नई दिल्ली [जागरण न्यूज नेटवर्क]। वंदेमातरम के खिलाफ फतवा जारी करने वाले जमीयत उलेमा हिंद के मंच पर गृहमंत्री पी. चिदंबरम और योग गुरु स्वामी रामदेव की मौजूदगी को लेकर संत समाज भी आपे से बाहर है। खासकर स्वामी रामदेव के खिलाफ तो हरिद्वार से लेकर अयोध्या तक के संत-महंत तल्ख रुख अख्तियार किए हुए हैं।
उत्तर प्रदेश के देवबंद में जमीयत उलेमा हिंद के अधिवेशन में मंच पर मंगलवार को गृहमंत्री पी. चिदंबरम और योग गुरु बाबा रामदेव भी मौजूद रहे। इसी तीन दिवसीय अधिवेशन में वंदेमातरम के खिलाफ फतवा भी जारी किया गया है। इसको लेकर अयोध्या में अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने बुधवार को कहा है कि इस तरह का प्रस्ताव पूरी तरह भारत विरोधी है। क्योंकि वंदेमातरम राष्ट्रगीत है।
उन्होंने कहा कि जिस सम्मेलन में राष्ट्रगीत के विरोध में प्रस्ताव पारित हो रहा हो, उसमें शामिल गृहमंत्री को कुर्सी पर बैठे रहने का हक कतई नहीं है। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद उनसे इस्तीफे की मांग करती है और ऐसा न करने पर केंद्र सरकार से उन्हें पद से हटाने की अपील करती है। उन्होंने सम्मेलन में योग गुरु स्वामी रामदेव की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले तो वे इस सम्मेलन में शामिल क्यों हुए? यदि हुए तो इस तरह के प्रस्ताव का विरोध उन्होंने क्यों नहीं किया।
इस संबंध में अखाड़ा परिषद उनसे स्पष्टीकरण मांगती है। महंत ज्ञानदास ने कहा कि इस संबंध में संतों का आक्रोश देखते हुए आगामी दस नवंबर को हरिद्वार में होने वाली बैठक में रणनीति तय की जाएगी। महंत ज्ञानदास ने स्वामी रामदेव को व्यवसायिक संत कहा।
अखिल भारतीय त्रय अनी अखाड़ों के प्रधानमंत्री माधव दास, निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्री महंत धर्मदास व महासचिव गौरीशंकर दास, हनुमानगढ़ी की बसंतिया पट्टी के महंत प्रेमशंकर दास, अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास, श्रीरामबल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, आचार्य रामदेव, महंत जनार्दन दास आदि ने वंदेमातरम के विरोधियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री व जगन्नाथ धाम ट्रस्ट हरिद्वार के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी हंसदास ने भी इस प्रकरण पर स्वामी रामदेव के प्रति नाराजगी जताई है।
संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास ने कहा कि वंदेमातरम का विरोध करने वालों के विरुद्ध उनकी सेना पूरे देश में जन आदोलन करेगी।
देश के पूर्व गृह राज्यमंत्री व परमार्थ आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी चिन्मयानंद ने भी कड़े तेवर दिखाए हैं। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद गृहमंत्री को कुर्सी के मोहपाश में बंधकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के उदघोष वंदेमातरम के अपमान में साझेदार करार दिया।
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वंदेमातरम एक देशभक्त
का मां को सलाम: रामदेव
हरिद्वार, जागरण संवाददाता: योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि वंदेमातरम कोई पूजा प्रक्रिया नहीं है। यह मातृभूमि एवं जन्मभूमि के प्रति एक देशभक्त का सलाम है। इसका शाब्दिक अर्थ है मां को सलाम। उन्होंने कहा कि वंदेमातरम गाकर एक नागरिक अपने वतन को सर्वस्व मानकर उस पर कुर्बानी का संकल्प लेता है। इससे राष्ट्रप्रेम का इजहार कर गर्व की अनुभूति होती है।