
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में जारी राजनीतिक हिंसा पर अंतत: केंद्र सरकार को मुंह खोलना ही पड़ गया। गुरुवार को गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा है कि वह राजनीतिक हिंसा पर हर हाल में रोक लगाए, इसके कारण चाहे जो भी हों।
चिदंबरम ने यहां एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि उन्होंने पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से बात की है। उनसे कहा है कि हिंसा की वजह राजनीतिक पार्टियों का द्वेष क्यों न रहा हो। प्रदेश सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह कानून व्यवस्था बनाए रखे। हुगली के खानाकुल में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस और माकपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसा के सवाल पर चिदंबरम ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रदेश से समय-समय पर रिपोर्ट तो तलब करती ही रहती है। लेकिन खानाकुल की घटना को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री से बात की। बकौल चिदंबरम-हमने मुख्यमंत्री से कहा है कि वह प्रदेश में राजनीतिक हिंसा हर हाल में रोकें। इसके पीछे कारण चाहे जो भी रहे हों, कोई मायने नहीं रखते।
दूसरी ओर गृहमंत्री पी. चिदंबरम का बयान माकपा को नागवार गुजरा है। कहा है कि केंद्र सरकार में शामिल तृणमूल कांग्रेस ही प्रदेश में राजनीतिक हिंसा के लिए जिम्मेदार है।
कोलकाता में वाम मोर्चा के अध्यक्ष विमान बोस ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि-चिदंबरम ने क्या कहा है, इसके बारे में उन्होंने पढ़ा-सुना तो नहीं है। लेकिन अगर उन्होंने इस तरह की नसीहत दी है तो राज्य सरकार को उसके अनुरूप हिंसा पर अंकुश लगाने की कार्रवाई करनी चाहिए। संविधान के अनुसार कानून व्यवस्था कायम रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार के पास है। उन्होंने कहा-'विगत कुछ महीनों से तृणमूल कांग्रेस राज्य में कानूनविहीनता की स्थिति पैदा कर रही है और लोगों को भ्रमित करने के लिए झूठ का सहारा ले रही है।'