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भ्रष्टाचार की जांच में लगे अफसरों को छूट

Jan 01, 05:30 am
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नई दिल्ली [नीलू रंजन], भ्रष्टाचार की जांच में लगे अधिकारियों को सूचना के अधिकार [आरटीआई] कानून से राहत मिल गई है। खास तौर पर जांच के सिलसिले में की गई उनकी यात्रा के बारे में आरटीआई के तहत कोई जानकारी नहीं दी जा सकती है। केंद्रीय सतर्कता आयोग [सीवीसी] ने इस संबंध में सभी विभागों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों को सरकुलर जारी कर सचेत कर दिया है।

एक पखवाड़ा पहले सभी सतर्कता अधिकारियों को जारी सरकुलर में सीवीसी ने साफ कर दिया है कि आरटीआई की धारा 8[1][जी] के तहत सतर्कता विभाग के अधिकारियों की यात्रा का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। जाहिर है अब यह बताया जरूरी नहीं होगा कि यात्रा के दौरान सतर्कता अधिकारियों ने किन-किन स्थानों का दौरा किया और इस दौरे का असल मकसद क्या था। इसके साथ ही उनकी यात्रा का बिल भी गोपनीय रखा जाएगा। सीवीसी की माने तो इसे सार्वजनिक करने से भ्रष्टाचार की जांच से जुड़े सतर्कता अधिकारियों की जान को खतरा हो सकता है।

सीवीसी ने अपने सरकुलर में केंद्रीय सूचना आयोग [सीआईसी] के फैसले का हवाला भी दिया है, जिनमें कहा गया है कि सतर्कता अधिकारियों की यात्रा का ब्यौरा सार्वजनिक करना लोकहित से जुड़ा मामला नहीं है, जाहिर है भ्रष्टाचार में फंसा अधिकारी इस सूचना का गलत इस्तेमाल कर सकता है और जांच में गए सतर्कता अधिकारी को शारीरिक नुकसान तक पहुंचा सकता है। गौरतलब है कि सतर्कता अधिकारियों की यात्रा का ब्योरा जानने के लिए आरटीआई कानून के तहत बड़ी संख्या में आवेदन किए जा रहे थे।

सीवीसी ने प्रमुख सतर्कता अधिकारियों को सीआईसी के इस फैसले को अपने-अपने विभागों के नोटिस बोर्ड पर प्रमुखता से लगाने को कहा है। ताकि आरटीआई कानून के तहत जानकारी मांगने वाले पहले से सतर्क हो जाएं और सतर्कता अधिकारी बेखौफ होकर भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जांच जारी रख सकें।

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