राजनयिक की पत्नी थी निशाने पर

नई दिल्ली। इजरायली कार पर हुए हमले में विस्फोटक लगाने वाला एक शख्स था। यह कहना है भारत के गृह मंत्री का। उन्होंने हमले पर बयान देते हुए कहा कि हमलावर बेहद प्रशिक्षित था। उन्होंने इसे आतंकी हमला करार दिया। चिदंबरम ने कहा कि हमला इजरायली राजनयिक की पत्‍‌नी को निशाना बनाकर किया गया था।

गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि हमले में घायल महिला अस्पताल में भर्ती है उसकी हालत अभी स्थिर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि औरंगजेब रोड पर रेड लाइट होने के दौरान हमलावर ने यह डिवाइस कार पर लगाया था। उन्होंने प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से बताया कि हमलावर के दूसरी तरफ मुड़ने के कुछ सैकेंड में ही यह विस्फोट हुआ।

पुलिस के मुताबिक कार पर एक इलेक्ट्रानिक चिप लगाई गई थी। सीसीटीवी फुटेज से मिली जानकारी के मुताबिक कार पर मौजूद विस्फोटक में एक हैंडल लगा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि विस्फोटक लगाने वाले बाइकसवार के हाथों में था एक रिमोट कंट्रोल भी था।

यह बम कार की डिक्की से चिपकाया गया था। इस संबंध में दिल्ली पुलिस शाम तक गृह मंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। इस मामले में कुछ अन्य प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ हो रही है। हमले में घायल महिला को ताल येहोशुआ कोरेन को इजरायल लाया जा सकता है। दो इजरायली डाक्टरों ने कोरेन की चिकित्सा देखभाल की जिम्मेदारी ली है।

प्राइमस अस्पताल में कोरेन की देखरेख कर रहे चिकित्सकों का कहना है कि उनकी हालत गम्भीर लेकिन स्थिर है। एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारियों का कहना है कि वे कोरेन को इजरायल ले जाने संभावनाओं पर चर्चा कर रहे है।

इस बीच कोरेन का ऑपरेशन कर उनकी रीढ़ की हड्डी से छर्रे निकाल दिए गए हैं। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एन.डी. खुराना ने बताया कि मरीज की हालत स्थिर है।

कोरेन का इलाज कर रहे चिकित्सकों के दल की अगुवाई कर रहे अरुण भनोट ने बताया कि कोरेन नके शरीर में लीवर, फेंफड़ों और रीढ़ की हड्डी में धातु के कई टुकड़े है। उन्होंने कहा कि मुख्य छर्रा रीढ़ की हड्डी में था जो तंत्रिकाओं पर दबाव बना रहा था और उससे एक तंत्रिका कट गई थी। उस छर्रे को निकाल दिया गया है।

इस बीच, इजराइल की खुफिया एजेंसी मुसाद की टीम भी जांच के लिए दिल्ली पहुंच गई है। हमले को लेकर दिल्ली में गृह मंत्रालय की बैठक की जा रही है जिसमें खुफिया एजेंसियों से जुड़े सभी वरिष्ठ अधिकारियों के मौजूद होने की खबर है।

जांच में जुटी एजेंसियों को सीसीटीवी फुटेज में अभी तक कुछ खास हाथ नहीं लगा है। आरोपी का चेहरा भी सीसीटीवी फुटेज में दर्ज नहीं हुआ है। इस हमले में इजरायली महिला राजनयिक समेत चार लोग घायल हुए थे। इस हमले के पीछे हिजबुल मुजाहिद्दीन पर शक जताया जा रहा है। हालांकि ईरान ने इस हमले में शामिल होने से साफ इंकार किया है।

पुलिस सीसीटीवी में कैद भूरे रंग की जैकेट पहने शख्स को तलाश करने में जुटी है। पुलिस पहाड़ गंज के होटलों में तलाशी में जुटी है। इस बीच इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की टीम भी दिल्ली पहुंची गई है।

इजराइल ने इस हमले के लिए हिजबुल और ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। इजराइल का कहना है कि ईरान ने यह हमला अपने तीन वैज्ञानिकों की मौत का बदला लेने के लिए करवाया है। वहीं हमले में घायल राजनयिक की हालत आपरेशन के बाद स्थिर बनी हुई है।

पुलिस ने अपनी शुरुआती जांच में विस्फोट में क्रुड बम के इस्तेमाल की बात कही थी। लेकिन अब उनका मानना है कि इस तरह का विस्फोट क्रुड बम से नहीं किया जा सकता है। पुलिस को शक है कि हमले को रिमोट कंट्रोल के जरिए अंजाम दिया गया। पुलिस फिलहाल इस हमले पर किसी ठोस निर्णय पर नहीं पहुंच पाई है।

इसके उलट ईरानी विदेश मंत्रालय ने सभी प्रकार के आतंकवादी हमलों की निंदा की है। साथ ही ईरान ने भारत व जार्जिया में इजरायली दूतावासों पर हुए हमलों के आरोपों से इंकार किया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने अल-अलाम टीवी के हवाले से बताया कि हमलों के आरोप को खारिज किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रमिन मेहमानपरस्त ने कहा कि ईरान इजरायल के यहूदी शासन द्वारा लगाए गए आरोपों से इंकार करता है।

मेहमानपरस्त ने कहा कि ईरान सभी प्रकार के आतंकवादी हमलों की निंदा करता है। वहीं संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान की मून ने भी भारत और जार्जिया में इजरायली दूतावास कर्मचारियों को हमलों का निशाना बनाए जाने की निंदा की है। महासचिव के प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने प्रशासन से घटनाओं की जाच करने और दोषियों को न्याय के कठघरे में खड़ा करने को कहा है।

दिल्ली में हुए आतंकी हमले पर अमेरिका में व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे कार्नी ने कहा कि अभी तक हमले के जिम्मेदार आतंकी संगठन की कोई जानकारी हमें नहीं मिली है। व्हाइट हाउस का यह बयान इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस आरोप के बाद आया है जिसमें उन्होंने हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। नेतन्याहू ने आरोप लगाया था कि इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ है जो दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा निर्यातक है।

वहीं पूर्व सोवियत गणराज्य जॉर्जिया की राजधानी तिब्लिसी में भी इजरायली दूतावास की कार को निशाना बनाने की कोशिश हुई लेकिन समय रहते हुए बम को निष्क्रिय कर दिया गया। दोनों हमलों का संज्ञान लेते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ईरान और उसके समर्थक लेबनानी हिज्बुल्लाह की करतूत बताया है।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर बीके गुप्ता ने हमले में स्टीकर या मैग्नेट बम के इस्तेमाल की बात कही है। हमले के बाद दिल्ली समेत पूरी दुनिया में इजरायली ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस घटना को तब अंजाम दिया गया जब इजरायली दूतावास की इनोवा कार से इजरायली राजनयिक टाल येहोशुवा जब जा रही थीं। इसी दौरान औरंगजेब रोड पर स्थित केंद्रीय मंत्री मुकुल वासनिक के आवास के ठीक सामने धमाका हुआ। उस समय गाड़ी को मनोज शर्मा चला रहा था।

धमाका इतना तेज था कि कार के बगल से गुजर रही टैक्सी और पीछे आ रही इंडिका कार के शीशे भी चकनाचूर हो गए। धमाके के तुरंत बाद कार में आग लग गई। लोगों ने तत्परता दिखाते हुए इजरायली महिला और चालक को जैसे-तैसे कार से निकाला, दोनों की हालत चिंताजनक है। इंडिका में सवार मनजीत और अरुण शर्मा भी घायल हुए हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लाल रंग की मोटरसाइकिल पर सवार एक शख्स काफी देर से इनोवा का पीछा कर रहा था। उसी दौरान उसने संभवत: बम को कार से चिपकाया। पुलिस ने इलाका घेर लिया है। एनएसजी सहित विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां की टीमें मौके पर हैं। मौके से विस्फोटक व अन्य वस्तुओं के नमूने जांच के लिए फारेंसिक लैब भेज दिए हैं। येहोशुवा के पति भारत में इजरायल के डिफेंस अटैची हैं।

भारत ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए तेल अवीव को भरोसा दिया दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा है। घटना के बाद इजरायली विदेश मंत्री से बात कर एसएम कृष्णा ने आश्वासन दिया की भारतीय एजेंसियां इस घटना की जांच में जुट गई हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय से कुछ मीटर के फासले पहले हुए इस धमाके के बाद भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा कि इजरायल के साथ हम जांच की सूचनाएं साझा करते रहेंगे। अपने इजरायली समकक्ष के साथ बातचीत में विदेश मंत्री ने कहा कि देश का कानून अपना काम करेगा।

विदेश मंत्रालय हादसे में घायल दूतावास कर्मचारियों के स्वास्थ्य की भी लगातार रिपोर्ट ले रहा है। इसके अलावा गृह मंत्रालय के अधिकारी भी विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं। धमाके की इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। आतंकी बेहद सुरक्षित इलाके में वारदात कर आसानी से फरार हो गया। लेकिन पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी। वारदात के तरीके से पुलिस का मानना है कि आतंकी ने जरूर इलाके की रेकी की होगी। जिसके बाद ही उसने इस स्थान को वारदात के लिए चुना।

हैरत की बात यह भी है कि बेहद सुरक्षित इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों में भी आतंकी की फुटेज कैद नहीं हो सकी। तुगलक रोड थाने से 200 मीटर की दूरी पर स्थित औरंगजेब रोड को बेहद सुरक्षित इलाका माना जाता है। जहां घटना हुई, उसके दोनों ओर दो मंत्रियों के बंगले हैं। चंद कदम की दूरी पर एयरफोर्स स्टेशन का चौराहा है।

औरंगजेब रोड का एक रास्ता सात रेस कोर्स रोड को जाता है। घटनास्थल से महज 100 मीटर की दूरी पर प्रधानमंत्री का आवास है। जहां धमाका हुआ, उसके सामने मुकुल वासनिक का आवास है। उसके पीछे भाजपा नेता सुषमा स्वराज की कोठी है। बेहद सुरक्षित इलाका होने की वजह से यहां जगह-जगह पीसीआर की जिप्सी खड़ी रहती है। सड़कों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। इस सब के बावजूद आतंकी मोटरसाइकिल से वारदात कर आसानी से फरार हो गया।

इस दौरान न ही पीसीआर पुलिस उसे पकड़ सकी और न ही सीसीटीवी में उसका चेहरा कैद हो सका। दिल्ली के हाई सिक्योरिटी इलाके में इजरायली दूतावास की कार को निशाना बनाकर दिनदहाड़े हुए हमले को गृह मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। जांच पर नजर रखने के साथ ही गृह मंत्रालय ने पूरे देश में फैले इजरायली ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया है।

गृह मंत्रालय के अधिकारी हमले के पीछे इजरायल विरोधी आतंकी संगठनों का हाथ होने की संभावना से इंकार नहीं कर रहे हैं। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत में रहने वाले इजरायली और उनके ठिकाने पहले से आतंकियों के निशाने पर रहे हैं। अमेरिका में गिरफ्तार लश्क-ए-तैयबा आतंकी डेविड कोलमैन हेडली स्वीकार कर चुका है कि आतंकी हमले के लिए उसने पुणे में ओशो आश्रम के पास इजरायली ठिकाने और राजस्थान के पुष्कर में स्थित खबद हाऊस की रेकी की थी। ये दोनों स्थान आतंकियों के निशाने पर हैं।

दिल्ली में हुई इस घटना को आतंकी वारदात करार देते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसके पीछे आतंकी संगठन हिजबुल्ला और ईरान का हाथ बताया है। वैसे यह पहला मौका नहीं है जब भारत में इजरायली हितों को निशाना बनाया गया हो। इससे पहले 26/11 के मुंबई आतंकी हमले में खबद हाऊस को निशाना बनाया गया था जहां सात इजरायली मारे गए थे।

विदेश मंत्रालय हादसे में घायल दूतावास कर्मचारियों के स्वास्थ्य की भी लगातार रिपोर्ट ले रहा है। इसके अलावा गृह मंत्रालय के अधिकारी भी विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं। इजरायली दूतावास की कार में मैग्नेट बम के जरिए धमाका कराने के पीछे ईरान के आतंकी संगठन अमाद मुघनियाह का नाम आने पर दिल्ली पुलिस हैरत में है।

अब तब देश में जितनी भी आतंकी वारदातें हुई हैं, उसमें कभी इस संगठन का नाम नहीं आया। हालांकि पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आतंकी संगठन का मुख्य उद्देश्य इजरायली नागरिकों को नुकसान पहुंचाना था।

यह बात भी सामने आ रही है कि ईरान ने पाकिस्तानी आतंकियों के जरिए वारदात को अंजाम दिया होगा। जांच एजेंसियों की मानें तो वारदात में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन पर सबसे पहला शक है। इंडियन मुजाहिदीन के मोड्यूल का भी वारदात के लिए इस्तेमाल हो सकता है। मैग्नेट बम का उपयोग न केवल दिल्ली पुलिस बल्कि तमाम सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का कारण बन गया है, क्योंकि इस बम का उपयोग देश में पहली बार किया गया है। अभी तक इस तरह के बमों का उपयोग ईरान और कुछ अरब देशों में होता पाया गया है।

सूत्रों की मानें तो दिल्ली में हुए हमले में नाइट्रो ग्लिसरीन, सल्फर व पोटैशियम क्लोरेट का इस्तेमाल किया गया है। नाइट्रो ग्लिसरीन का उपयोग इसी तरह के विस्फोट कराने में किया जाता है। इसे पेट्रोल या डीजल आदि के पास चिपकाकर धमाका कराया जाता है। माना जा रहा है कि इससे रिमोट के जरिए ही विस्फोट कराया गया होगा।

इस मामले में सोमवार देर रात जांच एजेंसी ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। हालांकि पुलिस अधिकारी ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

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