नई दिल्ली [राजकेश्वर सिंह]। उच्च शिक्षा में सुधारों के मोर्चे पर बीते वर्षो में सरकार भले ही नाकाम रही हो, लेकिन चुनौतियों से निपटने के लिए कोशिशें जारी हैं। अब योजना हर जिले में एक ऐसा डिग्री कॉलेज खोलने की है, जिसका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। इसके अलावा मॉडल डिग्री कॉलेजों को खोलने में राज्यों की ओर से धन की कमी को दूर करने के मद्देनजर उसका पूरा खर्च भी केंद्र ही उठा सकता है। इतना ही नहीं, खराब सकल दाखिला दर [जीईआर] वाले राज्यों को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें अलग से विशेष मदद देने की भी योजना पर भी काम हो रहा है।
सूत्रों के मुताबिक , बीते वर्षो में हर राज्य में केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने के बाद आने वाले पांच वर्षो में हर जिले में एक डिग्री कॉलेज खोलने की योजना पर काम हो रहा है। बेहतरीन कमरे, योग्य शिक्षक, अच्छा पुस्तकालय, प्रयोगशाला और खेल के मैदान और दूसरे सभी संसाधनों से लैस इन कॉलेजों का पूरा खर्च केंद्र उठाएगा। इनका प्रस्ताव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग [यूजीसी] मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेज चुका है। आयोग के अध्यक्ष प्रो. वेदप्रकाश का कहना है, 'प्रतिभाएं तो जिलों से ही आती हैं। ऐसे में उन्हें उनके यहां ही हर तरीके से उच्च गुणवत्ता का डिग्री कॉलेज मिल जाए तो आगे की राह आसान हो सकती है। जबकि, प्रयोगशाला, पुस्तकालय व खेल के मैदान जैसे संसाधनों का उपयोग दूसरे स्थानीय कॉलेज भी कर सकेंगे'।
दरअसल पिछले पांच सालों में उच्च शिक्षा के मामले में राज्यों के साथ यूजीसी व केंद्र का तजुर्बा अच्छा नहीं रहा है। शैक्षिक रूप से पिछड़े [राष्ट्रीय औसत से भी कम दाखिला दर वाले जिले] जिलों में इस साल मार्च तक 374 मॉडल डिग्री कॉलेज खुलने थे। केंद्र के पास राज्यों ने सिर्फ 142 प्रस्ताव भेजे। उनमें भी सिर्फ 78 प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकी। योजना के तहत लागत का एक तिहाई खर्च केंद्र को व दो तिहाई राज्यों को उठाना था। खर्च में अपने हिस्से को लेकर ज्यादातर राज्यों ने हाथ खड़े कर दिए। सूत्रों के मुताबिक, अब इसका पूरा खर्च केंद्रीय स्तर पर उठाने पर विचार हो रहा है।
सरकार ने अगले पांच वर्षो में उच्च शिक्षा में सकल दाखिला दर को बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है, जो अभी लगभग 17 प्रतिशत है। विकसित देशों में यह दर 58 प्रतिशत तक है, जबकि विकासशील देशों में यह औसत 18 प्रतिशत तक है। सूत्रों के मुताबिक, जीईआर के 30 प्रतिशत लक्ष्य को पूरा करने के लिए शैक्षिक रूप से पिछड़े जिलों को आने वाले वर्षों में संसाधनों के लिए अलग से प्रोत्साहन देने की भी सरकार योजना बना रही है।
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