
रांची। कोड़ा एंड के अरबों के घोटाले में अहम किरदार रहे विनोद सिन्हा के भाई विकास सिन्हा को प्रवर्तन निदेशालय [ईडी] की कस्टडी में सौंप दिया गया। रांची स्थित विशेष अदालत ने शनिवार को विकास को दस दिनों के रिमांड पर प्रवर्तन अधिकारियों के हवाले कर दिया। अब उसे दिल्ली ले जाने की तैयारी है। विकास को हवाला लेन-देन और अवैध निवेश में उसकी संलिप्तता के सिलसिले में शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था।
प्रवर्तन निदेशालय के निशाने पर अब कोड़ा, विनोद सिन्हा और संजय चौधरी हैं। जिनको गिरफ्तार करने के लिए अधिकारी बेताब हैं। कोड़ा तो अस्पताल से निकलते ही पकड़ लिए जाएंगे। प्रवर्तन व आयकर अधिकारियों के लिए असल सिरदर्द संजय चौधरी और विनोद सिन्हा बने हुए हैं। यह जोड़ी उनके पकड़ से बाहर चल रही है। दोनों के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी करने के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने देश के सभी हवाई अड्डों को अलर्ट करने के लिए आव्रजन ब्यूरो को पत्र लिखा है। अधिकारियों का कहना है कि संजय-विनोद हमारी पकड़ से दूर हैं। उन्हें पकड़ने के लिए लुक आउट नोटिस जारी कर दिया गया है। अब एयर पोर्ट पर अलर्ट के लिए कहा गया है।
सूत्रों का कहना है कि रविवार को शुरुआती पूछताछ में विकास ने अपने गुनाह कबूल कर लिया है। उसने कोलकाता से 40 करोड़ रुपये हवाला चैनल से बाहर भेजने की बात भी मान ली है। अधिकारियों के अनुसार, रिमांड पर मिले विकास को विस्तार से पूछताछ के लिए नई दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय मुख्यालय जल्द ले जाया जाएगा। जहां उससे कोड़ा और उनके करीबी विनोद सिन्हा व संजय चौधरी पर लगे मनी लांड्रिंग के आरोपों की पुष्टि के लिए पूछताछ होगी।
झारखंड महाघोटाले के नायक पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की गिरफ्तारी के लिए बेताब प्रवर्तन और आयकर अधिकारियों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। अपोलो के डाक्टरों ने कोड़ा को फिलहाल छुट्टी देने से मना कर दिया है। डाक्टरों का कहना है कि कोड़ा के पेट में अभी भी गड़बड़ी है। अस्पताल के जन संपर्क अधिकारी जावेद अख्तर के अनुसार, उनकी छुट्टी के बारे में डाक्टर रविवार या उसके अगले दिन सोमवार फैसला लेंगे। आयकर व प्रवर्तन अधिकारियों की पूछताछ के दौरान पेट दर्द में शिकायत के बाद कोड़ा को मंगलवार को रांची के अपोलो में भर्ती कराया गया था।
जांच की आंच साधु यादव व सम्राट तक
रांची [जागरण ब्यूरो]। मधु कोड़ा और विनोद सिन्हा प्रकरण की जांच की आंच तेजी से बिहार की ओर बढ़ती जा रही है। पहले लालू प्रसाद का नाम लेनदेन की डायरी में दिखा। और अब उनके साले साधु यादव के भी हाथ माइंस के काले कारोबार में दिखने लगे हैं। साधु यादव के साथ बिहार के पूर्व मंत्री सम्राट चौधरी का नाम भी जब्त दस्तावेजों में सामने आया है। मामला चाईबासा क्षेत्र के आड़ाबुरू और बिहबूरू माइंस के आवंटन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय फिलहाल पूरे मामले में हुए पैसों के लेनदेन के हिसाब-किताब के सबूतों को पुख्ता करने में जुटा है।
इस मामले में इन दोनों नेताओं के अलावा मुकुंद स्टील की लाइजनिंग से जुड़े एक-दो लोगों के नाम भी सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, विकास सिंह की कंपनियों में छापेमारी के क्रम में इस पूरे प्रकरण से जुड़े कुछ दस्तावेज प्रवर्तन निदेशालय के हाथ लगे हैं। मुकुंद स्टील को इन माइंसों के आवंटन के एवज में करीब साढ़े चार करोड़ के लेनदेन की बात सामने आ रही है। इस माइंस आवंटन में बिचौलिए की भूमिका में किसी पवन राणा का नाम सामने आ रहा है, जबकि एक दूसरा नाम राजेश साह का है, जिसे मुकुंद स्टील से जुड़ा बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इन माइंसों के आवंटन के एवज में शुरुआती लेनदेन तो 2008 के जुलाई माह में ही हुआ। लेकिन इसके बाद भी मुकुंद स्टील का काम आगे नहीं बढ़ा। दस्तावेजों में इस मामले में रकम वापसी से जुड़ी जानकारियां भी हैं। प्रवर्तन निदेशालय को पक्की सूचना है कि एक-दो महीने पहले भी दो करोड़ का ट्रांजेक्शन हुआ। विभिन्न कंपनियों के जरिए पैसे खपाए गए। अब प्रवर्तन निदेशालय खान विभाग से इस पूरे मामले में विभागीय कार्रवाई की जानकारी हासिल करने की तैयारी में जुटा है। खान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी व माइंस डील में विनोद सिन्हा के ब्रेन माने जाने वाले बसंत भट्टाचार्य से भी इस संदर्भ में पूछताछ की गई है।
इस मामले में लेनदेन की अवधि का जो जिक्र हो रहा है, उसी दौरान लालू प्रसाद के साले और अब कांग्रेसी नेता साधु यादव के बेटी की शादी हुई थी। उसमें शामिल होने के लिए मधु कोड़ा विशेष विमान से पटना गए थे और उसी विमान से वापस रांची लौट आए थे। प्रवर्तन को संदेह है कि उस शादी में विनोद सिन्हा, संजय चौधरी के अलावा उनके दूसरे करीबी लोग भी शामिल हुए थे। प्रवर्तन निदेशालय उस अवधि में साधु यादव के रांची ट्रिपों की पड़ताल में भी जुटा है। खबर है कि पिछले वर्ष पांच-छह माह के दौरान ही साधु यादव कम से कम दस बार रांची आए, लेकिन मधु कोड़ा के आवास नहीं गए। इन अधिकांश दौरों में साधु यादव एयरपोर्ट के वीआईपी लांज में ही एक-दो घंटे बिताने के बाद वापस पटना या दिल्ली लौट जाया करते थे। प्रवर्तन को संदेह है कि इन ट्रिपों में उनकी मुलाकात नियमित रूप से विनोद सिन्हा व मधु कोड़ा से एयरपोर्ट पर ही होती रही। और इसी दरम्यान फाइलों पर कार्रवाई का सिलसिला भी चलता रहा। बसंत भट्टाचार्य ने विशेष मौकों पर फाइलों के विभाग से निकल कर बाहर जाने की बात कबूली है। प्रवर्तन माइंस आवंटन से संबंधित दूसरे मामलों की पड़ताल में भी जुटा है। खासकर अक्टूबर 2007 से जुलाई 2008 के बीच बढ़ाई गई माइंस फाइलों की। प्रवर्तन को पूरा विश्वास है कि बिहार के इन नेताओं ने नियमित रूप से इस दरम्यान अलग-अलग कंपनियों के लिए मीडियेटर की भूमिका निभाई। बता दें कि दो ही दिन पहले आयकर को छापे में एक डायरी मिली है, जिसमें लालू प्रसाद के अलावा कई दूसरे नेताओं के नाम के सामने कुछ आंकड़ें लिखे हुए हैं, जिसके आधार पर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि यह पैसों के लेनदेन का हिसाब-किताब है।
सोना-चांदी के कारोबार में भी खासी दखल
जमशेदपुर [जागरण संवाददाता]। 'हरि अनंत, हरि कथा अनंता'। विनोद सिन्हा ग्रुप के कारनामे भी कुछ यूं ही है। ताजा कड़ी है सोने का कारोबार। आयकर विभाग एवं प्रवर्तन निदेशालय को जानकारी हाथ लगी है कि कोड़ा एंड कंपनी से जुड़े बालाजी ग्रुप की शुरूआत सोने-चांदी के व्यवसाय से हुई थी। फिर धीरे-धीरे बालाजी ने अन्य क्षेत्रों में पांव पसारे। डायवर्सिफाइड बिजनेस के बावजूद बालाजी बुलियंस के बैनर तले सोने-चांदी का कारोबार प्रमुखता के साथ होता रहा। बालाजी बुलियंस ने बड़े पैमाने पर सोने का आयात किया और फिर इसे देश के अन्य भागों में पहुंचाया।
सूत्रों के अनुसार बालाजी बुलियंस ने सोने के व्यापार के लिए उत्तारप्रदेश सरकार के साथ समझौता किया था। यूपी सरकार को इस समझौते से राजस्व की अच्छी-खासी राशि प्राप्त हो रही थी। समझौते में बालाजी बुलियंस को सोने के आयात पर करों में विशेष छूट दी गई थी। बदले में कंपनी की ओर से सरकार को एडवांस टैक्स जमा कराया जा रहा था। यूपी सरकार बमबम थी किंतु इधर बालाजी बुलियंस द्वारा गुपचुप रूप से उत्तारप्रदेश के लिए मंगाए जा रहे सोने को पूरे देश में भेजा जा रहा था। आयकर विभाग को उक्त प्रकरण में फिलहाल प्रारंभिक सूचनाएं मिली है। विभाग यह खंगालने में लगा है कि आखिर सोने के कारोबार के लिए उत्तारप्रदेश की किस सरकार के साथ समझौता हुआ था और समझौते के मुख्य बिंदु क्या थे? बालाजी बुलियंस द्वारा कितनी मात्रा में सोने का इंपोर्ट किया जाता था? इसमें उत्तारप्रदेश में सोने की कितनी खपत होती थी? दूसरी ओर नोएडा के विशेष आर्थिक परिक्षेत्र में अरविंद व्यास व मनोज पुनमिया ने सोना-चांदी के ट्रेडिंग के लिए एक और कंपनी खोली थी। कंपनी सोना-चांदी व्यवसाय के लिए उत्तारप्रदेश सरकार के साथ ज्वायंट वेंचर करना चाहती थी लेकिन किन्हीं कारणों से यह परवान नहीं चढ़ सका।