ह्यूस्टन पर चीटियों का कब्जा!

 
May 15, 05:26 pm

डलास। अमेरिका में ह्यूस्टन इलाके के लोग इन दिनों चींटियों के आतंक से परेशान हैं। ये चींटियां मालवाहक जहाजों में सवार होकर टेक्सास पहुंची हैं और अब पूरे इलाके में लोगों का जीना मुहाल कर रही हैं। इनकी वजह से बिजली कनेक्शन में शार्ट सर्किट हो रहा है और लोगों के कंप्यूटर तक खराब हो रहे हैं। ये सीवेज पंप स्टेशन की पाइप तक में छेद कर रही हैं।

   लालिमा लिए भूरे रंग की इन चीटियों को क्रेजी रैसबेरी आंट्स का नाम दिया गया है। इन्हें क्रेजी इसलिए कहा गया है, क्योंकि ये कतारबद्ध होकर चलने के बजाय बेतरतीब इधर-उधर घूमती रहती हैं। इनके नाम के साथ रैसबेरी इसलिए जुड़ गया है, क्योंकि टाम रैसबेरी नाम के शख्स ने शुरू में इन चीटिंयों से लोहा लेने की नाकाम कोशिश की थी। उन्होंने इनके सफाए का अभियान छेड़ा था।

   पियरलैंड के पेट्सी मारफिउ का कहना है कि ये चीटिंयां आकार में मक्खियों की तरह छोटी-मोटी हैं और हर तरफ दौड़ती नजर आती हैं। अपने घर को इन चीटिंयों से मुक्त रखने के लिए पेट्सी का ज्यादा वक्त झाड़ू लगाते ही बीतता है। पेट्सी के स्वीमिंग पूल पर भी चींटियों ने धावा बोल दिया है। पेट्सी पानी से इन्हें छान कर अलग करते रहते हैं। वह बताते हैं कि इनकी संख्या हजारों में है और ये तेज रफ्तार कार की तरह तेजी से यहां-वहां भागती रहती हैं।

   सबसे पहले इन चीटियों को टेक्सास में वर्ष 2002 में देखा गया था। इन्हें पहले पाराट्रेनिका स्पेसिज नियर पबेन्स के नाम से जाना जाता था। आज ये ह्यूस्टन की पांच प्रशासनिक ईकाइयों में फैल गई हैं। वैज्ञानिकों को यह बात नहीं मालूम है कि वास्तव में ये चीटिंयां कहां से आई, लेकिन इन्हीं से मिलती जुलती प्रजाति की चीटियां जिन्हें सामान्यतया क्रेजी आंट के नाम से जाना जाता है, दक्षिण पूर्व और वेस्ट इंडीज में पाई जाती हैं।

   टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी में कीट विज्ञानी रोजर गोल्ड कहते हैं कि वर्तमान स्थिति में इन चींटियों का सफाया लगभग असंभव है। इसका कारण इनका बहुत बड़े क्षेत्र में फैल जाना है। खुशी की बात यह है कि टेक्सास में गर्मियों में आतंक मचाने वाली लाल चीटिंयों को ये खा जाती हैं। ये पौधों के मीठे रस को भी चूस जाती हैं। ये लोगों को काटती भी हैं, लेकिन लाल चींटियों से कम आक्रामकता के साथ। इन चींटियों के खिलाफ प्रशासन और विशेषज्ञों की जंग जारी है। स्थानीय लोग जल्द से जल्द इस जंग में चींटियों की हार की दुआएं कर रहे हैं।




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