
नई दिल्ली [संजय मिश्र]। आंध्रप्रदेश में सत्ता की विरासत की जंग अभी थमती नजर नहीं आ रही। दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगन मोहन रेड्डी ने अपने पिता की खाली विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ने की कांग्रेस नेतृत्व से पेशकश की है। लोकसभा सांसद जगन की इस रणनीति के मायने साफ हैं कि वह मुख्यमंत्री पद पर अपनी दावेदारी की लौ बुझने नहीं देना चाहते। वहीं मुख्यमंत्री के. रोसैया हाईकमान से मुलाकात के बाद अपनी कुर्सी सुरक्षित रहने को लेकर आश्वस्त नजर आए।
महाराष्ट्र में सत्ता की किच-किच से उबरते ही शनिवार को कांग्रेस नेतृत्व ने आंध्र की विरासत की जंग सुलझाने की पहल शुरू कर दी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस सिलसिले में मुख्यमंत्री रोसैया को बुलाकर लंबी मंत्रणा की और विधायक दल की बैठक बुलाए जाने के बारे में पूछताछ की। वहीं जगनमोहन रेड्डी अपने पूरे परिवार के साथ शनिवार दस, जनपथ पहुंचे। जगन के निकटस्थ सूत्रों के अनुसार इसी दौरान उन्होंने सोनिया गांधी से अपने पिता के निधन से खाली हुई पुलीवेनदल्ला विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ने की इच्छा जताई। इस सीट से वाईएसआर परिवार के भावनात्मक जुड़ाव को बताने से भी वे नहीं चूके।
सूत्रों के अनुसार जगन की इस इच्छा पर हाईकमान ने तत्काल कुछ नहीं कहा मगर यह संकेत जरूर दिया कि वाईएसआर परिवार की अनदेखी नहीं की जाएगी। लेकिन उम्मीदवारी जगन को ही मिलेगी, यह स्पष्ट नहीं किया गया। सोनिया गांधी से इस मुलाकात के दौरान जगन की मां, बहन और पत्नी भी उनके साथ दस, जनपथ में मौजूद थीं। करीब 40 मिनट की मुलाकात के बाद जगन परिवार समेत मीडिया से मुखातिब हुए बिना अपने पिता के राजनीतिक गुरु केवीपी रामचंद्र राव के फार्म हाउस चले गए।
मगर वाईएसआर समर्थकों का साफ कहना था कि जगन ने उपचुनाव लड़ने की पेशकश कर नेतृत्व को फिर यह संदेश तो दे ही दिया कि मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी उन्होंने अब भी नहीं छोड़ी है। वाईएसआर समर्थकों की रणनीति साफ है कि यदि हाईकमान अनुभव की कमी के आधार पर जगन को आंध्र की विरासत नहीं सौंपता तो इसकी एवज में कोई महत्वपूर्ण राजनीतिक ओहदा तो दे ही। बताया जाता है कि कांग्रेस नेतृत्व भी भले जगन को प्रदेश की सत्ता की कमान सौंपने को इच्छुक न हो मगर वह आंध्र में यह संदेश भी नहीं जाने देना चाहती की वाईएसआर परिवार की अनदेखी की जा रही है। इसीलिए सोनिया गांधी ने जब रोसैया को चर्चा के लिए बुलाया तो जगन को भी परिवार समेत दस, जनपथ में पूरी तवज्जो दी गई। सोनिया गांधी व प्रधानमंत्री से मिलने के बाद रोसैया भी अपनी कुर्सी को लेकर आश्वस्त दिखे और कहा कि 2009 में ही आंध्र कांग्रेस विधायक दल की बैठक हो सकती है। गौरतलब है कि रोसैया को वाईएसआर के निधन के बाद मुख्यमंत्री बनाया गया और विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं हुआ था। विधायक दल के नेता के चुनाव की औपचारिकता पूरी होने के बाद ही रोसैया के आगे से कार्यवाहक का तमगा हट पाएगा।