खूब चला वोटरों का एक्स-फैक्टर

लखनऊ [दिलीप अवस्थी]। उत्तर प्रदेश के वोटरों का 'एक्स-फैक्टर' खुलकर सामने आ गया। एक तरफ राजनीतिक दलों और उनके नेताओं की आशंका सच साबित हुई तो दूसरी ओर जोर-शोर से चल रही वोट डालने की मुहिम ने सफलता का सोपान किया। मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक भारी बारिश, ग्रामीण-कस्बाई क्षेत्रों में जलभराव, सर्द हवाओं तथा विद्युत व्यवधान के बावजूद प्रदेश के दस जिलों में 55 विधानसभा सीटों के लिए करीब 62 प्रतिशत मतदान होना, हर दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

पहली बात तो यह मानी जा रही है कि भारी मतदान कभी भी सत्तारूढ़ दल को नहीं भाता। माना जाता है कि वोटर सत्ता के प्रति विरोध जताने के लिए हमेशा उत्साह दिखाता है।

इस बार के चुनाव में सबसे बड़ी पहेली है प्रदेश का करीब 46 प्रतिशत युवा वोटर [उम्र 18 से 39 वर्ष के बीच]। इनमें भी लगभग 55 लाख वोटर 18 वर्ष के हैं। एक करोड़ से ऊपर ऐसे वोटर हैं, जो पहली बार अपना वोट डालेंगे।

अहम मुद्दा यह है कि युवा वर्ग का यह वोटर क्या करेगा। यही विधानसभा चुनाव का महत्वपूर्ण एक्स-फैक्टर साबित होने वाला है।

अभी तो यह प्रथम चरण का मतदान है, इसलिए बहुत बढ़कर चढ़कर इस वर्ग को पढ़ने की जल्दबाजी करना उचित नही लेकिन एक बात तो पक्की है कि इस वर्ग का मुख्यधारा की राजनीति से बहुत कम ही लेना देना है।

यह वर्ग अपने आपको जितने भी पारंपरिक राजनीतिक मुद्दे हैं, चाहे वह अयोध्या विवाद हो, धर्म या जातिवाद हो, से कम ही जुड़ा महसूस करता है। इस वर्ग के लिए कैरियर, भविष्य, नौकरी, रोजगार आदि शायद ज्यादा महत्वूपर्ण है। शायद यही वजह है कि इस वर्ग का कोई विशेष राजनीतिक झुकाव होना भी गले से नीचे नहीं उतरता।

युवा वर्ग चाहे शहरी इलाके का का हो या ग्रामीण क्षेत्रों का वह अपने भविष्य को लेकर कहीं ज्यादा उत्सुक एवं अधीर दिखता है।

यही वजह है कि वह राजनीति में झाड़ू लगाकर कुछ सफाई का काम कर सकता है। भ्रष्टाचार या राजनीति के अपराधीकरण को चुपचाप स्वीकार करने के बजाय, इस वर्ग में प्रदेश की खुशहाली, सरकार के स्थायित्व, रोजगार के नये अवसर जैसे मुद्दों को तरजीह देकर बदलाव लाने की क्षमता और ताकत भी साफ दिखती है।

इसलिए शायद हर बड़ी राजनीतिक पार्टी ने चाहे रोजगार हो या मुफ्त लैपटाप जैसे प्रलोभन खुलकर सामने रखे हैं।

इस नये वर्ग के वोटर की वजह से अगर राहुल गांधी कांग्रेस को उत्साहित कर रहे हैं तो अखिलेश यादव सपा के तुरुप के पत्ते बने हुए हैं। बसपा और भाजपा में इस वर्ग के सशक्त नेताओं की कमी भी साफ खटक रही है।

बुधवार को जिन दस जिलों में मतदान हुआ, वहां अभी तक चुनावों में औसत 50 से 52 प्रतिशत मतदान होता रहा है। विपरीत परिस्थितियों में भी 10 से 12 प्रतिशत वोट बढ़ना जहां एक ओर निश्चित ही प्रदेश और देश के प्रजातंत्र के लिए शुभ संकेत है, वहीं यह राजनीतिक दलों को थोड़ा विचलित भी कर सकता है। अगर मतदान की इस बढ़ोत्तरी के पीछे युवा वर्ग खड़ा है तब तो नेताओं के लिए प्रदेश के राजनीतिक भविष्य की पहेली और गहराने वाली है।

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