
श्रीनगर, जागरण ब्यूरो। कश्मीर में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन को सुरक्षा बलों ने बुधवार को करारी चोट दी। दोनों संगठनों के दो शीर्ष पाकिस्तानी कमांडरों अबू मूसा और पाशा को मार गिराया। दो अन्य आतंकियों को भी ढेर कर दिया। मूसा पर 11 लाख और पाशा पर नौ लाख रुपये का इनाम था। हालांकि सेना को इस कामयाबी के लिए उत्तरी कश्मीर में दो स्थानों पर मुठभेड़ के दौरान मेजर सहित चार जांबाज खोने पड़े।
जानकारी के अनुसार बांडीपोरा के बनियारी गांव के एक घर में हिजबुल कमांडर पाशा और मूसा के मौजूद होने की सूचना मिली थी। इसके आधार पर मंगलवार की रात मेजर सुरेश सूरी और लांस नायक खुशहाल सिंह घर की छत से परिसर में घुसे। लेकिन आतंकवादियों की गोलीबारी में मेजर सूरी और लांसनायक खुशहाल सिंह शहीद हो गए। इसके तुरंत बाद राष्ट्रीय राइफल्स की टीम ने आतंकवादियों को घर से बाहर निकालने के लिए वहां धावा बोला। लेकिन भारी गोलीबारी शुरू हो गई। रातभर की शंाति के बाद आतंकवादियों ने सुबह गोलीबारी शुरू कर दी। जिसके बाद उत्तरी कश्मीर में लंबे समय से सक्रिय दोनों दुर्दात आतंकी कमांडर मारे गए। मारे गए मूसा पर ग्यारह लाख और नौ साल से सक्रिय पाशा पर नौ लाख रुपये का इनाम था। मुठभेड़ में दो अधिकारियों सहित सेना के चार जवान घायल भी हो गए। जिसमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर बताया जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस बरार ने बताया कि शहीद मेजर सुरेश सूरी हैदराबाद के रहने वाले थे। जबकि लांस नायक खुशहाल सिंह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के निवासी थे।
उधर,बारामूला के रफियाबाद के जंगलों में सोमवार से जारी मुठभेड़ अल-बदर के दो आतंकियों की मौत और मार्काेस कमांडो समेत दो सैन्यकर्मियों की शहादत के बाद बुधवार को समाप्त हो गई। इस मुठभेड़ में तीन सैन्यकर्मी जख्मी हो गए। मुठभेड़ के दौरान आतंकियों को मार गिराने के लिए पर हेलीकाप्टर की मदद भी ली गई। अलबत्ता घेराबंदी में फंसा लश्कर कमांडर अबु अनस भाई एक बार फिर भागने में कामयाब रहा।
इसी बीच, नई दिल्ली में गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि बांडीपोरा में मुठभेड़ खत्म हो गई है। उन्होंने भी पाशा व मूसा के मारे जाने की पुष्टि की है।
घाटी में बढ़ रहा घुसपैठ का ग्राफ
नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कश्मीर घाटी में बांडीपोरा और रफियाबाद की मुठभेड़ सेना को भी मंहगी पड़ी है। आतंकियों के खिलाफ इन दो आपरेशनों में सेना ने दो शीर्ष पाकिस्तानी कमांडरों को भले ही मार गिराया है। लेकिन सेना के मेजर और नौसेना के मार्कोस कमांडो के साथ-साथ दो जवान भी गंवाने पड़े हैं। इन दोनों मुठभेड़ों ने घाटी में लंबी चलने वाली मुठभेड़ों का आंकड़ा भी बढ़ा दिया।
दरअसल जम्मू-कश्मीर में सर्दियों से पहले बढ़ता मुठभेड़ों का आंकड़ यह बताने के लिए काफी है कि घुसपैठ के बढ़ते ग्राफ पर प्रधानमंत्री कि चिंता कितनी वाजिब है। महज दो महीनों में आतंकियों के साथ करीब एक दर्जन मुठभेड़ इस ओर इशारा कर रही है कि सरहद पार से घाटी को गर्माने की कोशिश किस शिद्दत से हो रही है। बताते चलें कि आठ सितंबर को भी पुंछ में हुई एक मुठभेड़ में भी सेना ने अपना एक मेजर खोया था।
रक्षा मुख्यालय के आंकड़े बताते हैं कि इस साल घुसपैठ की 30 से ज्यादा प्रयासों में ही अब तक 65 आतंकी मारे जा चुके हैं। वहीं 2008 में पूरे साल के दौरान घुसपैठ की कोशिशें में करीब साठ आतंकी मारे गए थे। घुसपैठ के बढ़ते ग्राफ को काबू करने के लिए सेना ने अपने रणनीति और रफ्तार दोनों में कई बदलाव किए है। यही वजह है कि इस साल अब तक करीब 190 आतंकवादी आतंकियों के सुरक्षाबलों की कार्रवाई में मारे जा चुके हैं। 2007 में 105 आतंकी मारे गए थे।
बीते दिनों रक्षामंत्री एके एंटनी ने भी माना था कि पिछले कुछ महीनों में सीमा पर घुसपैठ में इजाफा हुआ है। साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इस बात के लिए आगाह कर चुके हैं कि आतंकी भारत में दाखिल होने के लिए नए दरवाजे खोज रहे हैं। रक्षा मुख्यालय के सूत्रों का मानना है सर्दियों की शुरुआत से पहले आने वाले दिनों में घुसपैठ की कोशिशों में और बढ़ोतरी हो सकती है। रक्षा मंत्रालय बीते दिनों पाक सेना की तरफ से अखनूर में हुए युद्धविराम उल्लंघन को भी घुसपैठ की बढ़ती कोशिशों से जोड़कर देख रहा है। इस साल पाक सेना अब तक 15 बार सरहद पर 2003 से लागू युद्धविराम को तोड़ चुकी है।