
नई दिल्ली [जागरण टीम]। पांच धमाके और 25 मौतें। शनिवार की शाम दहशतगर्दो ने सीरियल धमाकों से देश की राजधानी को दहला दिया। धमाकों में 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। सभी को शहर के विभिन्न अस्पतालों में दाखिल कराया गया है। पुलिस ने इस सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और इनमें से एक के धमाकों के मास्टरमाइंड होने का दावा किया है।
बाद में इंडिया गेट के पास एक और रीगल सिनेमा के पास दो जिंदा बम भी मिले, जिन्हें निष्क्रिय कर दिया गया। बमों में टाइमर डिवाइस लगे थे। धमाकों से पहले एक ई-मेल भी जारी किया गया। इंडियन मुजाहिदीन की ओर से भेजे इस मेल में खुलेआम चेतावनी दी गई थी कि पांच मिनट बाद धमाके होने वाले हैं। बाद में मुंबई पुलिस [एटीएस] के अतिरिक्त आयुक्त परमबीर सिंह ने बताया कि मेल का प्रोटोकाल एड्रेस मुंबई का होने का पता चला है। सुरक्षा के प्रति प्रशासनिक लापरवाही और खुफिया एजेंसियों के नाकारापन के चलते दहशतगर्दो को अपनी मंशा पूरी करने में एक बार फिर कोई मुश्किल नहीं आई।
आतंकियों ने मुख्य निशाना बाजारों को बनाया। पहला धमाका शाम 6.10 बजे करोलबाग के भीड़भाड़ वाले बाजार गफ्फार मार्केट में हुआ। थोड़ी ही देर में चार और धमाकों से दिल्ली दहल उठी। कनाट प्लेस के सेंट्रल पार्क और गोपाल दास टावर के बाहर कूडे़दान में धमाके हुए। इनमें सर्वाधिक लोग घायल हुए हैं। दिल्ली की पाश कालोनी ग्रेटर कैलाश पार्ट-एक के एम ब्लाक मार्केट के पास दो धमाके हुए। यहां भी कूड़ेदान में बम छिपा कर रखे गए थे। इस बीच एक न्यूज एजेंसी को ई-मेल भेज कर इंडियन मुजाहिदीन संगठन ने धमाकों की जिम्मेदारी ले ली है। इंडियन मुजाहिदीन के बारे में कहा जाता है कि यह प्रतिबंधित सिमी और लश्कर-ए-तैयबा का बदला हुआ नाम है।
शनिवार को अवकाश का दिन होने के कारण ज्यादातर बाजारों में शाम के समय काफी रौनक रहती है। आतंकियों ने दहशत फैलाने के लिए ऐसे इलाकों को मुख्य तौर पर निशाना बनाया। एक बार फिर यह बात भी प्रमाणित हुई कि सुरक्षा एजेंसियां विशेष मौकों पर ही सतर्कता बरतती हैं, लेकिन बाद में पहले जैसी ढिलाई बरतने लगती हैं।
पुलिस सूत्रों ने दावा किया कि विस्फोट के लिए इस्तेमाल किए गए बम कम क्षमता वाले थे। उनका मकसद नुकसान पहुंचाने की जगह दहशत फैलाना ही ज्यादा था, लेकिन हताहतों की संख्या देख कर यह दावा गले नहीं उतरता। दिल्ली पुलिस ने तो शुरू में बम विस्फोट की सूचना को 'सिलेंडर फटने की बात' कह कर हल्के में उड़ा दिया। कुछ मिनट बाद जब अन्य जगहों पर बम फटने की सूचना मिली, तब जाकर सुरक्षा तंत्र सक्रिय हुआ।
सबसे पहले घटनास्थल पर मीडिया, राहत व बचाव दल के लोग पहुंचे। भारी भीड़ के मद्देनजर पुलिस ने सभी घटनास्थलों को घेर लिया और फिर घायलों को अस्पताल ले जाने का काम शुरू हुआ।
पहले भी दहलती रही है दिल्ली
29 अक्टूबर 2005: सरोजिनी नगर, पहाड़गंज, गोविंदपुरी में हुए धमाकों में 59 लोग मारे गए व 155 घायल हुए।
13 दिसंबर 2001: संसद पर हुए हमले में 11 लोग मारे गए और 30 घायल हो गए।
18 जून 2000: लाल किले पर हुए हमले में 2 लोग मारे गए।
16 अप्रैल 1999: होलंबीकलां रेलवे स्टेशन पर हुए धमाके में 2 लोग मारे गए।
26 जुलाई 1998: अंतरराज्यीय बस अड्डे पर हुए विस्फोट में 2 लोगों की मौत, 3 घायल।
30 दिसंबर 1997: पंजाबी बाग में हुए विस्फोट में 4 लोग मारे गए तथा 30 घायल।
30 नवंबर 1997 : चांदनी चौक में हुए धमाके में 3 लोग मारे गए और 73 घायल हो गए।
1 अक्टूबर 1997: फ्रंटियर मेल में हुए धमाके में 3 लोग मारे गए।