'जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाहिं। सब अंधियारा मिट गया जब दीपक देख्या माहिं॥' कबीरदास जी ने स्पष्ट कह दिया कि यह अहंकार भी एक विकार है जिससे मुक्त हुए बिना मनुष्य श्रेष्ठ नहीं हो सकता। ज्ञान सदैव जिज्ञासु को मिलता है और प्रमाद...
अच्छा हुआ कि राज ठाकरे के दल महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के विधायकों ने विधानसभा में अपने आचरण के लिए नए स्पीकर दिलीप वलसे पाटिल से माफी मांग ली। यही नहीं उन्होंने अपने चार साल के निलंबन के आदेश पर पुनर्विचार के लिए अध्यक्ष से कहा। राज ठाकरे को भी...
अफगानिस्तान को इस अर्थ में एक अभिशप्त देश ही कहा जाएगा कि उसकी धरती विदेशी और देशी शक्तियों के तरह-तरह के शक्ति-परीक्षणों का अखाड़ा बनी हुई है। न वहां शांति और सुरक्षा है, न आर्थिक एवं सामाजिक विकास हो रहा है और न ही सही अथरें में लोकतंत्र है,...
कुछ दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों ने 60 के दशक में आसियान नाम से अलग गुट बनाया था। उस समय भारत को भी इसमें आमंत्रित किया गया था, परंतु गुटनिरपेक्ष विदेश नीति के कारण भारत ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया था। सोवियत संघ के पतन के बाद शीतयुद्ध की...
शरीर के विभिन्न अंगों में आत्मा या चेतना समरस भाव में रम रही है जैसे विविध वाद्ययंत्रों की विशिष्ट स्वरलहरियों में 'एकतान संगीत'। वह किसी भी अंग का पक्षपाती नहीं है। एक ही आत्मा विविध अंगों में भिन्न-भिन्न रूपों में अभिव्यक्त हो रही है।...
स्वतंत्रता के बाद भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता अनेक चरणों से गुजरी है। स्वतंत्रता के लंबे संघर्ष ने बड़ी संख्या में देशभक्त भारतीयों को देश को ब्रिटिश शासन के पंजे से मुक्त कराने के लिए प्रोत्साहित किया। राजनीतिक स्वतंत्रता के संघर्ष की विरासत ने...
ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। थप्पड़ महाराष्ट्र विधानसभा के एक सदस्य के गाल पर पड़ा, लेकिन चोट से समूचे राष्ट्र का सिर झन्ना गया है। तमाचा संविधान पर था, राष्ट्रभाषा पर था, सदन की मर्यादा पर था और भारतीय संस्कृति की जुबान हिंदी पर था। सो पूरा राष्ट्र...
देवबंद के दारुल उलूम द्वारा वंदेमातरम के खिलाफ दिए गए फतवे के समर्थन में जमायते उलेमा-ए-हिंद द्वारा प्रस्ताव पारित करने से एक बार फिर यह पता चलता है कि कैसे कुछ लोग भारत की पंथनिरपेक्षता के ताने-बाने को तार-तार कर डालना चाहते हैं। वे ऐसे मुद्दे...
एक शिष्य का गुरु परिश्रम और पवित्र कर्मो से कमाई हुई एक बड़ी संपति का मालिक है। अगर उस शिष्य का संबंध अपने गुरु से ठीक है तो क्या उसे कभी आवश्यक वस्तुओं की अथवा धन-धान्य स्नेह प्रेम पाने की चिंता हो सकती है? अपने गुरु की समस्त अर्जित धन-राशि अथवा...