
बगहा [प.चंपारण, विभाकर श्रीवास्तव]। करीब दो सौ वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश देवरिया के नदौली गांव से आकर बगहा के डुमवलिया मोहल्ले में बसे मेरूनाथ तिवारी की नौवीं पीढ़ी आज भी एक ही छत के नीचे रह रही है।
मैट्रिक से पीएचडी तक की डिग्री हासिल किए व विदेश तक में फैले इस संयुक्त परिवार के 41 सदस्यों का खाना आज भी एक ही चूल्हे पर पकता है। पिछले पचीस वर्षो से दोनों समय का भोजन बना रहे खानसामा मधुसुदन शुक्ल के अनुसार नई पीढ़ी के लोगों के मांसाहारी हो जाने के कारण कुछ गैस के चूल्हे आ गए हैं, लेकिन वे बच्चों के स्कूल व पतियों के समय से दफ्तर भेजने के लिए केवल नाश्ते अथवा नानवेज डिश तक ही घर की महिलाओं के हाथों में सीमित हैं।
तीन भाइयों में ज्येष्ठ पंडित विश्वनाथ तिवारी के दिवंगत हो जाने के बाद आज भी पूरे परिवार पर सबसे वृद्ध पारसनाथ तिवारी का हुक्म चलता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इतने बड़े परिवार में एक-दूसरे को मात करने के लिए राजनीति का चौसर भी बिछता है, लेकिन घर में नहीं, बाहर।
भाजपा के राज्य परिषद सदस्य कैलाशनाथ तिवारी चुनावों के मौके पर एक मंच से बोलते हैं तो उन्हीं के अग्रज पारसनाथ तिवारी के पुत्र बेचू तिवारी लोजपा जिलाध्यक्ष होने के नाते दूसरे मंच से चाचा के दल के खिलाफ दहाड़ते हैं। पर, शाम में भोजन की मेज दोनों के लिए एक ही होती है।
राजनीति की एक तीसरी डोर हाल ही में घर के एक युवा सदस्य मणिकेश नाथ तिवारी ने थामी है। वे राकांपा के युवा सेल के जिलाध्यक्ष हैं। करीब दस वर्षो तक एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष रह चुके टुन्नू तिवारी फिलहाल सक्रिय राजनीति में जाने के बजाय घर का आउटलुक संवारने में लगे हैं। घर के सबसे वृद्ध सदस्य पारसनाथ तिवारी के पास बेहतर कृषि का बोझ है तो कैलाशनाथ तिवारी पर राजनीति के साथ सामाजिक सरोकार बनाए रखने का भार। घर में रह रहे वर्तमान दूसरी पीढ़ी के तीन सदस्य वकील हैं। द्विजेन्द्र नाथ तिवारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं। तीनों भाइयों ने अपने बड़े पिताजी पं. विश्वनाथ तिवारी की इच्छा के अनुरूप संपत्ति के रक्षार्थ वकालत की पढ़ाई की।
जीतेन्द्र नाथ तिवारी ने पीएचडी की डिग्री ली तो घर की एक बिटिया विदेश में काम कर रही है। छह बेसिक फोन, 30 मोबाइल, दर्जन भर रंगीन टेलीविजन, आधे दर्जन से अधिक फ्रीज-कूलर, चार लग्जरी गाडि़यों के कारण सुख-सुविधा से घर भरा दिखता है। बावजूद आज तक किसी ने अलग मकान की ख्वाहिश नहीं रखी। परिवार बढ़ता गया कमरों की संख्या भी उसी घर में बढ़ती गई। फिलहाल 3 एकड़ के विशाल ग्राउंड में सजा घर गोशाला से भी टैग है। 25 कमरों में 41 सदस्यों का परिवार इस भौतिकवादी युग में भी संयुक्त परिवार की मिसाल बना हुआ है।