आखिरकार झुके खुर्शीद, आयोग से मांगी माफी

नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से चुनाव प्रचार के दौरान मुसलमानों के आरक्षण पर बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे केंद्रीय विधि मंत्री सलमान खुर्शीद आखिरकार चुनाव आयोग के सामने घुटने टेकते नजर आए। अंतत: उन्होंने आयोग से माफी मांग ली है।

अपनी पत्‍‌नी के चुनाव प्रचार के दौरान विधि मंत्री सलमान खुर्शीद का मुस्लिमों का आरक्षण संबंधी बयान काफी सुर्खियों में रहा। खुर्शीद के इस बयान पर राजनीतिज्ञ दलों द्वारा चुनाव आयोग के पास मंत्री खुर्शीद की शिकायत भी की गई थी। गौरतलब है कि खुर्शीद के इस बयान पर चुनाव आयोग के साथ काफी टकराव भी हुआ था।

निर्वाचन आयोग के साथ टकराव को समाप्त करने का प्रयास करते हुए विधि मंत्री सलमान खुर्शीद ने मंगलवार को घटना पर अफसोस जाहिर किया। उन्होंने यह भी कहा कि कानून का उल्लंघन करना और चुनाव आचार संहिता की अनदेखी करना उनकी कतई मंशा नहीं थी।

सोमवार देर रात को निर्वाचन आयोग को भेजे एक पत्र में खुर्शीद ने कहा कि मैं निर्वाचन आयोग के आगे सिर झुकाते हैं। उन्होने साथ ही भविष्य में इस प्रकार की स्थिति की पुनरावृत्ति नहीं हो, यह सुनिश्चित करने में अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर की।

खुर्शीद का पत्र ऐसे समय में आया है जब काग्रेस निर्वाचन आयोग के खिलाफ उनकी टिप्पणियों को खारिज कर चुकी है। काग्रेस ने कहा था कि जिम्मेदार पदों पर आसीन लोगों को जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए। अपने संक्षिप्त पत्र में विधि मंत्री ने कहा कि मैं इस मामले को दुर्भाग्यपूर्ण मानता हूं और बयान पर अफसोस जाहिर करता हूं। कानून का उल्लंघन करना और चुनाव आचार संहिता को कमतर करना, कभी मेरी मंशा नहीं थी। मैं आयोग तथा उसके द्वारा लिए गए और लिए जा रहे फैसलों का बेहद सम्मान करता हूं।

निर्वाचन आयोग ने शनिवार को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को पत्र लिखकर खुर्शीद द्वारा कथित रूप से निर्वाचन आयोग के खिलाफ की जा रही बयानबाजी के मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की थी। खुर्शीद ने अपनी टिप्पणी में मुस्लिमों को आरक्षण मुहैया कराने संबंधी टिप्पणी की थी, जिसे निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना था।

निर्वाचन आयोग के आपत्ति जताने के बावजूद विधि मंत्री ने फर्रूखाबाद में एक चुनावी रैली में कहा था कि वह मुस्लिमों के लिए आरक्षण के मुद्दे पर अपना संघर्ष जारी रखेंगे, फिर भले ही वह [निर्वाचन आयोग] उन्हें फासी पर क्यों न लटका दे।

राष्ट्रपति ने यह पत्र प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यालय को भेज दिया था। विधि मंत्री ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। आयोग को लिखे अपने पत्र में खुर्शीद ने कहा कि वह उनके बयानों से पैदा हुए घटनाक्रम को लेकर व्यथित हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि इससे मुझे भी बराबर का दुख हुआ है।

विधि मंत्री ने कहा कि वह एक संवैधानिक ईकाई होने के नाते निर्वाचन आयोग के प्राधिकार के प्रति प्रतिबद्ध हैं और आयोग के सामने सिर झुकाते हैं। साथ ही उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर की कि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होगी।

सूत्रों के हवाले से पता चला है कि सलमान खुर्शीद के अफसोस जाहिर करने के बाद निर्वाचन आयोग का विधि मंत्री के साथ पैदा टकराव को समाप्त होने की संभावना है।

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