बुद्धदेव करते रहे बैठक, माओवादी बहाते रहे खून

 
Nov 07, 11:27 pm

मेदिनीपुर [जागरण संवाददाता]। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के मेदिनीपुर दौरे के ठीक पहले माओवादियों ने लालगढ़ के बीनपुर में तीन माकपा समर्थकों की हत्याकर हथियार नहीं डालने का संदेश दिया।

नक्सलियों ने माकपा के एक स्थानीय नेता को भी शनिवार शाम सरेआम गोली मारी। घायल नेता गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती है। हालात यह रही कि बुद्धदेव बैठक करते रहे और माओवादी खून बहाते रहे।

तृणमूल कांग्रेस ने काले झंडे दिखाकर स्वागत किया तो पुलिस संत्रास प्रतिरोध जन साधारण समिति ने लालगढ़ के समीपवर्ती क्षेत्रों में काला दिवस मनाया। पहली बार माओवादी प्रभाव वाले वन क्षेत्र के 250 स्कूलों से विरोध जुलूस निकाला गया, जिसमें हजारों की तादाद में लोग शामिल हुए।

शनिवार शाम कड़ी सुरक्षा के बीच मुख्यमंत्री का काफिला मेदिनीपुर सर्किट हाउस पहुंचा। सुरक्षा इस कदर कड़ी थी कि मीडिया कर्मियों को भी सर्किट हाउस से 500 मीटर की दूरी पर रखा गया था। मुख्यमंत्री के काफिले के पहुंचने के पहले सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने एक डमी काफिला यहां पहुंचाया। मेदिनीपुर में आते ही वे सबसे पहले सर्किट हाउस पहुंचे। जहां वह पश्चिम मेदिनीपुर, पुरुलिया व बांकुड़ा जिलों के अधिकारियों के साथ माओवादियों के खिलाफ निर्णायक रणनीति पर मंथन में देर रात तक जुटे रहे।

इससे पहले लालगढ़ क्षेत्र में जगह-जगह पर बड़ी संख्या में लोगों ने जुलूस निकाल कर 'मुख्यमंत्री वापस जाओ' और 'पुलिस अभियान को तत्काल बंद करो' जैसे नारे लगाए। झाड़ग्राम, शालबनी, बीनपुर, कांटा पहाड़ी, जामबनी और अन्य क्षेत्रों में यही नजारा देखने को मिला। बुद्धदेव जब मेदिनीपुर पहुंचे, उसी के इर्द-गिर्द माओवादियों ने झाड़ग्राम के गोपीबल्लभपुर माकपा जोनल कमेटी के सचिव सुभाष सोरेन को गोली मार दी। गंभीर हालत में सोरेन को झाड़ग्राम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इसके पूर्व लालगढ़ के समीपवर्ती बीनपुर थाना क्षेत्र में माओवादियों ने माकपा समर्थक गण प्रतिरोध समिति के तीन सक्रिय सदस्यों को मार डाला। मारे गए लोगों की पहचान मनोरंजन महाली, जयराम हांसदा व लक्खी दास के रूप में की गई है। शनिवार सुबह साढ़े पांच बजे के करीब तीनों की लाश कुशबनी जंगल के पास से जामबनी की ओर जाने वाली सड़क पर लावारिस हालत में मिली थी। शवों पर गोलियों के निशान थे। पास में काफी मात्रा में माओवादी पोस्टर भी बिखरे पड़े थे। पोस्टरों में से एक में लिखा था कि गण प्रतिरोध समिति व पुलिस का जासूस होने के कारण इनकी हत्या की गई है।




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