नजरिया

2010 के प्रारंभ में यूरोपीय देशों में जिस आर्थिक संकट की शुरुआत हुई और जो दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है उसका सीधा असर अब भारत पर भी दिखने लगा है। भारत से पूंजी बाहर जा रही है। इसके चलते डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता जा रहा है। रिजर्व बैंक के...
प्रिय श्री एंटनी, मैं आमतौर पर आप जैसे प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं को खुला पत्र नहीं लिखता हूं। इस अपवाद को अनुमति प्रदान करें। बहुत जल्द खुशी का मौका आने वाला है। 10 जुलाई, 2012 को सबसे लंबे समय तक रक्षामंत्री बने रहने का रिकॉर्ड आपके नाम...
जीवन का क्या उद्देश्य है, जीवन का लक्ष्य क्या है यह रहस्य का विषय है। बहुत से लोगों के भिन्न-भिन्न विचार हैं, मत-मतांतर हैं। मानव अपने जीवन में सोचता रहता है कि वस्तुत: कौन सा मार्ग उत्तम है, लेकिन निर्णय नहीं कर पाता। उसे समझना होगा, जगत में...
सरकार: आम जनता के हितों को सुरक्षित रखने वाली और अपनी नीतियों से जन कल्याण को सुनिश्चित करने वाली संस्था। प्रधानमंत्री, इस संस्था का मुखिया। मई, 2009 में जब अवाम ने अपने खैरख्वाह के रूप में कांग्रेस को लगातार दूसरी बार बहुमत के करीब पहुंचाया और...
केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन [संप्रग] सरकार के लिए बीते साल का समय बेहद कठिन दौर से गुजरा। यानी, संप्रग के पहले चरण की सरकार की तरह यह समय नहीं रहा। आर्थिक मोर्चे पर आई मंदी ने झकझोर दिया है। इस दौर में आयात और निर्यात के बढ़ते अंतर से...
यूपीए-1 की उपलब्धियां इसलिए संतोषजनक कही जा सकती हैं, कि यूपीए-2 का गठन अधिक समर्थन के साथ हुआ। हालांकि साल बीतते बीतते सरकार के ग्राफ में गिरावट शुरू हो गई। तीन वर्षो के कार्यो के सिंहावलोकन के पश्चात यह देखा गया कि यूपीए-1 गठबंधन में न्यूनतम...
संप्रग अपने पहले अवतार में जनता के साथ तालमेल कायम कर पाई थी। लोगों का उसमें विश्वास भी मजबूत हुआ था। जो एजेंडा संप्रग सरकार लेकर चली उसका लोगों ने स्वागत किया। अपने दूसरे अवतार में इस सरकार ने धीरे-धीरे लोगों का विश्वास कमजोर किया। ...
महंगाई की मार से सबकी कमर टूट रही है। संप्रग सरकार अपने पहले कार्यकाल से लेकर दूसरे कार्यकाल के पहले तीन साल तक आम जनता को महंगाई से निजात नहीं दिला सकी। मई, 2004 में सामान्य महंगाई दर औसतन 4-4.5 प्रतिशत थी। दूसरे कार्यकाल के साल यानी 2009 में...
यह सोचकर दुखी मत हो कि मुझे वह पद नहीं मिला, वह कुर्सी नहीं मिली, वह सत्ता नहीं मिली, वह बागडोर नहीं मिली वे शक्तियां नहीं मिलीं, अधिकार नहीं मिले, वह बल, बुद्धि व विवेक नहीं मिला, वह साम‌र्थ्य नहीं मिली, धन-संपत्ति, जायदाद व वैभव नहीं मिले। मैं...
संयुक्त राष्ट्र में पेश भारत के उस प्रस्ताव को वापस लेने की सख्त जरूरत है, जिसमें इंटरनेट पर सरकारी नियंत्रण कायम करने की बात कही गई है। इसके लिए इंटरनेट संबंधी नीतियों की संयुक्त राष्ट्र समिति में 50 सदस्यीय सरकारी/नौकरशाही निकाय के माध्यम से...
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