
मुसाबनी [पूर्वी सिंहभूम]। 28 मार्च, 2003 को डुमरिया प्रखंड के भागाबांधी गांव में जिस नासुस की नींव रखी गई थी, उसके मुख्य सूत्रधार धनाई किस्कू की नक्सलियों ने सोमवार अहल सुबह लगभग 7.15 बजे एके-47 की गोलियों से भूनकर हत्या करने के साथ ही संगठन की कमर तोड़ दी। जिसने नासुस रूपी 'बिरवा' लगाया आज उसी का अंत हो गया।
नासुस रूपी पौधे को पूर्ण रूप से प्रौढ़ होने से पहले ही नक्सलियों ने काट डाला। नासुस वृक्ष तो बन गया था। पहले ही वर्ष इसने लांगो घटना को अंजाम देकर फल भी अच्छा दिया था। इसके बाद भी इसमें फल देने का सिलसिला जारी था। लांगो के बाद नासुस की सबसे बड़ी उपलब्धि भीतरआमदा की घटना रही। जिसमें नौ नक्सलियों को मार कर ठिकाने लगा दिया गया लेकिन बीच में पुलिस द्वारा मदद नहीं मिलने के कारण नासुस बैकफुट पर आने लगी थी। उसकी उपेक्षा होने से नक्सलियों ने डुमरिया क्षेत्र में फिर से अपना पैर जमाना शुरू कर दिया था।
इसके बावजूद भी नासुस महासचिव धनाई किस्कू ने हिम्मत नहीं हारी। वह नक्सलियों को क्षेत्र से भगाने के अभियान में डटे रहे। 28 मार्च को गठित नासुस संगठन के उत्प्रेरक तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डा. अरुण उरांव थे। नासुस का गठन जिस उद्देश्य के लिए किया गया था उसमें वह खरा भी उतरा। नासुस के असली हीरो माने जाने वाले धनाई किस्कू कभी नक्सलियों से आतंकित नहीं हुए। उन्होंने निर्भीक होकर सदैव नक्सलियों की मांद में जाकर उन्हे पटकनी दी। राजनीतिक दृष्टिकोण से एक-दूसरे से अलग विचारधारा वाले धनाई किस्कू और शंकर हेम्ब्रम के नेतृत्व में नासुस का गठन हुआ। इस समिति की ही देन है कि जिन गांवों ने नक्सलियों को पनाह दी थी, वहीं पर उनके खिलाफ धनुष की प्रत्यंचा तन गई। सेंदरा होने लगा। लांगो गांव वालों ने नौ नक्सलियों को मारकर पूरे देश में एक उदाहरण प्रस्तुत किया। स्थिति ऐसी हो गई कि क्षेत्र में अब नक्सलियों का रहना दुश्वार हो गया। नक्सलवाद के खिलाफ चलाई गई यह मुहिम जवान हुई।
एसपी डा. उरांव का तबादला हो गया। उनके स्थान पर संजय आनंद आ गए। उनके आने के साथ ही क्षेत्र की स्थिति बदल गई। नासुस के लोग अपने को उपेक्षित समझने लगे। लांगो घटना की बरसी पर एसपी ने वहां जाना उचित नहीं समझा। उसी दिन ग्रामीणों ने समझ लिया था कि अब उन्हे पुलिस का सहयोग पहले जैसा नहीं मिल पाएगा। ग्रामीणों की इस मनोस्थिति को भांप नक्सलियों ने अपने पांव दुबारा जमाने शुरू कर दिए थे। पुलिस की गतिविधि शिथिल पड़ गई। बाद में एसपी नवीन कुमार ने नक्सलियों के खिलाफ नासुस को लेकर फिर से एक ऐसा अभियान छेड़ा था जिसके चलते नक्सली एक बार फिर बैकफुट पर आ गए थे। नासुस, पुलिस व नक्सलियों के बीच शह-मात के खेल में फिर एक बार नक्सलियों ने महासचिव धनाई किस्कू की हत्या कर नासुस की कमर तोड़ने का काम किया है। धनाई की हत्या नासुस के साथ-साथ पुलिस के लिए बहुत बड़ी अपूरणीय क्षति मानी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि सोमवार अहल सुबह मुसाबनी पोस्ट आफिस मैदान में नक्सलियों की एके-47 व रिवाल्वर नागरिक सुरक्षा समिति के महासचिव सह झारखंड विकास मोर्चा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष धनाई किस्कू पर तबतक बरसती रहीं जब तक उनकी मौत नहीं हो गई। इस गोलीबारी में दो अन्य लोग भी घायल हो गए, जिनका इलाज जमशेदपुर टाटा अस्पताल में चल रहा है।