
नई दिल्ली। सिर्फ एक मैच के अनुभव के साथ पहले ट्वेंटी 20 विश्व कप में उतरी भारतीय टीम का इस प्रतियोगिता का खिताब जीतने तक का सफर किसी परीकथा से कम नहीं है। खास बात यह कि इस सफर को अंजाम तक पहुंचाने में युवा खिलाडियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
क्रिकेट के इस सबसे छोटे प्रारुप के विश्व युद्ध में भारत सिर्फ एक या दो खिलाडि़यों पर ही निर्भर नहीं रहा बल्कि टीम एक इकाई की तरह खेली और हर मैच में उसे एक नया नायक मिला जिसने जरुरत पड़ने टीम की कमान संभालते हुए उसे संकट से उबारा। युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग, आर पी सिंह, एस श्रीसंत, कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, रोबिन उथप्पा, रोहित शर्मा टूर्नामेंट के दौरान टीम के लिए संकटमोचन साबित हुए। गु्रप डी में स्काटलैंड के खिलाफ पहला मैच बारिश की भेंट चढ़ने के बाद भारत के लगभग सभी मैच करो या मरो वाले रहे। सुपर आठ चरण में पहुंचने के लिए उसे पाकिस्तान को हराना था। वह हालांकि कम अंतर से हारने पर भी बेहतर नेट रन गति के आधार पर सुपर आठ में पहुंचता। भारत इस रोमांच की पराकाष्ठा पर पहुंचे मैच को टाई होने के बाद बाल आउट में 3.0 से जीतने में सफल रहा।
सुपर आठ के पहले मैच में उसे न्यूजीलैंड के हाथों 10 रन से शिकस्त का सामना करना पड़ा और एक बार फिर उसके सामने इंग्लैंड और मेजबान दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने दोनों मैच जीतने की चुनौती थी। इंग्लैंड के खिलाफ मैच में भारत की जीत के नायक युवराज सिंह रहे जिन्होंने तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्राड के एक ओवर में छह छक्कों की मदद से 12 गेंद में 50 रन पूरे किए जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक है। गेंदबाजों ने भी इसके बाद अंतिम ओवरों में सटीक और सधी गेंदबाजी कर भारत को 18 रन से जीत दिलाई।
भारत को सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए इसके बाद मेजबान दक्षिण अफ्रीका के रूप में बड़ी चुनौती का सामना करना था। मेहमान टीम को मैच शुरू होने से पहले ही उस समय झटका लगा जब पिछले मैच के हीरो युवराज चोट के कारण मैच से बाहर हो गए। मेजबान टीम ने चार गेंद में तीन बल्लेबाजों को आउट कर भारत को शुरुआत के ही परेशानी में डाला दिया लेकिन टीम को इस बार युवा बल्लेबाज रोहित शर्मा ने 40 गेंदों में नाबाद 50 रन की पारी खेलकर 153 रन के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचा। भारतीय गेंदबाजों ने इसके बाद आर पी सिंह की अगुआई में शानदार गेंदबाजी करके न सिर्फ अंतिम चार में जगह बनाई बल्कि दक्षिण अफ्रीका को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता भी दिखाया।
सेमीफाइनल में क्रिकेट विशेषज्ञों ने भारत को कमतर आंकते हुए विश्व चैम्पियन आस्ट्रेलिया को जीत का प्रबल दावेदार बताया। टीम इंडिया ने हालांकि सबको करारा जवाब देते हुए आस्ट्रेलिया को 15 रन से हराकर टूर्नामेंट से विदा किया और फाइनल में जगह बनाई। सेमीफाइनल में भारत के लिए युवराज ने एक बार फिर पांच चौकों और पांच छक्कों की मदद से 30 गेंद में 70 रन की आतिशी पारी खेली। गेंदबाजी में इस बार श्रीसंत ने जलवा दिखाया जिन्होंने चार ओवर में 12 रन देकर आस्ट्रेलिया के दोनों सलामी बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। फाइनल में एशिया के इन दो क्रिकेट शेरों के बीच हुए मुकाबले में भारत ने अपने पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी को पांच रन से हरा पहला ट्वेंटी 20 विश्व कप अपने नाम कर लिया।