नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। निचली अदालत के फैसले से गृह मंत्री पी चिदंबरम ने तो चैन की सांस ली है, लेकिन कांग्रेस को तो जैसे प्राणवायु मिल गई है। अदालत का फैसला आने तक चिदंबरम दिल्ली में ही जमे रहे और इसके तुरंत बाद मदुरै रवाना हो गए। सुप्रीम कोर्ट से लगातार दो दिन से मिल रहे झटके के बाद चिदंबरम को 2जी स्पेक्ट्रम मामले में सह अभियुक्त न बनाए जाने के अदालती फैसले से कांग्रेस को पलटवार का मौका भी मिल गया है। इसे न गंवाते हुए सरकार के शीर्ष मंत्रियों से लेकर पार्टी ने भाजपा से चिदंबरम के खिलाफ झूठा अभियान चलाने के लिए माफी मांगने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुरुवार को 122 टेलीकॉम लाइसेंस रद करने और 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन की पूरी प्रक्रिया को गलत ठहराने के बाद कांग्रेस उत्तार प्रदेश में सियासी असर को लेकर खासी हलकान थी। पार्टी की सबसे बड़ी चिंता थी कि अगर चिदंबरम की भूमिका पर भी सवाल उठ गए तो उसके लिए चेहरा बचाना मुश्किल होगा। निचली अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस को यह कहने का मौका मिल गया है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में उसका कोई नेता या मंत्री शामिल नहीं है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने इस घोटाले की पूरी जिम्मेदारी द्रमुक कोटे से दूरसंचार मंत्री रहे ए राजा पर डाल दी थी।
अब चिदंबरम को सह अभियुक्त बनाने की सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका निचली अदालत से खारिज होने के बाद कांग्रेस और सरकार एक सुर में बोल रही है, 'सच की जीत हुई।' उत्तार प्रदेश में भी पार्टी अब यही दिखाएगी कि इस घोटाले से कांग्रेस के मंत्रियों का कोई लेना-देना नहीं है। राजा ने गड़बड़ी की तो वह जेल में हैं। कांग्रेस अदालत के फैसले को आधार बनाते हुए कहेगी कि पहले आओ, पहले पाओ की राजग की नीति को अदालत ने गलत ठहराया है।
इसी कड़ी में सरकार के वरिष्ठतम मंत्री प्रणब मुखर्जी, दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल, सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी समेत सभी ने अदालत के फैसले पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। साथ ही कहा कि सच सामने आ गया। स्वामी की हाई कोर्ट जाने की चेतावनी पर अंबिका सोनी ने दावा किया कि कोई कहीं भी जाए अब फैसला यही होगा। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने भी कहा, 'चिदंबरम के खिलाफ झूठा अभियान चलाने वाली भाजपा को माफी मांगनी चाहिए।' सभी वरिष्ठ मंत्रियों ने भी पार्टी की इसी लाइन को आगे बढ़ाया।
मुद्दा उठाती रहेगी भाजपा
नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। भाजपा का कहना है कि भले ही निचली अदालत ने गृह मंत्री पी. चिदंबरम को 2जी मामले में सह अभियुक्त बनाने से इंकार कर दिया हो, लेकिन इतने से वे कानून की नजर में पूरी तरह बरी नहीं हो जाते। अभी मामला ऊपरी अदालतों में चलेगा। सुप्रीम कोर्ट पहले ही मान चुकी है कि 2 जी लाइसेंस के मामले में भारी गड़बड़ी हुई है। अब यह अदालत ही तय करेगी कि इसमें तब के दूरसंचार मंत्री ए. राजा के अलावा सरकार के और कौन-कौन लोग शामिल थे।
राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने शनिवार को निचली अदालत के फैसले के बाद कहा कि स्पेक्ट्रम का आवंटन जिस तरह हुआ है, उसमें भ्रष्टाचार निरोधक कानून का उल्लंघन तो हुआ है। अब यह पता चलना बाकी है कि इस मामले में सिर्फ ए. राजा दोषी हैं या फिर और लोग भी। खुद प्रधानमंत्री यह कह चुके हैं कि स्पेक्ट्रम की कीमत के मामले में वित्ता मंत्री और गृह मंत्री दोनों सहमति दे चुके थे।
भाजपा प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने भी कहा कि चिदंबरम की राजनीतिक जवाबदेही का मामला अभी भी जिंदा है। भाजपा यह मुद्दा संसद के अंदर और बाहर उठाती रहेगी। इस फैसले से न तो सरकार की छवि सुधर जाएगी और न ही भाजपा का भ्रष्ट सरकार के खिलाफ अभियान कमजोर होगा। सुप्रीम कोर्ट मान चुका है कि 2जी स्पेक्ट्रम के बंटवारे में जमकर धांधली हुई है। अदालत ने सभी 122 लाइसेंस इसलिए रद कर दिए क्योंकि उसने माना है कि इनका आवंटन पूरी तरह भ्रष्टाचार के आधार पर हुआ था। साथ ही उन्होंने कहा कि यह फैसला निचली अदालत का है। ऐसे बहुत से मामलों में ऊपरी अदालतों ने फैसले पलटे हैं।
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