मुंबई पुलिस के नगीने थे करकरे, काम्टे व सालस्कर

 
Nov 27, 08:29 pm

मुंबई [ओमप्रकाश तिवारी]। मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते [एटीएस] की आज बिल्कुल वैसी स्थिति है, जैसे किसी ने शतरंज का खेल खेलते हुए तीन चाल में उसका बादशाह पीट दिया हो।

26 नवंबर को मुंबई पर हुए आतंकी हमले में एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे, उत्तार-पूर्व मुंबई के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अशोक काम्टे एवं एनकाउंटर स्पेशलिस्ट विजय सालस्कर की शहादत मुंबई पुलिस सहित यहां की आम जनता को भी सिहरा गई है। इस हमले में अब तक मुंबई पुलिस के 14 अधिकारी-कर्मचारी मारे जा चुके हैं और 25 घायल हुए हैं।

स्पेशल आईजी के रूप में कार्य कर रहे हेमंत करकरे मालेगांव विस्फोट की जांच के चलते इन दिनों लगातार सुर्खियों में थे। वह कुछ लोगों के निशाने पर भी थे। उनकी मौत से एक ही दिन पहले एटीएस की पुणे शाखा को किसी ने फोन करके धमकी भी दी थी कि दो दिन के अंदर करकरे का घर बम से उड़ा दिया जाएगा। इस धमकी को नजरंदाज करनेवाले करकरे ने मुंबई में आतंकी हमला शुरू होने के बाद स्वयं अपनी टीम का नेतृत्व करने की ठानी और मुंबई वीटी के पास कामा अस्पताल के सामने आतंकियों की गोली का शिकार हो गए।

1982 बैच के आईपीएस अधिकारी करकरे मुंबई के पुलिस उपायुक्त पद की जिम्मेदारी निभाने के बाद कुछ वर्षो तक देश की अंतरराष्ट्रीय गुप्तचर सेवा रिसर्च एंड एनालिसिस विंग [रा] में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके थे। रा की तरफ से उन्हें वियाना में संयुक्त राष्ट्र के जिम्मेदार पद पर भेजा गया था। वहां किए गए उनके काम को आज भी याद किया जाता है।

करकरे की भांति ही आतंकियों द्वारा मारे गए एक अन्य आईपीएस अधिकारी अशोक काम्टे बंधक बनाए गए लोगों को छुड़ाने की कला में सिद्धहस्त थे। ताज और ओबेराय होटल एवं नरीमन हाउस में बंधक बनाए गए लोगों को छुड़ाने में लग रहे अधिक समय को देखते हुए काम्टे की यह कला उनके साथियों को और ज्यादा याद आ रही है।

आतंकी हमले में वीर गति को प्राप्त हुई अधिकारियों की तिकड़ी के तीसरे अधिकारी आईपीएस तो नहीं थे, लेकिन अपनी बहादुरी के कारण पिछले डेढ़ दशक से देश भर में चर्चित रहे थे। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में मुंबई में अंडरव‌र्ल्ड का सफाया करने वाले अधिकारियों में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। अपने साहसी करियर के दौरान वह अंडरव‌र्ल्ड के 70 से ज्यादा गुंडों को मार चुके थे। मुंबई के माफिया सरगनाओं में एक प्रमुख नाम रहे अमर नाईक एवं उसके पूरे गैंग का सफाया सालस्कर द्वारा ही किया गया था।




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