
नई दिल्ली [नीलू रंजन]। गनीमत रही कि मुंबई हमलों का गुनहगार अजमल आमिर कसाब जिंदा पकड़ में आ गया। नतीजतन पाकिस्तान पर कुछ दबाव बना। नहीं तो भारत में हमले के लिए जिम्मेदार आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में हमारी सुरक्षा एजेंसियों का रिकार्ड पहले से ही काफी खराब रहा है। यह रिकार्ड देश के भीतर मौजूद आतंकियों को पकड़ने को लेकर जितना कमजोर है, उतना ही ज्यादा खराब विदेश में मौजूद आतंकियों को लेकर है।
आतंकी वारदात को अंजाम देने वाले ऐसे आतंकियों की सूची काफी लंबी है, जिनके बारे में सुरक्षा एजेंसियों को हवा तक नहीं लगी। 26/11 के पहले लगभग डेढ़ साल तक विभिन्न शहरों में सीरियल धमाके करने वाले इंडियन मुजाहिदीन के 56 आतंकियों के बारे में कुछ पता नहीं चला। अब अमेरिका में गिरफ्तार तहव्वुर हुसैन राणा से इन फरार आतंकियों के संबंध तलाशे जा रहे हैं। इनमें तौकीर उर्फ सुभान, रियाज भटकल, इकबाल भटकल, अबू इखलाक शेख, अमीर रजा, मुहम्मद मोमिन अब्दुल खान हैं।
दूसरी तरफ विदेश में जा छुपे आतंकियों के मामले में भारत को अब तक केवल 1993 में मुंबई हमले के आरोपी अबु सलेम के प्रत्यर्पण में सफलता मिली है। वह भी इस शर्त पर उसे मौत की सजा नहीं जाएगी। 26/11 के पहले तक भारत में हुए आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार कुल 48 आतंकी ऐसे हैं, जो पाकिस्तान में छिपे हुए हैं। इनके खिलाफ न सिर्फ इंटरपोल का रेड कार्नर नोटिस है, बल्कि भारत कई बार पाकिस्तान को इनकी सूची सौंप चुका है। लेकिन पाकिस्तान उनके खिलाफ भारतीय एजेंसियों द्वारा जुटाए तमाम सबूतों को रद्दी में डालता रहा।
पाकिस्तान ही नहीं, दुनिया के दूसरे देशों में बैठे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में भारत का रिकार्ड बेहद खराब रहा है। जबकि भारत में वांछित आतंकी कनाडा, ब्रिटेन, जर्मन समेत दुनिया के कई देशों में रह रहे हैं और इनमें कई खिलाफ तो 30 साल से भी अधिक समय से रेडकार्नर नोटिस जारी है।
अनसुलझे कुछ बड़े आतंकी हमले
1-समझौता एक्सप्रेस में बम धमाका, 19 फरवरी 2007, 67 मरे-15 घायल
2. हैदराबाद के मक्का मस्जिद में बम विस्फोट, 18 मई 2007, नौ मरे-50 घायल
3. अजमेर शरीफ दरगाह में बम विस्फोट, 11 अक्टूबर 2007, तीन मरे - 28 घायल