
जयपुर [राजकिशोर]। गुलाबी नगरी के बाद अब कहां? राज्य सरकार का तंत्र जहां जयपुर में सिलसिलेवार विस्फोटों का सुराग खोजने में जुटा है, वहीं उसकी मदद कर रहे केंद्र के आला अफसर दूसरी चिंता में है।
विदेशी व हिंदुस्तानी पर्यटकों से भरे रहने वाले देश के दूसरे पर्यटन स्थलों की सुरक्षा को लेकर गृह मंत्रालय आशंकित है। जयपुर हादसा व पिछला आतंकी घटनाक्रम तो है ही, साथ में खुफिया तंत्र ने भी आगाह किया है कि संवेदनशील न समझे जाने वाले पर्यटन स्थल आतंकियों का अगला निशाना हो सकते है।
सूत्रों के मुताबिक, आला अफसरों और खुफिया रिपोर्ट के बाद गृह मंत्रालय ने अपना तंत्र खतरे वाले ऐसे स्थानों को चिह्नित करने में लगा दिया है। दरअसल, जयपुर में घटना की जांच के लिए आए मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य राज्यों से आए विशेषज्ञ भी यहां जैसी घटना आगे दोहराने की आशंका जता रहे है। चूंकि, आतंकवादी भारत के ढांचे के एक-एक प्रतीक पर हमला कर रहे है। अर्थव्यवस्था, धार्मिक आस्था और सुरक्षा से जुड़े प्रतीकों के बाद अब पर्यटन के सबसे बड़े केंद्र जयपुर को निशाना बनाया गया।
जयपुर कांड को अंजाम देने में मुंबई, हैदराबाद और अजमेर शरीफ में आतंकी कार्रवाई को अंजाम देने वाले तत्वों की ही भूमिका नजर आ रही है। अभी तक का इतिहास रहा है कि आतंकवादियों ने एक प्रतीक के बाद दो या तीन और प्रतीकों पर हमला जरूर किया। पर्यटन एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें भारत विश्व पटल पर बहुत तेजी से उभरा है। विदेशियों केसाथ-साथ भारतीय भी अब काफी तादाद में घूमने-फिरने लगे है। ऐसे ठिकाने न सिर्फ आतंकियों के लिए आसान है, बल्कि सैलानियों के बीच हुई किसी भी दुर्घटना का संदेश देश-दुनिया में ज्यादा तेजी से फैलता है।
केंद्र के एक आला अधिकारी ने बताया कि अमरनाथ जाने वाले तीर्थयात्री तो आतंकी निशाने पर होंगे ही, लेकिन देश के कई राज्यों के ठिकाने भी अछूते नहीं है। सूत्रों ने यह भी बताया कि खुफिया सूचना के आधार पर राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटक व केरल की राज्य सरकारों को इस बारे में सचेत किया जा रहा है। खासतौर से भीड़भाड़ वाली जगहों के साथ पुष्कर, खजुराहो, ओरछा, आगरा, ग्वालियर, जैसे विदेशी पर्यटकों से भरे रहने वाले स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाने का प्रस्ताव है। फिलहाल स्कूलों में गरमी की छुट्टियां भी चल रही है और लोग घूमने-फिरने निकले है, ऐसे में सुरक्षा पर और ज्यादा ध्यान देने के लिए राज्य सरकारों से कहा जा रहा है।