नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। भाजपा आलाकमान के सिर के बल खड़े होने के बावजूद कर्नाटक संकट सुलझ नहीं पा रहा है। भाजपा के संकटमोचक भले ही संकेत दे रहे हों कि गतिरोध जल्दी ही खत्म हो जाएगा, लेकिन बगावत का झंडा उठाए जर्नादन रेड्डी के रवैये को देखते हुए जमीनी हकीकत बिल्कुल उल्टी नजर आ रही है।
रेड्डी ने बंगलूर में से भाजपा नेतृत्व के सामने अपनी शर्तो का पुलिंदा भेज दिया है। साथ में यह चेतावनी भी कि 'शर्ते मानो या फिर सरकार गंवाओ।'
सूत्रों के मुताबिक शर्ते इतनी कड़ी हैं कि उन्हें मानना बेहद कड़वा घूंट निगलना होगा। यदि भाजपा नेतृत्व बागियों की शर्ते मानता है तो पहले से संकट में घिरी भाजपा का बचा-खुचा इकबाल भी खत्म हो जाएगा। वैसे कहा यह जा रहा है कि संकट सुलझाने और सरकार बचाने के लिए रेड्डी बंधुओं की दो शर्ते मान कर येद्दयुरप्पा ने पहले ही अपनी तरफ से समझौते का इशारा कर दिया है। लेकिन बाकी शर्ते और भी कड़वी हैं। इन शर्तो के अनुसार उप मुख्यमंत्री का नाम रेड्डी सुझाएंगे और मंत्रिमंडल में उनके मनमाफिक कई दूसरे बदलाव भी किए जाएंगे। बात मान ली तो येद्दयुरप्पा को छह महीने की मोहलत होगी। उसके बाद उन्हें हटना होगा। यानी भाजपा जितनी भी कसरत कर ले, बीमारी खत्म नहीं होगी।
भाजपा नेतृत्व के शुतुरमुर्गी रवैए ने मुख्यमंत्री येद्दयुरप्पा को भी बेहाल कर दिया है। शनिवार को उनकी परेशानी आंखों से भी छलक पड़ी। बाढ़ से जूझ रहे कर्नाटक की जनता को छोड़ कर मुख्यमंत्री दिल्ली में पड़े हैं, सरकार अधर में है और भाजपा नेतृत्व संकट सुलझाने में असमर्थ साबित हो रहा है।
संकट से मुक्ति पाने के लिए शनिवार को येद्दयुरप्पा ने जम्मू जाकर वैष्णो देवी के दरबार में शीश भी झुकाया। वहां के लिए रवाना होने से पहले यहां उन्होंने यह दावा भी किया कि उनकी सरकार कार्यकाल पूरा करेगी। आलाकमान ने उन पर भरोसा जताया है। लेकिन रेड्डी भाई भी अड़े हैं। शनिवार को भी उन्होंने दोहराया कि उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और न ही इस बाबत कभी कोई सहमति बनी थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी एक या दो दिन में 'अच्छा' निर्णय करेगी। जम्मू से बेंगलूर पहुंचे येद्दयुरप्पा ने अपनी तरफ से रेड्डी बंधुओं को वार्ता का संदेश भी भेजा है, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व में चुप्पी है।