गरीबों को हक मार अमीर हो रहे नक्सली

 
Nov 06, 10:55 pm

नई दिल्ली, [राजकिशोर]। केंद्र सरकार ने तो थैली गरीबी और पिछड़ापन दूर करने के लिए खोली, लेकिन उससे अपनी झोली भरने लगे नक्सली। माओवादियों के सर्वाधिक प्रभाव वाले 34 जिलों में त्वरित विकास के लिए केंद्र से भेजी जाने वाली मदद से भी नक्सलियों ने बतौर रंगदारी या लेवी मोटी रकम वसूलनी शुरू कर दी। ये तथ्य सामने आने से चौंके गृह मंत्रालय ने उच्चस्तरीय बैठक की और राज्य सरकारों व केंद्रीय एजेंसियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि नक्सलियों को विकास योजनाओं का धन न जाए।

दरअसल, नक्सल प्रभावित इलाकों को मुख्य धारा से जोड़ने और उनका पिछड़ापन दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने त्वरित विकास योजना मंजूर की थी। राज्य सरकारों की योजनाओं से अलग केंद्र सरकार ने इन इलाकों के विकास के लिए पंचवर्षीय योजना के तहत 1700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट जारी किया है। इसमें केंद्र के कई मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं।

दंतेवाड़ा, बस्तर, गढ़चिरौली, लालगढ़, बोकारो और चतरा जैसे इलाकों के भी सबसे पिछड़े गांवों व कस्बों पर केंद्रीय एजेंसियों का फोकस है। मुख्य धारा से कटे इन गांवों और कस्बों तक विकास पहुंचाने के लिए सड़क और परिवहन व्यवस्था मजबूत करने को सरकार ने वरीयता दी है। इसके अलावा बिजली या टेलीफोन के खंभे, स्कूल और सरकारी भवनों के लिए भी काम शुरू हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, काम शुरू होने से पहले ही नक्सलियों ने ठेकेदारों और विभागों से अपनी 'लेवी' वसूलनी शुरू कर दी। नक्सलियों के अर्थतंत्र की प्रमुख रीढ़ दरअसल यह लेवी [जबरन वसूली] ही है जो वह किसी भी काम को शांतिपूर्ण तरीके से होने देने की गारंटी के तौर पर वसूलते आ रहे हैं।

राज्य सरकार के अधिकारियों और इंजीनियरों से लेवी के नाम पर जबरन वसूली नई बात नहीं है। अब राज्य के साथ-साथ केंद्रीय धन की पहली किस्त भी नक्सलियों के पास पहुंचने की सूचना गृह मंत्रालय को बेहद नागवार गुजरी है। पिछले हफ्ते नार्थ ब्लाक में शीर्ष अधिकारियों ने इस मुद्दे पर चर्चा कर राज्य सरकारों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि विकास योजनाओं का धन कहीं और नहीं जाना चाहिए। केंद्र ने यह भी ताकीद की है कि योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए ईमानदार और सख्त लोगों की नियुक्ति की जाए और देखा जाए कि धन का दुरुपयोग न हो।

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था, 'नक्सलियों के खिलाफ हथियारबंद कार्रवाई से ज्यादा सरकार का जोर है, विकास के जरिये लाल गलियारे को समेटना। इसीलिए, केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की सरकारों से राय-मश्विरे के बाद सर्वाधिक नक्सल प्रभावित 34 जिलों को त्वरित विकास के लिए चुना था। अब अगर पिछड़ों और गरीबों की मदद के धन से भी नक्सली अमीर हों, तो यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।'




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