गोरखपुर [रामनारायण श्रीवास्तव]। उत्तर प्रदेश के धुंआधार प्रचार अभियान में पहले दौर के वोट पड़ने के साथ ही सियासी हलचल भी तेज हो गई है। सात चरणों के लंबे चुनाव कार्यक्रम में सभी दल पहले दो दौर को 'लिटमस टेस्ट' की तरह मानकर चल रहे है। इन चरणों की 114 सीटें पर मतदान से लेकर लोगों के रुझान को लेकर जो भी तस्वीर उभरेगी, उसी पर आगे के पांच चरणों की रणनीति बुनी जाएगी।
बसपा के इस मजबूत इलाके में सपा कड़ी चुनौती देती दिख रही है तो भाजपा व कांग्रेस ने भी अपने पुराने दिन लौटाने के लिए आसमान से लेकर जमीन तक हुंकार भरी है। क्षेत्र में परिसीमन ने विधानसभा सीटों का स्वरूप बदला है तो नेताओं ने दल भी खूब बदले हैं। बागी व दल-बदलू यहां के समीकरणों को काफी प्रभावित कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के विकास का सूरज भले ही पूर्वाचल से नहीं उगता हो, लेकिन सूबे की सियासत तय करने में इस क्षेत्र की खासी भूमिका रही है।
जातीय व मजहबी समीकरणों के साथ यहां पर बाहुबल न बल भी असर डालते हैं। इस क्षेत्र के कुछ हिस्से में पहले चरण का मतदान हो चुका है। बाकी सीटें अगले दो दौर के मतदान में शामिल है।
पहले दो दौर के मतदान वाली 114 सीटों में पिछली बार बसपा ने सभी को पछाड़ते हुए 60 सीटें अपनी झोली में डाली थी। यहां की बढ़ते ने उसे सूबे में बहुमत भी दिलाया था। यही वजह है कि सभी दल पहले दो दौर को बाकी दौर के लिए लिटमस टेस्ट की तरह मानकर चल रहे हैं।
भाजपा व कांग्रेस के नेताओं अनौपचारिक चर्चाओं में स्वीकार किया है वैसे तो हर दौर के लिए अलग-अलग रणनीति है, लेकिन पहले दो दौर में मतदाताओं का रुझान देखने के बाद आगे की समीक्षा की जाएगी।
कांग्रेस ने बीते लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर उम्मीदें काफी उम्मीदें जगाई थी, लेकिन लोकसभा के उसके दिग्गज इस बार मुश्किल में हैं। जगदंबिका पाल व बेनी प्रसाद वर्मा अपने बेटों के लिए जूझना पड़ रहा हैं, तो आरपीएन सिंह अपने ही घर में ही उलझे हुए हैं। कुशीनगर से सांसद आरपीएन सिंह पडरौना में प्रतिष्ठा की लड़ाई में फंसे हैं। इस विधानसभा में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने लोकसभा चुनाव में भी ंिसंह पर बढ़त ली थी। मौर्य विधानसभा उपचुनाव भी जीते थे।
भाजपा के लिए इस क्षेत्र में खोने को कम पाने को ज्यादा है। योगी आदित्यनाथ भले ही पार्टी से नाराज हो, लेकिन क्षेत्र में अपनी धमक बरकरार रखने के लिए वह पूरी ताकत लगाए हुए हैं। प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही भी पथरदेवा में अब कुछ राहत महसूस कर रहे हैं। देवरिया लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली इस नई सीट पर बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा को बढ़त भी मिली थी। सपा बिना किसी दिग्गज के भी बदलाव का माहौल बनाकर बढ़त के लिए जोर मार रही है। चुनाव प्रचार अभियान में भाजपा ने यहां पर सबसे ज्यादा ताकत झोंकी है। उसके सभी प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं ने लगभग हर सीट पर पहुंच बनाकर अपनी दस्तक दी है। कांग्रेस ने राहुल को इस क्षेत्र में जमकर घुमाया है, लेकिन भाजपा व कांग्रेस दोनों दलों को अपनी आपसी खींचतान से जूझना पड़ा है। ऐसे में कुछ सीटों पर स्थानीय दल व निर्दलीय उम्मीदवार भी मजबूत दिख रहे हैं।
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