
वैंकूवर। कम सामान, सफर आसान। भारतीय रेल का यह नारा बड़े काम का है। इसका अहसास फिलीपींस के एक परिवार को तब जरूर हुआ होगा, जब सामान के चक्कर में दो साल का बच्चा एयरपोर्ट पर ही रह गया और पूरा परिवार गंतव्य को उड़ गया।
हाल ही में फिलीपींस से कनाडा आकर बसा एक परिवार वापस अपने देश लौट रहा था। पूरा परिवार वैंकूवर से विनीपेग जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा। विनीपेग से ही उन्हें फिलीपींस जाने वाले विमान में सवार होना था। इस परिवार के पास सामान इतना ज्यादा था कि कर्मचारियों ने उन्हें विमान में सवार होने से रोक दिया। सामान कम करने के चक्कर में उनका काफी वक्त खराब हो गया। इस बीच विमान के उड़ान भरने का वक्त हो गया। आपाधापी में पूरा परिवार विमान में सवार होने के लिए भागा, लेकिन दो साल के बच्चे की याद किसी को नहीं आई। बच्चे के माता-पिता यह सोच कर विमान में सवार हो गए कि बेटा अपने दादा-दादी के साथ होगा। उधर, दादा-दादी भी यही सोच कर विमान की ओर भागे कि बच्चे को उसके माता-पिता अपने साथ ले ही गए होंगे। विमान में सभी अलग-अलग सीट पर बैठे। इसलिए बच्चे के बारे में तब भी दरियाफ्त नहीं हो सका। विमान उड़ गया और कुछ ही देर में पूरा परिवार विनीपेग में था।
इधर, वैंकूवर एयरपोर्ट के डिपार्चर लाउंज में बच्चा लावारिस पड़ा रहा। अधिकारियों की नजर बच्चे पर पड़ी तो उन्होंने उसके माता-पिता की तलाश शुरू की। पता चला कि उसके माता-पिता विनीपेग पहुंच चुके थे। वहां जहाज से उतरने के बाद परिवार को भी बच्चा गुम हो जाने का आभास हो गया था। तब बच्चे का पिता वापस आया और बेटे को ले गया। इस लापरवाही पर जहां सभी हैरान थे, वहीं एयर कनाडा ने दरियादिली दिखाई। विमान कंपनी ने न केवल बच्चे की उचित देखभाल की, बल्कि बच्चे को लेने आए उसके पिता को आने-जाने का मुफ्त टिकट भी दिया।