
कोलंबो। भारतीय कप्तान अनिल कुंबले अंपायर रेफरल प्रणाली का उपयोग करने वाले पहले क्रिकेटर जबकि श्रीलंका के तिलकरत्ने दिलशान इस नई तकनीक का फायदा उठाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए।
भारत और श्रीलंका के बीच पहले टेस्ट मैच में रेफरल प्रणाली को अपनाया जा रहा है। इस बहुचर्चित प्रणाली का पहला उपयोग श्रीलंकाई पारी के 46वें ओवर में तब किया गया जब अंपायर मार्क बेनसन ने हरभजन सिंह की गेंद पर मलिंडा वर्णपुरा के खिलाफ पगबाधा की अपील ठुकरा दी। कुंबले ने इस पर तीसरे अंपायर रूडी कर्टजन की राय मांगी जिन्होंने मैदानी अंपायर के फैसले को सही ठहराया। वर्णपुरा उस समय 86 रन पर थे और उन्होंने बाद में अपना दूसरा टेस्ट शतक जड़ा। ऐसा पहली बार हुआ है जब स्टंपिंग या रन आउट के अलावा किसी अन्य फैसले के लिए तीसरे अंपायर की मदद ली गई।
पारी के 106वें ओवर में फिर से ऐसी स्थिति पैदा हुई। तब बेनसन ने जहीर खान की गेंद पर दिलशान को विकेटकीपर के हाथों कैच आउट दे दिया था। श्रीलंका ने इस फैसले को चुनौती दी और तीसरे अंपायर का फैसला बल्लेबाज के पक्ष में गया इस तरह दिलशान इस तकनीक का फायदा उठाने वाले पहले खिलाड़ी बने। भारत ने अपना दूसरा रेफरल अंतिम ओवर में गंवाया जब हरभजन की गेंद पर दिलशान ने स्लाग स्वीप करने का प्रयास किया जो उनके पैड पर लगी। गेंद लेग स्टंप के बाहर पिच हुई लेकिन कुंबले ने इसे रेफर कर दिया और फैसला बल्लेबाज के पक्ष में गया।
भारत के पास इस तरह से अब इस पारी में केवल एक रेफरल बचा हुआ है। नियमों के अनुसार कोई भी टीम एक पारी में तीन बार रेफरल प्रणाली का उपयोग कर सकती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने पहली बार इस टेस्ट सीरीज में प्रायोगिक आधार पर रेफरल प्रणाली को लागू किया है। इसके तहत एक बल्लेबाज या क्षेत्ररक्षण करने वाला कप्तान मैदानी अंपायर के फैसले पर तीसरे अंपायर की मदद ले सकता है।