
कोलकाता। पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने सौरव गांगुली को मंगलवार को उनके 36वें जन्मदिन पर बधाई दी। राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने मंगलवार को ही टेस्ट के लिए राष्ट्रीय टीम का चयन किया लेकिन गांगुली को चैंपियंस ट्राफी के संभावितों में भी शामिल नहीं किया।
गांगुली से पहले अजहर भारत के सबसे सफल कप्तान थे। उन्होंने बताया कि गांगुली को बल्लेबाजी करते हुए देखना अच्छा लगता है। उन्हें सिर्फ अच्छा बल्लेबाज कहना एक छोटी बात है। गांगुली उन क्रिकेटरों में से एक है जो नैसर्गिक स्ट्रोक खेलने की क्षमता रखते है। मैं गांगुली के जन्मदिन पर उन्हें बधाई देता हूं। जब से गांगुली ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वनडे में आगाज किया था तब से अजहर उन्हें बल्लेबाज के रूप में निखरते हुए देख रहे है।
गांगुली ने 1992 में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन और फिर 1996 में पहला टेस्ट खेलते हुए लार्ड्स में इंग्लैंड के विरुद्ध 131 रन की पारी खेली थी। अजहर ने गांगुली की तारीफ करते हुए कहा, '2006-07 में दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर उन्होंने जो शानदार वापसी की थी उससे लगता है कि वह मानसिक रूप से कितना मजबूत हैं। वापसी करना इतना आसान नहीं है लेकिन उन्होंने आलोचकों को गलत साबित करते हुए धमाकेदार वापसी की।'
गांगुली को 2006 की शुरुआत में इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट के लिए टीम से बाहर कर दिया गया था। उन्होंने दिसंबर 2006 में दक्षिण अफ्रीका दौरे पर वापसी की और भारत के लिए सर्वाधिक रन बनाए। वनडे टीम में उन्होंने चार अर्धशतकों के साथ वापसी की। इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज में वह सर्वाधिक रन बनाने वालों की सूची में दूसरे स्थान पर रहे। यही नहीं पाकिस्तान के खिलाफ घरेलू सीरीज में उन्होंने लगातार दो शतक जड़े जिनमें से बेंगलूर में खेली गई 239 रन की पारी को कौन भूल सकता है।
इनमें से पहला शतक उन्होंने अपने घरेलू मैदान ईडन गार्डस पर जमाया। अजहर ने कहा, 'ईडन पर शतक जमाकर गांगुली ने राहत महसूस की होगी। यह शतक 97 टेस्ट खेलने के बाद उसकी झोली में आया। इसके लिए उन्होंने काफी मेहनत की थी।' इस बीच यह पूछने पर कि श्रीलंका के खिलाफ एशिया कप फाइनल में सौ रन से मिली हार के लिए क्या अनुभव की कमी अहम कारण रहा अजहर ने कहा, 'नहीं। यह एक दिन के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। युवा खिलाडि़यों ने लगातार अच्छा खेला है। इस हार के ज्यादा अर्थ निकालने की जरूरत नहीं है।'