कांग्रेस ने भी तृणमूल के सुर में सुर मिलाया

 
Nov 07, 08:18 pm

कोलकाता [जागरण ब्यूरो]। माकपा की ओर से एकतरफा बढ़े दोस्ती के हाथ को झटकने के बाद कांग्रेस अब ज्यादा आक्रामक हो गई है। बंगाल में वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने भी तृणमूल के सुर में सुर मिलाकर बोलना शुरू कर दिया है।

माओवादी हिंसा से घिरी बुद्धदेव सरकार की मुश्किलें बढ़ाने के लिए उसने कड़ा तेवर अपना लिया है। पार्टी ने कहा कि अगर अगले कुछ दिनों में वाम मोर्चा सरकार राज्य में जारी हिंसा के माहौल को काबू में करने में विफल रही तो कांग्रेस भी बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग करेगी। ध्यान रहे तृणमूल ने पहले ही इस मुद्दे पर राष्ट्रपति शासन लगाने की गुहार लगाई है।

बंगाल कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सुब्रत मुखर्जी ने कहा है कि स्थिति अब अनियंत्रित हो गई है। हम और चुप नहीं रह सकते। हालात नहीं सुधरे तो केंद्र से राष्ट्रपति शासन लगाने की गुहार लगाएंगे। कांग्रेस मालदा व मुर्शिदाबाद में पार्टी कार्यकर्ताओं पर माकपाइयों द्वारा किए जा रहे हमलों को लेकर राज्य सरकार से उखड़ी हुई है।

मुखर्जी ने इस बारे में प्रदेश अध्यक्ष और वित्ता मंत्री प्रणब मुखर्जी व बंगाल के प्रभारी के केशव राव को अवगत करा दिया है। दोनों नेताओं के 10 नवंबर को कोलकाता आने की संभावना है। उनके आने के बाद ही कांग्रेस अपनी भावी रणनीति का खुलासा करेगी। बहरहाल पार्टी ने राज्य सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है। मुखर्जी के अनुसार, अगर हालत में सुधार नहीं हुआ तो राज्य कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करेगा। उस मुलाकात में बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की जाएगी। समझा जा रहा है कि तृणमूल के साथ गठबंधन को और मजबूती प्रदान करने के लिए ही कांग्रेस ने बुद्धदेव सरकार को अल्टीमेटम दिया है। सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड के गठन में माकपा से मदद लेने के कारण कांग्रेस और तृणमूल के संबंधों में कुछ समय के लिए दरार पैदा हो गई थी। अब राज्य सरकार के खिलाफ कड़े तेवर अपना कर कांग्रेस साफ संदेश देना चाहती है कि उसका माकपा से कोई लेना-देना नहीं है। तृणमूल से अपने संबंधों को वह ज्यादा तरजीह देती है।




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