
नई दिल्ली। उड़ीसा में ईसाइयों पर हमले के विरोध में समुदाय से संबद्ध देश के हजारों शिक्षण संस्थान शुक्रवार को बंद रहे। छात्रों, शिक्षकों और कार्यकर्ताओं ने देश के विभिन्न भागों में जुलूस निकालकर राज्य में हिंसा शीघ्र समाप्त किए जाने की मांग की।
राज्य में जारी हिंसा के विरोध में कैथोलिक बिशप्स कांफ्रेंस आफ इंडिया [सीबीसीआई] की ओर से एक दिन के बंद के आह्वान का प्रोटेस्टेंट ग्रुप चर्च आफ साउथ इंडिया समेत बड़ी संख्या में ईसाई संगठनों ने समर्थन किया। विहिप नेता की हत्या के बाद हिंसक घटनाओं में 12 लोग मारे जा चुके हैं।
ईसाई समुदाय के विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में सेंट स्टीफंस और जीसस एंड मैरी जैसे प्रख्यात कालेज तथा कोलंबस, माउंट कार्मेल और डान बास्को जैसे स्कूल बंद रहे। सीबीसीआई के प्रवक्ता बाबू जोसेफ ने बताया कि उड़ीसा में निर्दोष लोगों को निशाना बनाए जाने के विरोध में देश भर के करीब 4500 स्कूल आज बंद रहे। बंद का मकसद निर्दोष लोगों के प्रति एकजुटता दिखाना है।
उन्होंने कहा कि राज्यों की राजधानियों में रैली निकाली गई और राज्यपालों को ज्ञापन सौंपे गए। मुंबई में फिल्म निर्देशक महेश भट्ट, सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी, अखिल भारतीय ईसाई परिषद के महासचिव अब्राहम मथाई समेत समाज के विभिन्न तबकों के प्रबुद्ध नागरिकों तथा सामुदायिक संगठनों ने आजाद मैदान में आयोजित रैली में भाग लिया।
मध्यप्रदेश और छत्ताीसगढ में ईसाई मिशनरियों की ओर से चलाई जाने वाली सभी शिक्षण एवं अन्य संस्थायें बंद रहीं। मध्यप्रदेश कैथौलिक चर्च के प्रवक्ता और ईसाई महासंघ के संयोजक फादर आनंद मुटुंगल ने आज यहां बताया कि उड़ीसा की घटना के विरोध में जहां मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में सभी शिक्षण और अन्य संस्थायें बंद रहीं, वहीं मिशनरी द्वारा चलाई जा रही स्वास्थ्य सेवाओें को इससे मुक्त रखा गया। उत्तार प्रदेश के कानपुर में भी यूनाइटेड कानपुर क्रिश्चियन एसोसिएशन के आह्वान पर सभी कैथोलिक स्कूल आज बंद रहे। इन हमलों के प्रति अपना विरोध जाहिर करने के लिए ईसाई समुदाय रविवार को शहर में एक शांति मार्च निकालेगा।
उधर, मिजारेम की राजधानी एजोल में भारी बारिश के बावजूद ईसाई समुदाय के स्कूलों के हजारों की तादाद में छात्रों और शिक्षकों ने जुलूस में भाग लिया। सिक्किम में भी उड़ीसा के कंधमाल की घटना के विरोध में सेंट थामस, डान बास्को, सेंट जोसेफ और अन्य मिशनरी स्कूल बंद रहे।
केरल में कैथोलिक चर्च, आर्थोडाक्स चर्च और प्रोटेस्टेंट ग्रुप चर्च आफ साउथ इंडिया द्वारा चलाए जा रहे स्कूल और कालेज बंद रहे। कई अन्य ईसाई संगठनों ने प्रार्थना सभा का आयोजन किया और इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित किया।
तमिलनाडु में भी ईसाई समुदाय की ओर चलाए जाने वाले शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। गिरिजाघरों और ईसाई बहुल गांवों पर हमले की निंदा करते हुए अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता ने कहा कि खास समुदाय को निशाना बनाया जाना देश के लिए बदनामी की बात है। उन्होंने बयान जारी कर केंद्र और उड़ीसा सरकार से सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया।
कोलकाता में बांगिया क्रिस्टिया परिसेबा के बैनर तले समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।
त्रिपुरा और मिजोरम के भी ईसाई मिशनरी स्कूल विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। 13 बड़े गिरिजाघरों का संगठन मिजोरम कोहरान टूट कमेटी ने अपने सभी सदस्यों से रविवार को भूख हड़ताल रखने का आह्वान किया है।
उत्तर भारत में पंजाब और हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश में भी मिशनरी स्कूल बंद रहे। उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।
इधर, दिल्ली में उड़ीसा भवन के बाहर कई लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने और अल्पसंख्यक समुदाय के जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। कैथोलिक सेक्यूलर फोरम के महासचिव जोसेफ डायस ने कहा कि ईसाइयों पर हमला फासीवाद से कम नहीं है। डायस हिंसा मामले को देख रहे स्वतंत्र समिति के सदस्य हैं।
गौरतलब है कि ईसाई नेताओं के एक समूह ने बृहस्पतिवार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भेंट की थी। प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि उड़ीसा में सामान्य स्थिति बहाल किए जाने को लेकर हर संभव प्रयास किए जाएंगे।