पड़ोसी देशों की तुलना में भारत की वायु सैन्य शक्ति पिछड़ रही है। भारत में वायुसेना की शक्ति करीब 29 स्क्वाड्रन है, जबकि पड़ोसी देशों से मिल रही चुनौतियों के मद्देनजर वायु सेना के पास 60 स्क्वाड्रन लड़ाकू विमान होने चाहिए। फिलहाल यदि भारत के बेड़े में 45 स्क्वाड्रन हो जाएं तो स्थिति संतोषजनक हो सकती है। भारतीय वायु सेना पिछले लगभग पांच वर्षो से 126 मध्यम बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की मांग कर रही है, लेकिन अभी तक उसकी यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। इस वर्ष मार्च माह 70 मिग-23 लड़ाकू विमानों की विदाई की गई है। अब मिग-21 विमानों की विदाई की जानी है।
चीन भारत का दुश्मन नंबर एक अभी भी बना हुआ है और भारतीय सीमा पर उसकी घुसपैठ जारी है। उसके पास जे-6, जे-7, जे-10 व जेएफ-17 जैसे अत्याधुनिक व घातक लड़ाकू विमान है। पाकिस्तान भी अपनी ताकत बढ़ाने में लगा है। उसने अमेरिका व चीन से हथियार लेकर अपनी ताकत बढ़ा ली है। अब वह सैन्य संतुलन में भारत के बराबर आने वाला है, जबकि एक समय यह था कि भारत-पाकिस्तान पर दो गुना भारी था। पाकिस्तान ने अमेरिका से एफ-16 लड़ाकू विमान खरीदे तो चीन से जिया लड़ाकू विमान ले चुका है। वह चीन से आठ जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमान भी हासिल कर चुका है। अब पाकिस्तान चीन के सहयोग से थंडर विमानों का उत्पादन अपने ही देश में इसी वर्ष से प्रारंभ कर दिया है और वर्ष के अंत तक जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमानों का एक बेड़ा तैयार कर लेगा। पाकिस्तान ने ऐसे 42 विमान बनाने का समझौता इसी वर्ष मार्च में चीन के साथ किया था। इस परियोजना में उसके अरब रुपए खर्च हो रहे है। थंडर विमानों का अड्डा पेशावर में होगा।
भारत ने अगस्त 2007 में 126 मध्यम बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं, लेकिन यह खरीद प्रक्रिया इतनी धीमी है कि दो साल बाद अब छह वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की विमान परीक्षण उड़ाने शुरू होंगी। 10 अरब डालर के सौदे के लिए भारत में पहले चरण की उड़ान परीक्षणों में अमेरिका के बड़े बोइंग युद्धक विमान एफ-18 सुपर हार्नेट का नंबर है। दूसरे नंबर पर अमेरिका की लाक हीड मार्टिन के एफ-16 आई विमान होंगे। तदुपरांत अन्य प्रतिस्पर्धियों के क्रम में फ्रांस के डी असाल्ट्स के राफेल विमान, स्वीडन के स्विस साब्स ग्रिपेन विमान, यूरोपियन कंसोर्टियम ईड्स के यूरोफाइटर व रूस के मिग-35 लड़ाकू विमानों की परीक्षण उड़ाने होंगी। सभी परीक्षणों में खरा उतरने के बाद भारतीय जरूरतों के हिसाब से विमान का चयन व सौदा किया जाएगा। चीन से लगती सीमा पर चीनी दबाव को देखते हुए भारत ने 18 सितंबर, 2009 को लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा से 23 किलोमीटर तथा नियंत्रण रेखा से मात्र आठ किलोमीटर की दूरी पर सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नियोमा हवाई पट्टी खोल दी है। यह समुद्रतल से 13,300 मीटर ऊंची है। यह पट्टी लेह जिले में है और मनाली व लेह से सड़क मार्ग से जुड़ी है। सुरक्षा तैनाती के हिसाब से यह केंद्र में है।
लद्दाख क्षेत्र में वायु सेना ने हाल ही में यह तीसरी हवाई पट्टी खोली है। इससे पहले समुद्रतल से 16,200 फीट की ऊंचाई पर स्थिति दौलत बेग ओल्दी हवाई पट्टी को 44 साल बाद गत गत वर्ष 31 मई को चालू किया गया था। इसी तरह मध्य लद्दाख के फुकचे में भी हवाई पट्टी को नवंबर 2008 में प्रारंभ कर दिया गया। अब ये तीनों हवाई पट्िटयां एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के रूप में होंगी, जिससे आपूर्ति व्यवस्था में मदद मिलेगी। अरुणाचल प्रदेश में वायु सेना के आठ एडवांस लैंडिंग ग्राउंड है, जिन्हे वायु सेना अस्थाई तौर इस्तेमाल कर सकती है। इसके अलावा असम के तेजपुर स्थित सीमा के निकट बने वायु सैनिक अड्डे को सुखोई-30 एम के आई विमानों के एक बेड़े से सुसज्जिात किया जा रहा है। यहां अक्टूबर तक पूरा एक बेड़ा तैनात कर दिया जाएगा। विदित हो कि सुखोई की मारक क्षमता 1500 किलोमीटर है तथा यह हवा में ही ईधन भरने में सक्षम है। हाल में संपन्न शीर्ष सुरक्षा सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि अंडमान निकोबार की ट्राई सर्विस कमान के निकोबार एयरफोर्स स्टेशन में सुखोई-30 लड़ाकू विमानों की तैनाती की जाए। लद्दाख, अरुणाचल व निकोबार में तैनाती के लिए भारी संख्या में ऐसे विमान चाहिए। इस समय वायु सेना के पास 98 सुखोई विमान हैं। रक्षा सूत्रों के मुताबिक 50 सुखोई सीधे रूस से लेने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय के पास भेजा गया है। रक्षामंत्री एके एंटनी के अनुसार 2015 तक सुखोई विमानों की संख्या 230 किए जाने की योजना है। इसके अतिरिक्त 22 लड़ाकू हेलीकाप्टरों की खरीद के लिए जुलाई 2009 में निविदाएं जारी की जा चुकी हैं। वायु सेना 15 माल वाहक हेलीकाप्टर, 70 एमआई हेलीकाप्टर, 35 धु्रव हेलीकाप्टर तथा 140 तेजस लड़ाकू विमान अपने बेड़े में चाहती है, जिससे उसकी तैयारियां मजबूत हो सकें।
[डा. लक्ष्मी शंकर यादव : लेखक सैन्य विज्ञान के प्राध्यापक है]