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आतंकी खतरा: महाराष्ट्र व केंद्र को नोटिस

Dec 04, 02:35 pm
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मुंबई। बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और हलफनामा दायर कर यह बताने को कहा है कि भविष्य में आतंकी घटनाएं रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं या उठाए जाने हैं। महानगर में 26 नवंबर को हुए आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि में दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह निर्देश दिया।

मुख्य न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कृपया इस बात की जांच की जाए कि क्या संविधान प्रदत्त जीवन के अधिकार में सुरक्षा के साथ रहने का अधिकार और सुरक्षा की भावना भी शामिल है। स्पष्ट रूप से आतंकी हमलों के मीडिया कवरेज का जिक्र करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मीडिया द्वारा सुरक्षा योजना का खुलासा भी ऐसा मुद्दा है जिसकी समीक्षा किए जाने की जरूरत है।

अधिवक्ता वीपी पाटिल और सोसाइटी आफ इंडियाज ला फर्म ने इस बारे में जनहित याचिकाएं दायर की हैं। अदालत ने राज्य और केंद्र सरकार को अपना जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

कडे़ कानून बनाने संबंधी याचिका खारिज

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मुंबई में हुए आतंकी हमले में मारे गए इंदौर के एक युवक के परिजनों को मुआवजा दिए जाने तथा आतंकवाद को लेकर कडे़ कानून बनाए जाने संबंधी एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया।

इंदौर के एक सामाजिक कार्यकर्ता सतपाल आनंद ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की थी कि मुंबई के आतंकी हमले में मारे गए इंदौर के एक युवक के परिजनों को मुआवजा दिया जाए और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कड़े कानून बनाए जाए। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एके पटनायक तथा अजीत सिंह की खंडपीठ ने बुधवार को यहां इस मामले की सुनवाई के दौरान अपने आदेश में यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायालय ऐसा कोई आदेश पारित नहीं कर सकता।

सीधे प्रसारण पर केंद्र से निर्देश लेने को कहा

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आतंकी हमलों जैसी वारदात के निजी चैनलों के सीधे प्रसारण के लिए केंद्र द्वारा मानदंड तय किए जाने संबंधी याचिका पर केंद्र सरकार से निर्देश प्राप्त करने के आदेश दिए हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता डा.ज्योति वर्मा द्वारा दायर एक जनहित याचिका में कहा गया था कि मुंबई में हाल ही हुए आतंकी हमले का निजी चैनलों द्वारा सीधा प्रसारण किए जाने से आतंकियों को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड और पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई की जानकारी मिलती रही, जिसके कारण आतंकियों को मार गिराने में 59 घंटे से अधिक का समय लगा। याचिका में मांग की गई थी कि इस प्रकार के आतंकी हमलों के सीधे प्रसारण के लिए केंद्र सरकार अपने मानदंड तय करे।

मुख्य न्यायाधीश ए.के.पटनायक तथा अजीत सिंह की खंडपीठ ने अस्सिटेंट सालिसिटर जनरल को इस बारे में केंद्र सरकार से निर्देश प्राप्त करने के आदेश दिए। मामले की अगली सुनवाई के लिए आठ दिसंबर की तिथि निर्धारित की गई है।

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