
पिछले पांच साल लालू प्रसाद के रेल बजट की काफी तारीफ हुई और जब इस बार नई रेल मंत्री ममता बनर्जी के बजट पेश करने की बारी थी तो संसद में ज्यादातर लोग यह कह रहे थे कि वह लालू प्रसाद की बराबरी नहीं कर पाएंगी और उनका बजट सिर्फ बंगाल के गरीब लोगों तक ही सिमटा रह जाएगा। शुक्रवार को पेश किए गए बजट में एक तरह से ममता बनर्जी ने लालू प्रसाद को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने किराए नहीं बढ़ाए, बल्कि तमाम ऐसी सुविधाएं और नए प्रयोग किए हैं जो अभी तक रेल विभाग में नहीं किए गए थे। ममता बनर्जी के बजट में न केवल गरीबों का, बल्कि मध्यम वर्ग और उच्च वर्ग का भी बराबर ख्याल रखा गया है। अब जिम्मेदारी आती है रेल विभाग के अफसरों की कि वे इसको अच्छी तरह व मेहनत के साथ लागू करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि आम तौर पर यह देखने में आता है कि मंत्री नीति बना देता है अथवा फैसले ले लेता है और उसके लिए पैसे का प्रावधान भी कर दिया जाता है, लेकिन प्रशासनिक तंत्र इन निर्णयों का सही तरह क्रियान्वयन नहीं कर पाता है।
ममता बनर्जी के रेल बजट में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने रेल यात्रियों की सुविधाओं का बहुत ख्याल रखा है। यह काम शायद वही रेल मंत्री कर सकता है जो आम दर्र्जे में ट्रेन में सफर करता हो। ममता बनर्जी खुद द्वितीय श्रेणी में बहुत यात्रा कर चुकी हैं और अभी भी करती हैं। उन्होंने रेल किराये के साथ रेल भाड़े को भी नहीं बढ़ाया, जिससे आम जरूरत की कीमतों में बढ़ोतरी का मौका व्यापारियों को नहीं मिलेगा। इसका परिणाम यह होगा कि आम जनता को महंगाई नहीं झेलनी पड़ेगी। रेलवे में सबसे बड़ी समस्या होती थी कि लंबी दूरी की ट्रेन में यदि कोई बीमार हो गया तो वह इलाज के लिए तड़पता रहता है। अब इलाज की सुविधाओं के साथ-साथ एक डाक्टर हर ऐसी ट्रेन में होगा। सांसदों से यह कहा गया है कि वे जहां चाहे अपने चुनाव क्षेत्र में एक टिकट बुकिंग सेंटर खुलवा सकते हैं। यह अच्छी बात है। अभी तक रेल विभाग के अफसर मनमानी ढंग से बिना जरूरत के टिकट बुकिंग सेंटर खुलवा देते थे। अब उन्हें इसके लिए सांसद की सलाह पर ध्यान देना होगा। रेल बजट में घोषणा की गई है कि 800 नए बुकिंग सेंटर नए खोले जाएंगे। ममता बनर्जी ने तय भी किया है कि अब देश के पांच हजार डाकघरों में रेलवे टिकट बेचने का काम किया जाएगा ताकि लोगों को टिकट खरीदने के लिए स्टेशन न जाना पड़े। यह बिल्कुल सही फैसला है, क्योंकि सभी लोग यह जानते हैं कि टेलीफोन और मोबाइल फोन की दरें सस्ती हो जाने के कारण अब न शहरों में और न ही गांवों में लोग डाक के जरिए चिट्ठी भेजते है। इसके कारण ज्यादातर डाकघरों में कर्मचारियों के पास ज्यादा काम नहीं रह गया है। नए बजट में एक और महत्वपूर्ण फैसला एक स्थान से दूसरे स्थान की सीधी ट्रेन का है, जो कहीं भी नहीं रुकेगी। इससे हवाई जहाज में चलने वाले तमाम यात्री ऐसी ट्रेनों में चलना शुरू कर देंगे। इसका असर सस्ती विमान सेवा वाली कंपनियों पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए मुंबई से दिल्ली सीधी ट्रेन बिना कहीं रुके चलेगी। इसमें वातानुकूलित डिब्बे होंगे। इसी तरह अन्य स्थानों से भी ट्रेनें चलाई जाएंगी। रेल बजट में सबसे बड़ा फायदा छात्रों को दिया गया है। उन्हे तकरीबन 60 प्रतिशत किराए की छूट मिलेगी। छात्र अक्सर अपनी पढ़ाई-लिखाई, इंटरव्यू आदि के लिए भटकते है। घरवाले पैसा नहीं दे पाते है। ऐसे छात्रों को केंद्र सरकार का यह नया तोहफा होगा।
ममता बनर्जी के बजट में एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा अंतरराष्ट्रीय स्तर के रेलवे स्टेशन बनाने की है। यह बात सुनकर मुझे काफी ताज्जाुब हुआ। वह तो शायद ही विदेश जाती है। लगता है कि उन्हें विदेश के सुंदर रेलवे स्टेशनों के बारे में किसी ने बताया होगा। सचमुच आज भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डों के साथ रेलवे के स्टेशनों की जरूरत है। यह काम बहुत सराहनीय होगा। आज हमारे रेलवे स्टेशन बेहद बुरे हाल में है। बढ़ती भीड़ के कारण रेलवे स्टेशन मछली बाजार जैसे नजर आते है। यदि रेलवे स्टेशनों को विदेश की तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया गया तो इससे न केवल देश की छवि अच्छी होगी, बल्कि विदेशी पर्यटक भारी संख्या में ट्रेन से चलना शुरू कर देंगे। अंग्रेजों ने अपने जमाने में अच्छे और सुंदर रेलवे स्टेशन बनाए थे। इसके बाद हमने इस दिशा में कोई काम नहीं किया और जो थे उन्हें भी खराब कर दिया। अब पचास रेलवे स्टेशनों के कायाकल्प की तैयारी है।
रेलवे में सुरक्षा भी बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है। आए दिन न केवल लूटपाट, चोरी की घटनाएं होती हैं, बल्कि ऐसे गिरोह चलते है जो नशीली वस्तुएं खिलाकर लोगों को लूट लेते है। एयरकंडीशन्ड फर्स्ट क्लास तक में लोगों की हत्याएं हो चुकी है। अच्छी बात यह है कि रेल मंत्री ने अब न केवल कमांडो तैनात करने की घोषणा की है, बल्कि महिलाओं को विशेष रूप से सुरक्षा देने के लिए महिला कमांडो भी तैनात होंगी। पत्रकारों को 50 प्रतिशत की छूट किराए में दी जाएगी। शायद यह एक बड़ा फैसला पत्रकारों की सेवाओं को देखते हुए किया गया है। आजकल पत्रकारिता के लिए बहुत यात्रा करनी पड़ती है और विमान सेवा बहुत महंगी है। खबरों की बेहतरी के लिए यह कदम अच्छा रहेगा। इसी तरह महिलाओं के लिए विशेष ट्रेनें भी अपने आप में एक अनोखा कदम है। वैसे भी सरकार में महिलाओं का बोलबाला है तो महिलाओं के लिए नई सुविधाओं की घोषणा कोई ताज्जुब की बात नहीं है। एक और उत्साहजनक बात यह है कि रेल मंत्री ने खाने की गुणवत्ता और सफाई पर विशेष ध्यान देने की घोषणा की है। खाना और सफाई रेलवे विभाग की सबसे बड़ी समस्या रही है। यदि इस दिशा में कुछ ठोस हो सके तो इससे बेहतर कुछ और नहीं हो सकता। आखिर रेल यात्रियों को ऐसी ही सुविधाएं चाहिए। यह ठीक है कि खाना और सफाई के मामले में थोड़ा-बहुत सुधार हुआ है, लेकिन ये तो ऐसी जरूरते हैं जिनमें व्यापक सुधार की जरूरत है। रेल मंत्री ने इसके लिए एक नई योजना का ऐलान किया है। ट्रेन के अंदर और प्लेटफार्म पर मिलने वाला खाना भी अच्छा होना चाहिए। अभी प्लेटफार्म का खाना बहुत खराब है, ठेकेदार बहुत गड़बड़ियां करते है।
रेलवे की जमीनों का भी सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। रेलवे के पास लाखों-करोड़ रुपये की जमीनें पड़ी हैं, जिन पर अवैध कब्जे हो रहे है। पिछली बार कुछ जमीनों को कृषि विभाग को दिया गया था। उसमें भी तमाम तरह के विवाद पैदा हो गए। रेलवे विभाग ने इन जमीनों के सही उपयोग के लिए योजना बनाने का निर्णय लिया है। यह तलवार की धार पर चलने के समान होगा। ममता बनर्जी को एक-एक परियोजना के लिए संभलकर जमीन देनी होगी ताकि कोई घोटाला न हो पाए। रेलवे की जमीन खाली पड़ी नहीं होनी चाहिए। उसे हर हाल में उपयोग में लाकर रेलवे को लाखों-करोड़ों रुपया कमाना चाहिए। रेल मंत्री ने नए वैगन खरीदने का भी निर्णय लिया है। ऐसे वैगन गहरी माप वाले होने चाहिए ताकि वे ज्यादा माल ढो सकें।
[राजीव शुक्ला: लेखक कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य हैं]