नई दिल्ली। पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कहा कि यह पड़ोसी देश आतंकवाद को राजकीय नीति के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि वह ऐसे देश को अलग थलग करके उसे इस तरह की हरकतें छोड़ने के लिए मजबूर करे।
मुंबई आतंकी हमलों में पाकिस्तानी तत्वों का हाथ होने के साक्ष्य इस पड़ोसी देश सहित अन्य देशों को उपलब्ध कराने के दूसरे दिन सिंह ने यहां कहा कि जो देश आतंकवाद को राजकीय नीति के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को न सिर्फ उनकी निंदा करनी चाहिए बल्कि उन्हें अलग-थलग भी कर देना चाहिए।
मुंबई आतंकी हमले के संदर्भ में उन्होंने कहा कि जिस परिष्कृत तरीके और सैन्य सटीकता के साथ यह हमला हुआ उसमें पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों का कुछ समर्थन जरूर रहा होगा।
आंतरिक सुरक्षा पर विचार-विमर्श के लिए यहां आयोजित मुख्यमंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह चिंताएं स्वाभाविक हैं कि इस तरह के हमलों के खतरों को नाकाम करने में देश का सुरक्षा तंत्र नाकाफी है और इस बात की भी आलोचना की जा सकती है कि आंतरिक सुरक्षा को व्याप्त खतरों से निपटने के लिए जिस आधुनिक तंत्र, हथियारों और उपकरणों की आवश्यकता है, उनकी कमी है।
उधर, बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यों से सलाह किए बिना राष्ट्रीय जांच एजेंसी के गठन और आपराधिक गतिविधि निवारण कानून में संशोधन करने पर नाराजगी जताई।
गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया रिएक्टिव नहीं बल्कि प्रो एक्टिव होनी होगी। इस बात की भी जरूरत है कि आतंकी खतरों या हमलों से निपटने के लिए एक स्पष्ट कमान ढांचा बनाया जाए।
प्रधानमंत्री कहा कि पाकिस्तान से भारत में नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते आतंकियों की घुसपैठ कराई जा रही है। नियंत्रण रेखा से भी इस तरह की गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं हुई हैं।
उन्होंने कहा कि पकिस्तान की कमजोर सरकार गैर जिम्मेदाराना बर्ताव कर रही है। आतंकी हमलों के संबंध में हमारी कई मांगों पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया इसका सुबूत है। बांग्लादेश के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के उग्रवादियों को पड़ोसी देश में पनाह दी जा रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान अपनी भूमि से भारत के खिलाफ आतंकी वारदात करने वालों को काबू करने की बजाय युद्धोन्माद फैला रहा है। लेकिन पाकिस्तान के इन हथकंडो से विचलित होने की बजाय हमारी राष्ट्रीय एकता और मजबूत होगी, हमारा राष्ट्र बाहरी और अंदरूनी सुरक्षा दोनों तरह की चुनौतियों को शिकस्त देने के लिए प्रतिबद्ध है।
पाकिस्तान के आचरण पर खेद जताते हुए उन्होंने कहा कि हमारी विदेश नीति ऐसे पड़ोसियों की हमारी ख्वाहिश से प्रेरित है जो हमारे सहयोगी हों। लेकिन दुर्भाग्यवश हम अपने पड़ोसी नहीं चुन सकते हैं और पूर्व में भी पाकिस्तान जैसे कुछ देश भारत के खिलाफ दुर्भावना रखने वाले आतंकी और अन्य तरह के तत्वों को शह और पनाह देते आए हैं।
भारत में आतंकवाद के बढ़ते हमलों और उनके द्वारा अत्याधुनिक तकनीक इस्तेमाल किए जाने के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने इससे निपटने के लिए एक स्थायी संकट प्रबंधन समूह गठित किए जाने का सुझाव दिया।