
मुंबई। मुंबई हमलों के मामले के विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान की एक अदालत के अजमल कसाब को भगोड़ा घोषित करने और उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने से यह साबित होता है यह बंदूकधारी निस्संदेह पाकिस्तानी है और उसने गत 26 नवंबर के हमलों में भाग लिया था।
निकम ने कहा कि भारत का रुख यह है कि वह [कसाब] पाकिस्तानी नागरिक है और उनसे न सिर्फ साजिश रची, बल्कि 26/11 के हमलों में भाग भी लिया। वहां [पाकिस्तान] की एक आतंकवाद निरोधी अदालत के उसे मामले में भगोड़ा घोषित कर देने से यह प्रमाणित हुआ है।
मुंबई हमलों के सात संदिग्धों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई कर रही पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधी अदालत ने जिंदा पकड़े गए कसाब सहित 14 लोगों को गत शनिवार भगोड़ा घोषित कर उनके खिलाफ वारंट जारी किए। साजिश पाकिस्तान में ही रची जाने संबंधी सबूत भारत के मुहैया कराने के बाद पड़ोसी देश 26/11 हमलों के मामले में अलग मुकदमा चला रहा है। पाकिस्तान की सुनवाई अदालत में मुकदमा जहां हाल ही में शुरू हुआ है, वहीं मुंबई की विशेष अदालत में सुनवाई अंत तक पहुंच गई है।
यह पूछने कि क्या कसाब के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट तामील होगा, निकम ने कहा कि हमने भी 26/11 हमलों के मामले में वांछित आरोपियों की मांग की थी लेकिन पाकिस्तान सरकार ने इस आधार पर उन्हें सौंपने से इनकार कर दिया कि दोनों देशों के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। लिहाजा कसाब को पाकिस्तान को सौंप देने का सवाल ही नहीं उठता।
बहरहाल, निकम ने कहा कि पाकिस्तान में अभियोजन पक्ष को अब यह साबित करने की जरूरत होगी कि कसाब के सहयोगियों ने किस तरह उसी देश में आपराधिक षड्यंत्र रचा और मुंबई में किस तरह आतंकी हमलों को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि 26/11 हमलों की साजिश और तैयारियां पाकिस्तान में ही की गई। लिहाजा यह जानना ज्यादा दिलचस्प हो गया है कि वहां की जांच एजेंसियां किस तरह उन आरोपियों के दोष को साबित करेंगी जो जेल में हैं और जो फरार हैं।
कसाब पर मुंबई हमलों के दौरान 183 लोगों की जान लेने का आरोप है। सुरक्षा बलों ने उसके नौ साथियों को मार गिराया था।