
श्रीनगर [जागरण संवाददाता]। कश्मीर मसले पर बातचीत के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के न्यौते पर हुर्रियत कांफ्रेंस का उदारवादी खेमा ऊहापोह की स्थिति में है। गुरुवार को इसी मसले पर हुर्रियत के उदारवादी खेमे की एक बैठक मीरवाइज मौलवी उमर फारूक की अगुवाई में हुई। जिसमें किसी भी निर्णय तक नहीं पहुंच पाने पर एक बार फिर से अगले सप्ताह बैठक का निर्णय लिया गया है।
बताया जाता है कि बैठक में उपस्थित कार्यकारिणी के सदस्यों के अलग-अलग विचार उभरे। याद रहे कि प्रधानमंत्री ने बीते माह अपने घाटी दौरे के दौरान कश्मीर मसले के समाधान के लिए सभी पक्षों को बातचीत का न्यौता दिया था। बताया जा रहा है कि गुरुवार को हुई बैठक में सदस्यों ने पूर्व में हुई बातचीत के हश्र का हवाला दिया। कुछ ने बातचीत के लिए पहले माहौल तैयार करने की बात कही। जिसमें राजनीतिक बंदियों को छोड़ा जाना व सशस्त्र बलों को विशेष अधिकार अधिनियम को खत्म किए जाने की बात भी उठी।
बताया जाता है कि बैठक में मीरवाइज मौलवी उमर फारूक भी अपने साथियों की जुबान बोलते दिखे। बताया जाता है कि उन्होंने साफ कहा कि बातचीत जरूरी है, लेकिन उससे पहले कश्मीर की आजादी के समर्थक दलों को एक मंच पर लाना ही उनकी प्राथमिकता है। इससे पहले बीते मंगलवार को भी मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने अपने धड़े की कार्यकारी समिति और आमसभा की संयुक्त बैठक बुलाई थी। ताकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बातचीत की खुली पेशकश पर आम राय बनाई की जा सके।
हालांकि उस दिन वह बातचीत को लेकर ज्यादा ही उत्साहित नजर आ रहे थे। तब भी उनके सहयोगियों ने केंद्र के साथ बातचीत से पूर्व अतीत में हुए वार्ताओं के दौर में लिए गए फैसलों को लागू कराने पर जोर दिया था। साथ ही कहा था कि हुर्रियत के संविधान के तहत ही बातचीत होनी चाहिए। इससे हटने का मतलब केंद्र के आगे पूरी तरह झुकना। इसके बाद बैठक किसी फैसले पर पहुंचे बिना स्थगित हो गई थी अब एक बार फिर से बातचीत बेनतीजा खत्म हो गई।