उपद्रव की एक और कोशिश

 
May 16, 11:13 pm

देश को जयपुर की आतंकी घटना से एक नया सबक मिला है कि दुश्मन कितना भी हमारे धैर्य और हिम्मत की परीक्षा ले, हमें उसके इरादों को नाकाम करके दिखाना है। दुनिया जानती है कि जयपुर में बम विस्फोट की घटनाओं में हिंदू और मुसलमान, दोनों ही मारे गए है। जिसने भी बम लगाए उसको अच्छी तरह पता था कि इन बाजारों में भारी संख्या में मुसलमानों की दुकानें है और मुसलमान रहते है। इसका मतलब साफ है कि बम लगाने वालों को हिंदू और मुस्लिम, दोनों से कोई सहानुभूति नहीं थी। वही हुआ, दोनों समुदाय के लोग मारे गए। अभी तक जो संकेत मिल रहे है उनसे यही अंदाज लगता है कि सभी आतंकी घटनाओं के पीछे एक ही मकसद था। आतंकियों ने देखा कि हिंदुओं को मारने से भारत में हिंदू-मुस्लिम दंगा नहीं भड़क रहा है तो अब हिंदू और मुसलमान, दोनों को मारो तो शायद उससे हिंदू-मुस्लिम दंगा भड़क जाए, क्योंकि जब तक ये दोनों समुदाय आपस में लड़ेंगे नहीं तब तक भारत को अस्थिर करने का उनका मकसद पूरा नहीं होगा। जब तक भारत अशांत नहीं होगा तब तक पाकिस्तान में बैठे कट्टरपंथियों के मंसूबे पूरे नहीं होंगे।

पाकिस्तान में बैठे कट्टरपंथी अब पाकिस्तानी सरकार के वश के भी नहीं रह गए है। आए दिन पाकिस्तान में ये लोग बम धमाके करके सैकड़ों लोगों को मार रहे हैं। आज इन कट्टरपंथियों के हाथों जितने लोग पाकिस्तान में मर रहे है उतने शायद दूसरे देशों में नहीं। पाकिस्तान में ये कट्टरपंथी हर हफ्ते एक धमाका करते है और मासूमों की जान ले लेते है। ताज्जाुब यह है कि ये अपने को इस्लामी संगठन बताते है और उनका मानना है कि पाकिस्तान की सरकार इस्लाम के खिलाफ काम कर रही है। उन्हे मुशर्रफ से भारी नफरत है। जिस आईएसआई ने इन कट्टरपंथियों को बनाया, बढ़ाया और हौसला दिया, आज ये उसी आईएसआई के अफसरों को मार रहे है। एक मायने में आईएसआई का सही इलाज हो रहा है। आए दिन पेशावर, वजीरिस्तान और स्वात के आसपास आईएसआई की गाड़ियों पर जमकर हमले होते है और उसके बाद आईएसआई के बड़े लोग अपने साथियों की मौत पर अफसोस जताते हुए मिलते है। इन लोगों को यह अंदाजा नहीं था वे लोग जो बो रहे हैं, एक दिन वही उन्हें काटना पड़ेगा। उन्होंने कट्टरपंथी बनाए और वही कट्टरपंथी आज उनके सिर पर सवार हो गए। इन्हीं तमाम कट्टरपंथियों के अलग-अलग संगठन भारत में भी हमलावर रहते है। यहां यदि वे दस हमलों की योजना बनाते है तो दो में सफल हो पाते है और आठ में इसलिए चूक जाते है, क्योंकि भारतीय पुलिस और खुफिया विभाग बीच-बीच में इन्हे पकड़कर इनके मंसूबों को असफल कर देता है। पाकिस्तान में खुफिया विभाग अभी इतना काबिल नहीं है इसलिए वहां दस योजनाओं में सात में उन्हे सफलता मिल जाती है।

जयपुर के पहले राजस्थान में अजमेर शरीफ में भी इसी तरह का बम विस्फोट हो चुका है और उसमें कई लोगों की जानें गई थीं। इसके पहले महाराष्ट्र के मालेगांव में एक मस्जिद में धमाका हुआ था और वहां नमाज अता करने आए करीब सौ लोग मारे गए थे। अजमेर शरीफ की घटना के बाद केंद्र सरकार के खुफिया विभाग ने राजस्थान सरकार को सूचना दी थी कि बम विस्फोटों की और घटनाएं हो सकती हैं, इसलिए उन्हे सतर्क रहना चाहिए। राजस्थान पुलिस ने इसे चलताऊ सूचना मानकर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और उसका नतीजा है कि जयपुर में इतनी बड़ी घटना ने अंजाम ले लिया। मैं एक सुझाव स्पष्ट रूप से देना चाहता हूं कि देश के सारे मुख्यमंत्रियों को बैठकर अपने राज्यों में खुफिया विभाग को मजबूत करना चाहिए।

केंद्र सरकार का खुफिया विभाग जितना मजबूत है, राज्य सरकारों के खुफिया तंत्र उतने ही कमजोर है। यदि राज्यों में कोई पुलिस अधिकारी वहां खुफिया विभाग का महानिदेशक बना दिया जाता है तो इसे वह अपनी कमजोर पोस्टिंग मानता है और अपमानित महसूस करता है। उसे तो पुलिस महानिदेशक बनना होता है। केंद्र में अगर कोई खुफिया विभाग का निदेशक बनता है तो उसे बहुत बड़ा पद माना जाता है। राज्यों में खुफिया विभागों में व्यवस्था भी बहुत खराब रहती है। न तो अच्छे दफ्तर है, न ही अच्छे उपकरण है और न ही व्यवस्थाएं। वहां लोग कुछ वक्त के लिए तैनात होते हैं और उसके बाद तबादले हो जाते है इसलिए इस काम में वे विशेषज्ञ नहीं बन पाते है। केंद्रीय खुफिया विभाग में बीसों साल से लोग काम कर रहे है और उन्हे तरह-तरह की विशेषज्ञता हासिल है। राज्य सरकार भी खुफिया विभागों पर बहुत कम पैसा खर्च करती है। यदि खुफिया विभाग मजबूत हो तो घटना के पहले ही उन्हे षड्यंत्र का पता चल जाता है। थाने की पुलिस तो तब कार्रवाई करती है जब घटना हो जाती है। उसका काम तफ्तीश करना और मुलजिम को पकड़ना होता है। जब जयपुर जैसे हादसे होते है तो कोई आतंकवादी चेहरा सामने नहीं आता। ऐसे मामले में शक की सुई पाकिस्तान की तरफ जाती है।

हालांकि पाकिस्तान लगातार कहता रहता है कि विस्फोट हमने नहीं कराया है। हम खुद ही आतंकवाद से परेशान है, हमारे राष्ट्रपतिपर तीन बार जानलेवा हमले हो चुके है। कराची में रोज बम फट रहे है और सैकड़ों लोग मारे जा रहे है। ब्लूचिस्तान में अलग हिंसा हो रही है और लोग इन सबके पीछे भारत का नाम लेते है। पाकिस्तान ये दलीलें चीख-चीख कर दे रहा है, लेकिन भारत के पास जो सबूत आ रहे है उनमें पाकिस्तानियों का हाथ ज्यादा नजर आता है। पाकिस्तान में सरकार की एक नीति होती है और खुफिया एजेंसी आईएसआई की अलग नीति होती है। आईएसआई अपना काम सरकार की परवाह किए बगैर करती है। भारत में हिंसा फैलाने में आईएसआई और उसकी मदद से चल रहे संगठनों की बड़ी भूमिका होती है। जब तक मुशर्रफ और पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री मिलकर आईएसआई पर लगाम नहीं लगाएंगे तब तक इस समस्या का हल निकलना बहुत मुश्किल होगा। जयपुर की घटना की भी जांच अभी चल रही है और लगता है कि एक बार सच सामने आने के बाद सीमा पार के लोगों का चेहरा बेनकाब होगा। जयपुर की घटना में एक नई बात यह सामने आई है कि बांग्लादेश से कुछ संगठन इस तरह की गतिविधियां चला रहे है।

चूंकि बांग्लादेश में बेहद गरीबी है इसलिए पाकिस्तान के कुछ कट्टरपंथी संगठनों ने वहां अपनी जडं़े मजबूत कर ली है और वहां के नौजवानों को अपना औजार बनाकर इस्तेमाल कर रहे है। बांग्लादेश के रास्ते से भारत के अंदर घुसना भी आसान है। बांग्लादेश सरकार और वहां की सुरक्षा एजेसियां उतनी कारगर नहीं कि वे किसी किस्म का कोई अभियान उनके खिलाफ चला सकें। इसलिए भारत सरकार तथा पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम सरकार को घुसपैठियों पर कड़ी नजर रखनी होगी। पाकिस्तान के साथ अपनी सीमा को हमने बहुत कुछ सील कर दिया है और तार लगा रखे है, लेकिन भौगोलिक स्थितियां विपरीत होने की वजह से हम बांग्लादेश सीमा पर कुछ भी करने में असफल हो रहे है। जयपुर में बम विस्फोट के बाद केंद्रीय स्तर पर भी एक आतंकवाद विरोधी एजेंसी का गठन किया जाना चाहिए, जिसका काम विश्व के अन्य देशों के साथ तालमेल करके कट्टरपंथी संगठनों और आतंकवादियों की जानकारी रखना तथा उनसे निपटना होना चाहिए।

[जयपुर की घटना को हिंदू-मुस्लिम में तनाव पैदा करने की कोशिश मान रहे हैं राजीव शुक्ला]




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