मुंबई। विशेष अदालत के जज की दरियादिली पर मुंबई आतंकी हमले मुकदमे में बतौर चश्मदीद गवाह पेश हुए एक रिक्शाचालक की आंखों से आंसू छलक आए। जज ने अभियोजन पक्ष [प्रासीक्यूशन] से रिक्शाचालक को अदालत में पेशी के कारण रोजी-रोटी नहीं कमा पाने के एवज में तीन दिन का मुआवजा दिलाने को कहा।
अदालत की कार्यवाही के दौरान जज एम.एल. तहलियानी ने रिक्शाचालक निरंजन सरदार से पूछा, 'तुम कितना कमाते हो?' महाराष्ट्र के अकोला में रहने वाले निरंजन ने जवाब में कहा, 'साहब, मैं महीने में तीन-चार हजार रुपये कमा लेता हूं।' इस पर जज ने तत्काल जांच अधिकारी रमेश महाले से पूछा कि क्या गवाह को अकोला से मुंबई आने-जाने का टिकट और पेशी के लिए तीन दिन तक मुंबई में रुकने का मुआवजा दिया गया?
महाले ने जज को बताया कि गवाह और उसकी पत्नी को मुंबई आने-जाने का टिकट दिया गया है। निरंजन और उसकी पत्नी संगीता की बीते सोमवार को गवाही हुई थी। दोनों छत्रपति शिवाजी रेल टर्मिनस [सीएसटी] पर मुहम्मद अजमल कसाब और अबु इस्माइल द्वारा की गई गोलीबारी में घायल हो गए थे।
आमतौर पर अदालत में गवाही देने आए व्यक्तियों को चाय-बिस्कुट या लंच दिया जाता है। लेकिन, काम से छुंट्टी के एवज में उन्हें कोई हर्जाना नहीं दिया जाता। इस मामले में अदालत ने मानवीय रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को सलाह दी कि वे निरंजन को हर्जाना देने पर विचार करें क्योंकि उसकी आमदनी बहुत कम है।