नई दिल्ली, [जरनैल सिंह]। कल्पना कीजिए भविष्य में किसी ऐसे दिन की, जब तालिबान, बलूचिस्तान व अन्य समस्याओं से घिरे पड़ोसी देश में कट्टरपंथी सत्ता पर काबिज हो जाते हैं। अपनी समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए वह देश भारत पर परमाणु, रासायनिक व जैविक हमला बोल देता है। स्थिति गंभीर है, पर भारत एंटी बैलेस्टिक मिसाइल पैड दागता है, जो दुश्मन की मिसाइल को हवा में ही 18 से 50 किलोमीटर की ऊंचाई पर नष्ट कर देती है।
मान लें फिर भी परमाणु शस्त्र से लैस दुश्मन की मिसाइल किसी शहर पर गिर गई तो? शायद परमाणु बम या मिसाइल गिरने वाले क्षेत्र में एक-दो किलोमीटर तक तो कुछ न बचे, पर बाकी लोगों को बचाने के लिए सेना तुरंत कूच कर जाएगी। विशेष वाहन लेकर सैनिक तुरंत उस विकिरण संक्रमित क्षेत्र की तरफ बढ़ जाएंगे। विशेष सूट, एनबीसी किट व अन्य उपकरणों से लैस वाहनों में मेडिकल टीमें होंगी, जो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के साथ ही इलाज भी शुरू कर देंगी।
इसी बीच अगर दुश्मन रासायनिक जंग भी छेड़ देता है, तो इससे निपटने की भी तैयारी है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन [डीआरडीओ] सूत्रों के मुताबिक चार ऐसे 'फार्मुलेशंस' [दवाएं] तैयार करने में सफलता हासिल हुई है, जिन्हें जहरीली नर्व गैस के हमले में इस्तेमाल किया जा सकता है। इनके मनुष्य पर सफल परीक्षण कर लिए गए हैं और अब ड्रग कंट्रोलर जनरल से अनुमति का इंतजार बाकी है। जहरीली गैस से देखने की क्षमता कम हो जाती है, मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, छाती में तनाव होने लगता है, सांस उखड़ती है और इन सबके चलते मृत्यु भी हो सकती है।
सेना संक्रमित वातावरण के लिए विशेष रेकी वाहन भी तैयार कर रही है। थल सेना ने ऐसे आठ वाहनों का आर्डर दिया है। परीक्षणों में सफल होने के बाद बड़े पैमाने पर आर्डर दिए जाएंगे। ऐसे वातावरण में काम करने वाले बीएमपी-2 व 2-के का आधुनिकीकरण भी हो चुका है। इनके सेंसर न केवल परमाणु विस्फोट, बल्कि रासायनिक हमले और रेडिएशन स्तर का फौरन पता लगाने में सक्षम हैं। ऐसे वातावरण में इनका एनबीसी प्रोटेक्शन सिस्टम भी तुरंत चालू हो जाता है।
महत्वपूर्ण सफलता एनबीसी वातावरण में काम करने के लिए नयी पीढ़ी के एमके-5 सूट बनाने में हासिल हुई है। कई फैब्रिक तहों व सफरिकल कार्बन बीड्स से बने यह विशेष सूट 24 घंटे से अधिक समय तक परमाणु, रासायनिक हमले वाले वातावरण में काम कर सकते हैं। थल सेना ने ऐसे 39,868 सूटों के लिए आर्डर दिया है, जिनमें से आधे तैयार हो गए हैं। नौसेना को भी ऐसे 1000 सूट दिए जा रहे हैं। रक्षा खरीद परिषद ने एनबीसी जंग माहौल में काम करने के लिए तमाम उपकरण, बख्तरबंद गाड़ियां, विशेष किट व अन्य साजो सामान के लिए 2000 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। रक्षा वैज्ञानिक डा. सेल्वामूर्ति के मुताबिक डीआरडीओ अब ऐसे मानवरहित वाहनों पर भी काम कर रहा है, जिनका एनबीसी हमले के वक्त इस्तेमाल किया जा सके। ऐसे वाहन विशेष सेंसरों से लैस होंगे और सेना जान का जोखिम उठाए बिना परमाणु हमले वाले स्थान पर उन्हें भेज सकेगी।