अमेरिकी आयोग के निशाने पर पाक

 
Dec 07, 04:12 pm

नई दिल्ली। अमेरिकी आयोग के एक अधिकारी ने चेतावनी दी है कि तत्काल कार्रवाई नहीं किए जाने की स्थिति में अगले पांच वर्ष में आतंकी परमाणु या जैविक हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं। अधिकारी ने यह भी कहा कि विश्व सुरक्षा परिदृश्य में पाकिस्तान एक कमजोर कड़ी है।

अमेरिकी कांग्रेस के आदेश पर एक द्विपक्षीय आयोग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्काल कार्रवाई न करने पर यह आशंका अधिक है कि वर्ष 2013 के अंत तक दुनिया में कहीं पर आतंकी हमले में सामूहिक विनाश के हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा। रिपोर्ट में बराक ओबामा के भावी प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि अमेरिका में सुरक्षा कमजोर हो रही है।

ओबामा के सत्ता परिवर्तन दल के अधिकारियों के हवाले से पाकिस्तानी दैनिक द न्यूज में कहा गया है कि व‌र्ल्ड आफ रिस्क शीर्षक वाली रिपोर्ट में सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और आतंकवाद के मुख्य खतरे को उजागर किया गया है।

अखबार के अनुसार, रिपोर्ट में पाकिस्तान और ईरान जैसे देशों में परमाणु प्रौद्योगिकी के तीव्र प्रसार तथा दुनियाभर में बायोटेक उद्योगों में कमजोर सुरक्षा की चेतावनी दी गई है। इसमें कहा गया है, हालांकि पाकिस्तान अमेरिका का करीबी सहयोगी है लेकिन क्षेत्रीय हिंसा रोकने में उसकी अक्षमता हिंसक राजनीतिक अस्थिरता और पड़ोसी देश भारत के साथ परमाणु तनातनी के कारण वह अत्यंत खतरनाक मोड़ पर है।

खबर में यह कहते हुए उद्धृत किया गया है कि आज जहां तक आतंकवाद और सामूहिक विनाश के हथियारों का सवाल है तो इससे संबद्ध सभी रास्ते पाकिस्तान की ओर संकेत करते हैं। आगे कहा गया है कि एक गंभीर खतरा यह भी है कि यह अमेरिका पर सामूहिक विनाश के हथियारों से संभावित हमले का स्रोत हो सकता है। आयोग ने कहा है कि आतंकवादी परमाणु हथियारों की तुलना में एंथ्रेक्स सहित जैविक हथियार हासिल करने में सक्षम हो सकते हैं। आयोग ने चेतावनी दी है कि यह खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है।

पाकिस्तान को पूर्व सीनेटर बाब ग्राहम ने इसे तूफान का केंद्र कहा है। जबकि पाकिस्तानी दैनिक ने अनेक कांग्रेस सांसदों और सीनेटरों के हवाले से कहा है कि आतंकियों के हाथ परमाणु या जैविक हथियार लगने की आशंका बहुत ही क्षीण है इसलिए भयभीत नहीं होना चाहिए। न्यूयार्क और पेंटागन पर 11 सितंबर को हुए हमले के बाद सुरक्षा संबंधी कार्रवाई के तहत आयोग को कांग्रेस ने 2007 में यह रिपोर्ट बनाने का जिम्मा सौंपा था। आयोग की मुख्य सिफारिशों में पाकिस्तान में परमाणु और जैविक सामग्री की सुरक्षा तथा एशियाई परमाणु होड़ पर लगाम कसना प्रमुख है। साथ ही यूरेनियम और प्लूटोनियम भंडारों की सुरक्षा, परमाणु तस्करी पर रोक, अप्रसार संधि को कठोर बनाने की सिफारिश भी की गई है। यह सिफारिशें सैद्धांतिक तौर पर ओबामा सरकार के लिए हैं।




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