्ड] के बहाने उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के खिलाफ 'विद्रोह' सा कर दिया है। उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठाई और कहा कि मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ना, जीतना मुश्किल है। नाराज भाजपाई जल्द दिल्ली जाएंगे। जहां केंद्रीय नेतृत्व से मोदी की शिकायत कर उन्हें विधायक दल के नेता और उप मुख्यमंत्री दोनों ही पदों से हटाने की मांग करेंगे।
भाजपा के करीब दस विधायक मंगलवार को पूर्व स्वास्थ्य मंत्री चंद्रमोहन राय के घर जुटे थे। बैठक में अमरेद्र प्रताप सिंह, डा.विनोद यादव, प्रदीप दास, भूपेंद्र नारायण सिंह, रामायण मांझी, अनिल सिंह, रामेश्वर चौरसिया,नीतीन नवीन तथा पूर्व मंत्री अजीत सिंह आदि मौजूद थे। एजेंडा था-बटाईदारों को सरकार द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड देना। भाजपा नेता व सहकारिता मंत्री गिरिराज सिंह भी मोदी से सहमत नहीं है। उनका कहना है कि मोदी के इस बयान से भाजपा को नुकसान पहुंच सकता है। राज्य सभा सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री सी पी ठाकुर भी मोदी से खुश नहीं है। उन्होंने कहा कि उपचुनावों में मिली हार के कारण पहले ही सदमे में पड़े राजग पर मोदी के इस गैर जिम्मेदारान बयान से संकट और गहरा गया है। उपमुख्यमंत्री मोदी ने सोमवार को कहा था कि बटाईदारों को क्रेडिट कार्ड स्कीम के दायरे में लाने के लिए सभी आयुक्तों तथा जिलाधिकारियों को निर्देश दे दिए गए है। लेकिन उनका यह बयान ही उनके लिए मुसीबत बन गया। भाजपा विधायकों का मानना है कि इस बयान से सूबे में अनावश्यक तनाव फैलेगा और यह चुनावी दृष्टिकोण से भाजपा और जदयू दोनों के लिए नुकसानदेह है। उपचुनाव में इसका खामियाजा भुगता जा चुका है। अब विधानसभा चुनाव में पार्टी की लुटिया डूबने की स्थिति बनती दिख रही है।