लखनऊ [जागरण ब्यूरो]। 'सभी चुनें, सही चुने' का वक्त आ गया। उत्ताराखंड और पंजाब के वोटरों ने मिसाल कायम की है। पिछले सारे रिकार्ड तोड़ते हुए, वहां सर्वाधिक मतदान हुआ है। अब बारी हम यूपी वालों की है। 16वीं विधानसभा के लिए पहले चरण में दस जिलों की 55 सीटों पर बुधवार को वोट पड़ेंगे। प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों सहित कुल 862 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला लगभग 1.70 करोड़ मतदाता करेंगे। माहौल में जहां महंगाई, भ्रष्टाचार, विकास आदि मुद्दे हैं तो जाति-धर्म की बातें भी। जनता के बीच हर दल और उसके दिग्गज नेता अपनी-अपनी बातें रख चुके हैं। प्रत्याशी भी अपने वादे और इरादे जाहिर कर चुके हैं। अब फैसला मतदाताओं को करना है कि वह अपना कैसा जनप्रतिनिधि चाहते हैं।
बुधवार को दस जिलों- सीतापुर, बाराबंकी, फैजाबाद, अम्बेडकरनगर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर और बस्ती में होने वाले मतदान पर सभी राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हैं। यहां के मतदान से राजनीतिक दलों को अपनी स्थितियों के साथ ही माहौल का भी कुछ-कुछ आभास हो जायेगा।
चार मंत्रियों की किस्मत का फैसला बसपा सरकार के चार मंत्रियों के भाग्य का फैसला भी इस चरण में होगा। इनमें कटेहरी से संसदीय कार्य एवं वित्ता मंत्री लालजी वर्मा, कप्तानगंज से खाद्य एवं रसद मंत्री रामप्रसाद चौधरी, हरगांव से उपभोक्ता संरक्षण एवं बांट माप मंत्री रामहेत भारती और बाराबंकी से वस्त्रोद्योग रेशम राज्यमंत्री संग्राम सिंह वर्मा चुनाव मैदान में हैं।
इनकी भी प्रतिष्ठा
केन्द्र सरकार के मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा और दो कांग्रेसी सांसदों जगदम्बिका पाल और कमल किशोर की पारिवारिक प्रतिष्ठा भी दांव पर है। बेनी वर्मा के पुत्र राकेश वर्मा दरियाबाद से, जगदम्बिका पाल के पुत्र अभिषेक पाल बस्ती सदर से और कमल किशोर की पत्नी पूनम किशोर बल्हा से चुनाव मैदान में हैं। बसपा सरकार में मंत्री रहे दद्दन मिश्र इस बार पाला बदल कर भाजपा उम्मीदवार के रूप में भिनगा से मैदान में हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डा. अम्मार रिजवी- सेवता से तो रालोद के राष्ट्रीय महासचिव मुन्ना सिंह चौहान-बीकापुर से किस्मत आजमा रहे हैं। परिवहन मंत्री रामअचल राजभर की जगह उनके पुत्र संजय राजभर इस बार अकबरपुर सीट से मैदान में हैं। सपा से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय-इटवा, पूर्व मंत्री और विधानसभा में पार्टी के उपनेता डा.वकार अहमद शाह- बहराइच सदर, पूर्व मंत्री अरविन्द सिंह गोप-रामनगर, अवधेश प्रसाद-मिल्कीपुर, राजकिशोर सिंह-हरैया, पूर्व सांसद मित्रसेन यादव-बीकापुर हैं।
दांव पर दलों की प्रतिष्ठा
पहले चरण की इन सीटों में पिछली बार बसपा ने 30, सपा ने 18, भाजपा ने चार और कांग्रेस ने तीन पर अपना परचम लहराया था। ऐसे में इस बार बसपा और सपा की प्रतिष्ठा सबसे ज्यादा दांव पर है। दिलचस्प बात तो यह है कि इन दस जिलों में कांग्रेस के विधायकों की तुलना में उसके सांसदों की संख्या दुगनी है। विधायक तीन हैं तो सांसद छह। ऐसे में कांग्रेस पर लोकसभा वाला प्रदर्शन दोहराने का दबाव है। राम मंदिर मुद्दे के कारण भाजपा की प्रतिष्ठा भी दांव पर है क्योंकि अयोध्या सीट इसी पहले चरण का हिस्सा है।
परिसीमन में यहां की पुरानी 18 सीटों का अस्तित्व समाप्त हुआ है जबकि उतनी ही नयी सृजित हुई हैं। जातीय समीकरणों में बदलाव से राजनीतिक दलों को इन सीटों पर चुनावी गणित समझना आसान नहीं रहा है।
दिलचस्प लड़ाई
उतरौला सीट पर चुनावी लड़ाई खासी दिलचस्प है। यहां से तीन विधायक ताल ठोंक रहे हैं। इनमें बसपा से धीरेन्द्र प्रताप सिंह, सपा से आरिफ अनवर हाशमी और भाजपा से श्याम लाल वर्मा हैं। इसमें 16वीं विधानसभा में कोई एक ही खुशकिस्मत पहुंच सकेगा। इसी तरह महसी और बांसी सीट भी ऐसी हैं जहां दो-दो विधायक आमने-सामने हैं। महसी में जहां बसपा से विधायक कृष्ण कुमार ओझा और भाजपा से सुरेश्वर सिंह एक-दूसरे का रास्ता रोकने की कोशिश में हैं वहीं बांसी में सपा से विधायक लाल जी यादव और कांग्रेस से विधायक ईश्वर चन्द्र शुक्ल के बीच जोर आजमाइश है।
ये मुद्दे रहते हैं प्रभावी
पहले चरण के चुनाव क्षेत्रों में जातीयता के अलावा स्थानीय मुद्दे भी प्रभाव रखते हैं। बाढ़ इस अंचल की अहम् समस्या रहती है। शारदा, सरयू, घाघरा आदि नदियां यहां तबाही मचाती रहती हैं। नेपाल की नदियों से छोड़े जाने वाले पानी के बाढ़ में परिवर्तित होने की वर्षो पुरानी समस्या का आज तक निदान नहीं हो सकता है। ऐसे में बाढ़ को लेकर केन्द्र और प्रदेश सरकारों पर तोहमत जड़ना विरोधी दलों के प्रचार का हिस्सा रहा है। अयोध्या के कारण रामजन्म भूमि का मुद्दा भी आसपास की सीटों को प्रभावित करने का काम करता है। वैसे इलाके में उद्योग-धंधों की कमी, क्षेत्र का पिछड़ापन, बेरोजगारी आदि को मुद्दा बना कर राजनीतिक दल एक दूसरे को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर चुके हैं।
हम हैं तैयार: उमेश सिन्हा
लखनऊ [जाब्यू]। पहले चरण के चुनाव के लिए पोलिंग पार्टियां मंगलवार रात मतदान केंद्रों पर पहुंच गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने इससे पहले पत्रकारों से वार्ता में दावा किया कि आयोग की तैयारी पूरी है। मतदान बुधवार प्रात: सात बजे से शुरू होकर सायं पांच बजे तक चलेगा। पांच बजे तक जो भी लोग लाइन में होंगे उन्हें मतदान करने दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पहले चरण के 862 प्रत्याशियों में 796 पुरुष, 65 महिलाएं और एक किन्नर है। दस निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों का संख्या 16 से अधिक है, इसलिए वहां दो बैलेटिंग यूनिट का प्रयोग किया जाएगा। इस चरण में सबसे अधिक मतदाता कपिलवस्तु में 383744 एवं सबसे कम महसी निर्वाचन क्षेत्र 261514 हैं। संवेदनशील पोलिंग स्टेशनों की संख्या 2123 और अति संवेदनशील मतदेय स्थलों की संख्या 3423 है। पहले चरण में कुल 18083 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि पहले चरण के चुनाव में 83 हजार से अधिक कर्मचारी ड्यूटी पर रहेंगे। 1364 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 187 जोनल मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई है। 270 चयनित केंद्रों से मतदान की वेबकास्टिंग की जाएगी। इसे मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय समेत निर्वाचन आयोग एवं जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में भी देखा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि सभी मतदाताओं को मतदाता पर्चियों का वितरण किया जा चुका है।
न मिली हो मतदाता पर्ची तो..
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार यदि किसी मतदाता को मतदान पर्ची न मिल पाई हो तो वह 9212357123 मोबाइल नंबर पर अपने फोटो पहचान पत्र का नंबर मैसेज कर अपने मतदान केंद्र की जानकारी ले सकता है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट से भी यह जानकारी हासिल की जा सकती है।
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