नई दिल्ली। आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान रनों के एवरेस्ट पर पहुंचने वाले भारतीय 'रन मशीन' सचिन तेंदुलकर तीन मैचों के विश्राम के बाद इंग्लैंड के खिलाफ 23 नवंबर को चौथे एक दिवसीय मैच में एक बार फिर बेंगलूर के उस चिन्नास्वामी स्टेडियम में धमाकेदार वापसी की आस के साथ उतरेंगे जो उनके लिए काफी भाग्यशाली रहा है।
आस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में टेस्ट मैचों में सर्वाधिक रन का वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा का रिकार्ड तोड़ने के बाद टेस्ट क्रिकेट में 12000 रन बनाने वाला पहला बल्लेबाज बने तेंदुलकर को चिन्नास्वामी स्टेडियम काफी रास आता है जिन्होंने यहां आठ मैचों में एक शतक और दो अर्धशतक की मदद से सर्वाधिक 365 रन बनाए है। इस दौरान उनका औसत 45.62 रन प्रति पारी का रहा और वह सात मैचों की सीरीज में पहले ही 0-3 से पिछड़ रहे इंग्लैंड की परेशानी और बढ़ा सकते है।
तेंदुलकर के अलावा यह मैदान भारत के लिए भी लकी रहा है जिससे यहां खेले 14 मैचों में से नौ में जीत हासिल की है जबकि चार में उसे हार का मुंह देखना पड़ा और आस्ट्रेलिया के खिलाफ एक मैच बेनतीजा समाप्त हुआ। इंग्लैंड अगर लगातार चौथा मैच हार जाता है तो वह एक दिवसीय सीरीज भी गंवा देगा लेकिन 'करो या मरो' के मुकाबले से पहले मेहमान के हौसले यह जानकर बुलंद होंगे कि उसने यहां खेले दोनों मैचों में मेजबान टीम को घुटने टेकने पर मजबूर किया है। हालांकि राजकोट की तरह ही इस मैदान से भी उसका कोई खिलाड़ी वाकिफ नहीं है।
तेंदुलकर के अलावा अच्छी फार्म में चल रहे आक्रामक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग भी अक्सर इस मैदान पर अपना जलवा दिखाते रहे है। उन्होंने यहां चार मैचों में 73 की बेहतरीन औसत से 219 रन जोड़े और इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 103.79 रहा जो किसी भी विरोधी टीम के पसीने छुड़ाने के लिए काफी है। सहवाग ने इसके अलावा आलराउंड प्रदर्शन करते हुए पांच विकेट भी चटकाए है। इंग्लैंड को हालांकि इस बात से राहत मिलेगी कि सीरीज में अब तक दो शतक जमा चुके युवराज सिंह इस मैदान पर असफल रहे है। वह चार मैचों की तीन पारियों में केवल 55 रन जोड़ पाए है।
भारतीय गेंदबाजों में जहीर खान ने यहां चार मैचों में 34.66 की औसत से छह विकेट चटकाएं है जबकि निश्चित तौर पर यह हरभजन सिंह के पसंदीदा मैदानों में शुमार नहीं है। इस ऑफ स्पिनर ने यहां तीन मैचों में केवल तीन विकेट हासिल किए जबकि इस दौरान उनका औसत 42.33 रन प्रति विकेट रहा। कानपुर की तरह इस मैदान पर एक बार फिर गेंद और बल्ले के बीच अच्छा संघर्ष देखने को मिल सकता है क्योंकि यहां कि पिच से गेंदबाजों और बल्लेबाजों दोनों को मदद मिलती है।
चिन्नास्वामी स्टेडियम पर सर्वाधिक स्कोर का रिकार्ड आस्ट्रेलिया के नाम है जिसने 12 नवंबर, 2003 को भारत के खिलाफ दो विकेट पर 347 रन बनाए थे। हालांकि इस मैदान पर हुए 16 मैचों में सिर्फ चार बार ही टीमें 300 रन का आंकड़ा पार कर पाई है। भारत का यहां सर्वाधिक स्कोर आस्ट्रेलिया [25 मार्च 2001] के ही खिलाफ 315 रन है जबकि इंग्लैंड यहां कभी 218 से अधिक रन नहीं बना पाया लेकिन उसने यहां खेले दोनों मैचों में मेजबान टीम को शिकस्त दी है। भारत और इंग्लैंड की टीमें इस मैदान पर पहली बार 20 जनवरी 1985 को भिड़ी थी। भारत ने 46 ओवर के इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए छह विकेट पर 205 रन का स्कोर खड़ा किया था जिसके जवाब में इंग्लैंड ने एलन लैंब [नाबाद 59] के अर्धशतक की मदद से 45 ओवर में सात विकेट पर 206 रन बनाकर मैच अपने नाम किया।
दोनों टीमों पिछली बार 26 फरवरी, 1993 को यहां आमने सामने थी और तब गेंदबाजों के जलवे से इंग्लैंड ने 48 रन से जीत दर्ज की थी। भारत ने जवागल श्रीनाथ [41 रन पर पांच विकेट] की घातक गेंदबाजी के दम पर इंग्लैंड को 47 ओवर में नौ विकेट पर 218 रन के मामूली स्कोर पर रोक दिया था लेकिन पाल जारविस [35 रन पर पांच विकेट] ने इंग्लैंड को जोरदार वापसी दिलाते हुए भारतीय बल्लेबाजी की रीढ तोड़कर मेजबान टीम को 170 रन पर ढेर कर दिया था।